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पिता की मौत पर भी नहीं ली छुट्टी, हर वक्त ड्यूटी पर रहते हैं मुस्तैद

Thu, 19 Jul 2018 04:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 19 Jul 2018 04:42 PM IST
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Police photographer amitabh did not take any leave in 36 years of service
पुलिस फोटोग्राफर अमिताभ सिंह - फोटो : amarujala
पुलिस महकमे में जहां छुट्टी को लेकर पूरे साल खींचतान चलती रहती है, वहीं एक पुलिसकर्मी ऐसा भी है जिसने दस साल ठेके पर काम और 26 साल की नौकरी में न तो एक भी दिन छुट्टी ली और न ही आराम फरमाने के लिए अफसर की इजाजत ली। खुद की शादी और पिता के अंतिम संस्कार में भी काम बंद नहीं किया।
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गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड में नाम दर्ज कराने की तमन्ना में पुलिस फोटोग्राफर अमिताभ सिंह हर दम ड्यूटी पर मुस्तैद रहते हैं। बगैर छुट्टी के नौकरी पूरी करने का संकल्प लिए अमिताभ ने 36 साल में 20 हजार से अधिक शवों के पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी और 1.50 लाख अज्ञात शवों की फोटोग्राफी की और उनकी गवाही ने कई अपराधियों को उम्रकैद तक की सजा दिलाई। 
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57 वर्षीय अमिताभ ने वर्ष 1984 में पुलिस महकमे में ठेके पर फोटोग्राफी शुरू की थी। वक्त गुजरने के साथ वह पुलिस के कार्य में रमते चले गए। ठेके पर काम के दौरान रोजाना ड्यूटी पर मुस्तैद रहने की लगन से प्रभावित होकर तत्कालीन एसएसपी शैलजा कांत मिश्र ने 4 जून 1992 को उन्हें महकमे में नियुक्त कर दिया। इसके साथ ही अमिताभ ने बगैर छुट्टी के पूरी नौकरी का संकल्प ले डाला।
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उनकी तमन्ना लगातार ड्यूटी पर मुस्तैद रहने का रिकॉर्ड बनाकर गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने की है। अमिताभ बताते हैं कि ठेके पर पुलिस फोटोग्राफी के दौरान 12 अक्तूबर 1990 को पिता पूरन की मृत्यु के समय भी वह एक घटनास्थल पर फोटो खींच रहे थे। वहीं से घर जाकर पिता का पार्थिव शरीर भैंसा कुंड ले गए। त्येष्टि की और फिर दूसरी वारदात का फोटो खींचने के लिए रवाना हो गए।

कप्तान ने चस्पा कराया था प्रशस्तिपत्र 

Police photographer amitabh did not take any leave in 36 years of service
पुलिस फोटोग्राफर अमिताभ सिंह - फोटो : amarujala
 पत्नी अनीता व बेटा असीम भी उनकी हौसलाअफजाई करते रहते हैं। जिले की सरहद के बाहर कदम रखे 36 साल गुजर गए हैं। अब तो अफसर का आदेश मिलते ही उनकी बाइक घटनास्थल की तरफ दौड़ने लगती है। अमिताभ को काम के मुताबिक पदोन्नति न मिलने का मलाल जरूर है लेकिन इसे कभी काम में आड़े नहीं आने दिया।

उनकी लगन को देखते हुए कई कप्तानों ने पदोन्नति की फाइल तैयार कराकर उच्चाधिकारियों के पास भेजी लेकिन कोई न कोई रुकावट आ ही गई।अमिताभ कहते हैं कि दिन हो या रात। सर्दी, गर्मी और बरसात का उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। बरसों लगातार काम के दौरान छुटपुट बीमारी आई तो परवाह नहीं की।

उन्हें सिर्फ गिनीज बुक में नाम दर्ज होने का इंतजार है। वर्ष 2013 में सेवाकाल के 21 वर्ष पूरे होने पर पुलिस फोटोग्राफर अमिताभ सिंह ने तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरके चतुर्वेदी को बगैर छुट्टी के नौकरी का लंबा सफर तय करने की जानकारी दी। इस पर अचंभित कप्तान ने ब्योरा चेक कराया। एक दिन की भी छुट्टी न लिए जाने की पुष्टि पर उन्होंने सार्वजनिक तौर पर पीठ थपथपाने के साथ अमिताभ की चरित्र पंजिका में प्रशस्तिपत्र चस्पा कराया था। 
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