पुलिस विभाग के दो पदों को किया जाएगा खत्म, होगा ये बदलाव
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पुलिस महकमे में आईजी स्थापना व आईजी प्रशासन का पद समाप्त कर दिया जाएगा। इनके स्थान पर पद नाम एडीजी कार्मिक प्रथम, द्वितीय और तृतीय होगा। इसी तरह प्रदेश के सभी आठ जोन में एडीजी के पद को एडीजी काडर पद घोषित किया जाएगा। अलग-अलग रैंक के कई काडर पद जहां कोई काम नहीं है, उसे भी खत्म कर दिया जाएगा। डीजीपी जल्द ही बैठक कर इस पर निर्णय करेंगे। फिर केंद्र सरकार को इस बाबत प्रस्ताव भेजा जाएगा।
सूत्रों की मानें तो महकमे में अव्यवस्थित काडर पदों को व्यवस्थित करने की तैयारी चल रही है। इसके तहत ऐसे पदों को समाप्त कर दिया जाएगा, जहां कोई काम नहीं है या फिर उस पद पर लंबे समय से किसी को तैनात नहीं किया गया है। इसके तहत डीआईजी टेलीकॉम, आईजी, डीआईजी मानवाधिकार प्रकोष्ठ जैसे पद समाप्त किए जाएंगे।
वहीं, एडीजी साइबर क्राइम व एडीजी कम्युनिटी पुलिसिंग जैसे नए पद सृजित किए जाएंगे, तो जोनल मुख्यालय को एडीजी और जोनल मुख्यालय के रेंज को आईजी रैंक का काडर पद घोषित किया जाएगा। अभी तक सभी जोनल मुख्यालय आईजी रैंक का काडर पद हैं, जबकि रेंज मुख्यालय डीआईजी काडर पद चला आ रहा है।
इसलिए बढ़ रही महकमे में अव्यवस्था
सूत्रों का कहना है कि पहले बड़े पैमाने पर आईपीएस अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर जाते थे। इसके लिए सूचीबद्धता को 10 वर्ष की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) को आधार माना जाता था। मगर केंद्र में 360 डिग्री फॉर्मूले के आधार पर प्रतिनियुक्ति के लिए चयन होने लगा है। इसमें 10 वर्ष की एसीआर के साथ ही संबंधित अधिकारी के सीनियर, उनके समकक्ष व अधीन काम करने वालों का फीडबैक लिया जाता है।
यह व्यवस्था लागू होने के बाद प्रतिनियुक्ति के लिए चुने जाने वाले अधिकारियों की संख्या काफी कम हो गई। वहीं, इसी आधार पर लंबे समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात यूपी के दो आईपीएस अधिकारियों मुकुल गोयल और देवेंद्र सिंह चौहान को फिट नहीं पाया गया और दोनों को वापस भेजने की तैयारी है। ऐसे में जिस बैच के अधिकारियों को वर्ष 2018 में ही डीजी के पद पर प्रोन्नत हो जाना चाहिए था, उन्हें वर्ष 2020 तक इंतजार करना पड़ेगा।
...तो अटक जाएगा एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद का प्रमोशन
वर्ष 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी मुकुल गोयल और 1988 बैच के देवेंद्र सिंह चौहान के प्रतिनियुक्ति से लौटने पर एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार और कोऑपरेटिव सेल के एडीजी असित पंडा को डीजी बनने के लिए और इंतजार करना होगा। ऐसे ही दो आईजी असीम अरुण और एलवी एंटनी देव कुमार को भी एडीजी के रैंक पर प्रोन्नत होने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।