Police ki Pathshala: मोबाइल फोन को जरूरत ही रहने दें, अपराध का जरिया न बनने दें
अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गया। जहां पुलिस अफसरों ने छात्राओं को मुश्किल होने पर पुलिस से मदद लेने के लिए प्रेरित किया और कहा कि पुलिस की मदद लेने से न झिझकें।
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मोबाइल फोन को जरूरत ही रहने दें अपराध का जरिया न बनाएं। ट्रैफिक नियमों का पालन करें, जरूरत पर 112, 181, 1090, 1098 जैसे नंबरों पर काल करें। एसी ही कई अहम जानकारियों को देते हुए एडीसीपी सेंट्रल मनीषा सिंह व 181 वन स्टाप सेंटर मैनेजर अर्चना सिंह ने पुलिस की पाठशाला की शुरुआत की। आयोजन अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से किया गया, जिसमें सहभागी बने सेंट जोसेफ इंटर कालेज (बजाज ग्रुप), लखनऊ कमिश्नरेट और 181 वन स्टाफ सेंटर। स्कूल के एमडी राजेश अग्रवाल और सीमा अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। राजेश अग्रवाल ने कहा कि एसे आयोजन से सिर्फ बच्चों का नहीं बल्कि शिक्षकों व प्रबंधन भी जागरूक होता है।
डिजिटल फुटप्रिंट से पकड़ा जाएगा अपराधी
एडीसीपी सेंट्रल ने कहा कि यदि कोई लड़का किसी लड़की को मैसेज करके परेशान करता है, मिस्ड काल करता है, मेल करता है। लड़की विरोध करती है, घर वालों से शिकायत की धमकी देती है तो कोई छात्र यदि उस मैसेज को अपने मोबाइल से डिलीट करके समझता है बच गया तो गलत है। वह मैसेज उसके मोबाइल से तो डिलीट हो गया पर सर्वर पर पड़ा रहता है। उसी डिजीटल फुटप्रिंट से उसे पकड़ा जाता है। इसलिए अपराध से बचें।
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जरूरी नहीं की पीड़ित आप ही हों
वन स्टाप सेंटर प्रभारी अर्चना सिंह ने भरोसा दिलाया कि जब भी आप किसी मुसीबत में होंगे, 181 पर फोन करें मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता किसी के लिए भी मदद मांग सकता है, जरूरी नहीं कि पीड़ित वही हो।
ये जानकारी भी दी गई
अर्चना सिंह ने कहा कि वन स्टाप सेंटर महिलाओं को रेस्क्यू करने, उन्हें निशुल्क कानूनी मदद दिलाने, अपने पैरों पर खड़ा करने, चिकित्सकीय सहायता देने से लेकर घरेलू हिंसा, दुष्कर्म, छेड़खानी समेत सभी प्रकार के महिला अपराधों के खिलाफ एक्शन लेने वाली संस्था है।
मनीषा सिंह ने कहा कि ट्रैफिक नियमों का पालन करें, वर्चुअल दुनिया में व्यक्तिगत जानकारियां साझा करने से बचें। किसी से भी ओटीपी न साझा करें। पासवर्ड स्ट्रांग रखें, मोबाइल फोन का इस्तेमाल समझदारी करें।
छात्रा ने पूछा: ट्रैफिक पुलिस अक्सर मोबाइल फोन चलाती रहती है...
एक छात्रा ने एडीसीपी से पूछा कि पुलिस अक्सर मोबाइल चलाती रहती है, हम लोग जाम में जूझते रहते हैं। इस पर मनीषा सिंह ने कहा कि नहीं ऐसा नहीं, रोटेशन में ड्यूटी होती है। रेस्ट के दौरान ही कोई ऐसा करता होगा। कई बार जरूरी फोन, आदेश आते रहते हैं शिफ्ट करने की काल आती है, उस दौरान फोन रिसीव करते होंगे। व्यस्त चौराहों पर तो एकदम फोन का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं।