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लॉकडाउन में वर्दी का रौब घटा लेकिन रुतबा बढ़ा, धूप-बारिश हर समय तैनात नजर आए पुलिसकर्मी
Thu, 14 May 2020 05:10 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 14 May 2020 05:10 PM IST
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पुलिस ने शहर में लोगों को भोजन मुहैया करवाया।
- फोटो : amar ujala
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लखनऊ में लॉकडाउन के दौरान कानून व्यवस्था और अपराध के क्षेत्र में बड़े बदलाव आए। 160 साल पुरानी खाकी बीते 50 दिनों में नए रूप में सामने आई। अपराध के तौर-तरीके भी बदल गए। मारपीट, लूटपाट, चोरी, डकैती की वारदातें न के बराबर हुईं तो इंटरनेट और मोबाइल फोन से जुड़े अपराध हावी रहे। इस दौरान वर्दी का रौब घटा लेकिन रुतबा बढ़ गया।
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पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय ने कहा कि बीते 50 दिन से कोई भी सार्वजनिक और निजी वाहन नहीं चल रहा। लोग घरों में कैद हैं। इसके बावजूद एक भी दिन ऐसा नहीं गया जिसमें पुलिस चौराहों पर मुस्तैद न दिखी हो। कड़ी धूप और बारिश में खुद को खतरे में डालकर पुलिस सिर्फ समाज को बचाने के लिए अपनी ड्यूटी निभाती रही।
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दूरदराज से आने वाले मजदूरों, श्रमिकों और गरीब कामगारों को पुलिस सहारा देती दिखी। पुलिस ने लोगों को खाना, राशन, दूध पहुंचाया। घर तक दवाएं पहुंचाईं। जन्मदिन और वर्षगांठ पर घर जाकर केक और शुभकामनाएं दीं।
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लॉकडाउन में फंसे बाहर के लोगों को उनके घर तक पहुंचाया। समाज को महामारी से बचाने के लिए पुलिसकर्मी अपने घर-परिवार तक को भूल गए। महकमे के तमाम इंस्पेक्टर, दरोगा, सिपाही दो-दो सप्ताह तक घर-परिवार, पत्नी व बच्चों को भूलकर लगातार ड्यूटी करते रहे।
...लेकिन साइबर क्राइम बढ़े
पुलिस आयुक्त ने कहा कि चोरी, डकैती, लूटपाट, छिनैती, नकबजनी, अपहरण, मारपीट जैसे मामलों में 80 प्रतिशत तक कमी आई है। हत्या और दुष्कर्म की दो-चार वारदातें ही हुई हैं जबकि तकनीकी पर आधारित अपराध बढ़े हैं।