हर रोज काशी विश्वनाथ की सुरक्षा भेद रहे हैं ये!
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काशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था ये हर रोज भेद देते हैं। पुलिस की कोई तरकीब काम नहीं आती। जी हां मंदिर परिसर में मौजूद बंदर ही पुलिस की समस्या का कारण बन गए हैं।
परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर वहां बिछाए गए सीसीटीवी कैमरा नेटवर्क के तार व केबिल बंदर आए दिन तोड़ देते हैं।
बाहर रखे इलेक्ट्रानिक उपकरणों का भी ऐसा ही हाल होता है। सरकार के पास इस समस्या से निपटने का कोई रास्ता नहीं है। हार कर अधिकारियों ने बचाव का एक दूसरा रास्ता निकाला है।
बंदर तोड़ते हैं तार
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर त्रैमासिक समीक्षा के मौके पर शुक्रवार को स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता, डीजीपी एएल बनर्जी और संयुक्त निदेशक आईबी, एस राजन ने जब पांच से अधिक सीसीटीवी और कई कैमरे बंद पाए।
कई जगह पर तार व केबिल क्षतिग्रस्त मिले और उपकरण में रख-रखाव की कम पाई गई। सुरक्षा व्यवस्था के साथ इतनी लापरवाही देखकर वह काफी नाराज हुए।
जब सुरक्षा प्रबंध से जुड़े लोगों से इसकी पड़ताल की गई तो उन्होंने बंदरों के सामने अपने आपको लाचार बताया।
ऐसे रोकेंगे इन्हें
इलेक्ट्रानिक उपकरणों को लोहे के जालीदार बक्सों में रखने की ताकीद की गई।
पुरानी तकनीकी के कैमरों को बदल कर अत्याधुनिक आईपी तकनीक युक्त कैमरे लगाने के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा गया और सामान्य टीवी सेटों को हटाकर उनकी जगह पर एलईडी सेट लगाने के निर्देश दिए गए।
कई स्थानों पर नहीं सुरक्षा
यह चूक कभी भी भारी पड़ सकती है। अधिकारियों ने सीसीटीवी कैमरों का पुरानी तकनीक होने पर भी आपत्ति जताई है।
उन्होंने परिसर की सुरक्षा के लिए गश्त व्यवस्था को और चौकस रखने के निर्देश हैं।
ये होंगे इंतजाम
जानकारों का कहना कि किसी विवाद के उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए उच्च अधिकारियों ने भी मातहतों को खास ऐहतियात बरतने के निर्देश दे रखे हैं।
बंदरों को पकड़ने या भगाने की कोशिश करते हुए कोई ऐसा कदम न उठाने को कहा है, जिससे मंदिर परिसर में कोई नई समस्या खड़ी हो जाए।
इस पर प्रमुख सचिव अनिल कुमार गुप्त का कहना है कि ‘कई कमियां सामने आई थीं जिन्हें सुधारने को कहा गया है। बंदरों की वजह से सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। अब बंदरों को तो रोका नहीं जा सकता। बंदर वहां तार व केबिल क्षतिग्रस्त कर देते हैं। इसी वजह से इन्हें सीमेंटेड नालियों या पाइप डक्ट आदि में डालने को कहा गया है।’