{"_id":"62b226d50196f178333f07dc","slug":"police-station-incharge-suspend-lucknow-news-lko6362387180","type":"story","status":"publish","title_hn":"अजीजनगर पुलिस चौकी प्रभारी रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित, वीडियो हुआ था वायरल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अजीजनगर पुलिस चौकी प्रभारी रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित, वीडियो हुआ था वायरल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। मड़ियांव थाने के अजीजनगर चौकी प्रभारी संतोष सिंह को रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। अजीजनगर चौकी के अंदर का एक वीडियो सोमवार देर रात सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले की जांच एसीपी अलीगंज को सौंपी गई थी। शुरूआती जांच में चौकी प्रभारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई जिसके आधार पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने उन्हें निलंबित कर दिया है।
एडीसीपी उत्तरी प्राची सिंह के मुताबिक, मड़ियांव की अजीजनगर चौकी के प्रभारी संतोष सिंह को मंगलवार को निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें चौकी के अंदर पांच लोग मौजूद दिख रहे हैं। इसमें चौकी प्रभारी संतोष सिंह अपनी कुर्सी पर बैठे हैं। दो अन्य लोग भी कुर्सी पर बैठे है। जबकि संतोष सिंह के सामने खड़े दो युवक कुछ देर बातचीत करते हैं। इस बातचीत में संतोष सिंह की आवाज आ रही है। दोनों युवक इसी बीच जेब से रुपये निकालकर गिनते हैं। सोशल मीडिया पर यह वीडियो सोमवार देर रात वायरल हुआ। इसके बाद एसीपी अलीगंज अली अब्बास को जांच सौंपी गई। शुरूआती पड़ताल में चौकी प्रभारी की भूमिका संदिग्ध मिली। प्राथमिक जांच की रिपोर्ट एसीपी ने पुलिस कमिश्नर को भेजी। इसी आधार पर संतोष सिंह को निलंबित कर दिया गया है। वहीं मामले की जांच की जा रही है।
डेढ़ महीने पुराना वीडियो बताया जा रहा
एसीपी अलीगंज अली अब्बास के मुताबिक, मामले की जांच में सामने आया है कि चौकी के अंदर बैठे प्रभारी संतोष सिंह की भूमिका संदिग्ध है। मामले में संतोष सिंह से भी पूछताछ की गई। संतोष ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वीडियो डेढ़ महीने पुराना है। हादसे के एक मामले दोनों पक्षों ने आपस में समझौता किया था। इसी को लेकर दोनों युवक वहां पहुंचे थे। उनसे लेन-देन का कोई सरोकार नहीं है। लेकिन अधिकारियों को जांच में चौकी प्रभारी संतोष सिंह की भूमिका संदिग्ध मिली। एसीपी के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंप दी जाएगी।
विज्ञापन
दरोगा का विवादों से पुराना नाता
पहले भी कई मामलों में संतोष सिंह के खिलाफ शिकायतें हुई है। आरोपी चौकी प्रभारी का पिछले दिनों चौकी में बिस्तर पर लेटकर फरियाद सुनते हुए वीडियो 17 मई को वायरल हुआ था। इसमें वह पीड़ित से अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। उसके बाद भी अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
विज्ञापन
एडीसीपी उत्तरी प्राची सिंह के मुताबिक, मड़ियांव की अजीजनगर चौकी के प्रभारी संतोष सिंह को मंगलवार को निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें चौकी के अंदर पांच लोग मौजूद दिख रहे हैं। इसमें चौकी प्रभारी संतोष सिंह अपनी कुर्सी पर बैठे हैं। दो अन्य लोग भी कुर्सी पर बैठे है। जबकि संतोष सिंह के सामने खड़े दो युवक कुछ देर बातचीत करते हैं। इस बातचीत में संतोष सिंह की आवाज आ रही है। दोनों युवक इसी बीच जेब से रुपये निकालकर गिनते हैं। सोशल मीडिया पर यह वीडियो सोमवार देर रात वायरल हुआ। इसके बाद एसीपी अलीगंज अली अब्बास को जांच सौंपी गई। शुरूआती पड़ताल में चौकी प्रभारी की भूमिका संदिग्ध मिली। प्राथमिक जांच की रिपोर्ट एसीपी ने पुलिस कमिश्नर को भेजी। इसी आधार पर संतोष सिंह को निलंबित कर दिया गया है। वहीं मामले की जांच की जा रही है।
विज्ञापन
डेढ़ महीने पुराना वीडियो बताया जा रहा
एसीपी अलीगंज अली अब्बास के मुताबिक, मामले की जांच में सामने आया है कि चौकी के अंदर बैठे प्रभारी संतोष सिंह की भूमिका संदिग्ध है। मामले में संतोष सिंह से भी पूछताछ की गई। संतोष ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वीडियो डेढ़ महीने पुराना है। हादसे के एक मामले दोनों पक्षों ने आपस में समझौता किया था। इसी को लेकर दोनों युवक वहां पहुंचे थे। उनसे लेन-देन का कोई सरोकार नहीं है। लेकिन अधिकारियों को जांच में चौकी प्रभारी संतोष सिंह की भूमिका संदिग्ध मिली। एसीपी के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंप दी जाएगी।
विज्ञापन
दरोगा का विवादों से पुराना नाता
पहले भी कई मामलों में संतोष सिंह के खिलाफ शिकायतें हुई है। आरोपी चौकी प्रभारी का पिछले दिनों चौकी में बिस्तर पर लेटकर फरियाद सुनते हुए वीडियो 17 मई को वायरल हुआ था। इसमें वह पीड़ित से अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। उसके बाद भी अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।