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फर्जी डिग्रीः जालसाजों के ठिकानों पर छापेमारी, पुलिस ने लखनऊ यूनिवर्सिटी को भेजी रिपोर्ट
Fri, 19 Apr 2019 01:46 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 19 Apr 2019 01:46 PM IST
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लखनऊ में बिना पढ़ाई और परीक्षा के विधि स्नातक बनाने के काले कारोबार में लविवि कर्मचारियों की संलिप्तता पर पुलिस ने रिपोर्ट बनाकर विश्वविद्यालय प्रशासन को भेज दी है। रिपोर्ट भेजने के साथ ही पुलिस ने चार फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी है।
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क्षेत्राधिकारी महानगर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, ये चारों कर्मचारी हैं जीबी सिंह, राजीव पांडेय, एनपी सिंह और संजय सिंह बाबा। हालांकि लविवि ने अभी तक एनपी सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
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क्षेत्राधिकारी महानगर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, राजधानी में बिना पढ़ाई और परीक्षा के ही विधि स्नातक बनाने का काला कारोबार चल रहा था।
जालसाजों के गिरोह ने युवकों को डेढ़ लाख प्रति सेमेस्टर (यानि नौ लाख रुपये में छह सेमेस्टर) की दर से डिग्री देने का दावा किया था। पुलिस ने बुधवार को इस गिरोह का पर्दाफाश किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में तैनात बर्खास्त बाबू खिरोधन प्रसाद उर्फ गंगेश गिरोह का सरगना था।
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इसी विभाग में तैनात नायाब हुसैन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात है। इन दोनों को ही पुलिस बुधवार को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरोह में शामिल दीवान सिंह, दीपक तिवारी उर्फ दीपू, मधुरेंद्र पांडेय व महमूदाबाद स्थित सरदार सिंह महाविद्यालय केप्राचार्य रविंद्र प्रताप सिंह को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
रिमांड पर लिया जाएगा सरगना
पिछले कुछ दिनों से चारों कर्मचारियों का पता नहीं
क्षेत्राधिकारी के मुताबिक ,इस जालसाजी के गिरोह में सक्रिय भूमिका निभाने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के जिन चार कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, वे पिछले कुछ दिनों से लविवि नहीं आए। सभी कर्मचारी परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में ही तैनात हैं या अन्य विभागों में इसकी जानकारी की जा रही है।
आशंका है कि इस गिरोह के संचालन के पीछे उच्च शिक्षा से जुड़े कई सफेदपोश भी शामिल हैं। उनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं। क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार सिंह के मुताबिक , गिरोह का नेटवर्क अवध विवि, कानपुर विवि और दिल्ली विश्वविद्यालय तक फैला है। इन विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों की कुंडली तैयार की जा रही है।
...तो प्रिंटर और स्कैनर भी लविवि का ही करते थे इस्तेमाल
सूत्रों की माने तो यह गिरोह जो प्रिंटर और स्कैनर प्रयोग करता था। वह भी लखनऊ विश्वविद्यालय का ही है। जिसे चोरी से इन जालसाजों ने हासिल किया था। इसकी भी जांच कराई जा रही है कि यह सामान जालसाजों को कौन उपलब्ध कराता था।
क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, गिरोह का सरगना खिरोधन प्रसाद उर्फ गंगेश इस काले कारोबार में काफी लंबे समय से जुड़ा है। उसके खिलाफ 2009 में गैंगेस्टर की कार्रवाई विकासनगर थाने से की गई है। पुलिस उसकी संपत्ति का ब्योरा भी जुटा रही है। ताकि जालसाजी की कमाई से खरीदी गई संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की जा सके।
क्षेत्राधिकारी के मुताबिक ,इस जालसाजी के गिरोह में सक्रिय भूमिका निभाने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के जिन चार कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, वे पिछले कुछ दिनों से लविवि नहीं आए। सभी कर्मचारी परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में ही तैनात हैं या अन्य विभागों में इसकी जानकारी की जा रही है।
आशंका है कि इस गिरोह के संचालन के पीछे उच्च शिक्षा से जुड़े कई सफेदपोश भी शामिल हैं। उनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं। क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार सिंह के मुताबिक , गिरोह का नेटवर्क अवध विवि, कानपुर विवि और दिल्ली विश्वविद्यालय तक फैला है। इन विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों की कुंडली तैयार की जा रही है।
...तो प्रिंटर और स्कैनर भी लविवि का ही करते थे इस्तेमाल
सूत्रों की माने तो यह गिरोह जो प्रिंटर और स्कैनर प्रयोग करता था। वह भी लखनऊ विश्वविद्यालय का ही है। जिसे चोरी से इन जालसाजों ने हासिल किया था। इसकी भी जांच कराई जा रही है कि यह सामान जालसाजों को कौन उपलब्ध कराता था।
क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, गिरोह का सरगना खिरोधन प्रसाद उर्फ गंगेश इस काले कारोबार में काफी लंबे समय से जुड़ा है। उसके खिलाफ 2009 में गैंगेस्टर की कार्रवाई विकासनगर थाने से की गई है। पुलिस उसकी संपत्ति का ब्योरा भी जुटा रही है। ताकि जालसाजी की कमाई से खरीदी गई संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की जा सके।