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बिहार: गवाही देने से नाराज लोगों पर मजदूर को अगवा कर पीटने का आरोप, इलाज के दौरान मौत; पुलिस की भूमिका पर सवाल

Tue, 06 Oct 2026 03:56 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Tue, 06 Oct 2026 03:56 PM IST
सार

सारण में आपराधिक मामले में गवाही देने वाले 48 वर्षीय मजदूर शंभु शरण साह की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने तीन लोगों पर अगवा कर बंधक बनाने, मारपीट और दो लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया है।

 

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The price of testimony was paid with life, questions raised on the role of the police:
मृतक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आपराधिक मामले में गवाही देने से नाराज लोगों पर 48 वर्षीय मजदूर शंभु शरण साह को अगवा कर बंधक बनाने और मारपीट करने का आरोप है। गंभीर रूप से घायल शंभु शरण की पांच अक्टूबर की रात पटना के रूबन अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना सारण के अवतार नगर थाना क्षेत्र के रामपुर प्रतापपुर की बताई जा रही है।

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परिजनों के अनुसार, शंभु शरण एक अक्टूबर को मजदूरी करने के लिए घर से निकले थे। आरोप है कि तीन लोग उन्हें जबरन अपने साथ ले गए और एक आरोपित के घर में बंद कर दिया। वहां उनसे दो लाख रुपये की मांग की गई। रुपये नहीं देने पर उनके साथ मारपीट की गई। सूचना मिलने पर पहुंचे परिजनों के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है। गंभीर हालत में शंभु शरण को पहले दिघवारा और फिर पीएमसीएच ले जाया गया। बाद में उन्हें पटना के रूबन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

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गवाही देने के बाद धमकी मिलने का आरोप
मृतक की पत्नी सुषमा देवी का आरोप है कि शंभु शरण ने अवतार नगर थाना कांड संख्या 367/24 में आरोपित मुकेश कुमार सिंह के खिलाफ गवाही दी थी। उनका दावा है कि मुकेश, पिंटू और दिलेश पहले भी उनके घर आकर धमकी दे चुके थे। परिवार का कहना है कि डर के कारण उस समय पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी गई थी।

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शंभु शरण की मौत के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि परिवार को कथित धमकियों की जानकारी पुलिस को किसी माध्यम से मिली थी या नहीं। यदि पुलिस को पहले से खतरे की जानकारी थी तो उस समय क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी पड़ताल होगी।


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गवाह की सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल
गवाहों को धमकी और प्रतिशोध से बचाने के लिए Witness Protection Scheme, 2018 लागू है। खतरे के आधार पर गवाह को पुलिस सुरक्षा, सुरक्षित आवागमन, पहचान गोपनीय रखने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने का प्रावधान है। ऐसे में जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि शंभु शरण को पहले किसी तरह का खतरा था या नहीं और यदि था तो इसकी जानकारी पुलिस तक पहुंची थी या नहीं।

घटना से पहले की परिस्थितियों की भी जांच जरूरी
शंभु शरण की मौत के बाद मामला अब गंभीर आपराधिक जांच का विषय बन गया है। पुलिस के सामने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई के साथ घटना से पहले की परिस्थितियों को सामने लाने की चुनौती भी है। जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि शंभु शरण को गवाही के कारण निशाना बनाया गया या इसके पीछे कोई अन्य विवाद था। कथित धमकियों और पुलिस को दी गई सूचना की भी जांच जरूरी होगी।

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