फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   police arrested fake notemaker in lucknow

जाली नोटों का सौदागर चढ़ा पुलिस के हत्थे, भारत पेट्रोलियम की नौकरी छोड़ शुरू की जालसाजी

Wed, 29 Aug 2018 11:11 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 29 Aug 2018 11:11 AM IST
विज्ञापन
police arrested fake notemaker in lucknow
बरामद जाली नोट और फर्जी डीएल - फोटो : amar ujala
लखनऊ में नाका पुलिस ने सोमवार रात चारबाग से जाली नोटों के सौदागर को गिरफ्तार कर दो हजार रुपये के 11 जाली नोट बरामद किए। उससे फर्जी नाम से बना ड्राइविंग लाइसेंस भी मिला। पुलिस व खुफिया तंत्र की पूछताछ में खुलासा हुआ कि मालदा के रास्ते जाली नोटों की खेप भेजी जा रही है।
विज्ञापन


सौदागर 44 हजार में एक लाख रुपये के जाली नोट लाकर सप्लाई कर रहा था। अपर पुलिस अधीक्षक नगर पश्चिम विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस टीम ने सूचना पर चारबाग की रेवड़ी वाली गली में नाकाबंदी कर इलाहाबाद के ताशकंद रोड निवासी रामबाबू शाक्य उर्फ आरबी शाक्य को गिरफ्तार किया।
विज्ञापन


उससे दो हजार के 11 जाली नोट व मैनपुरी निवासी अजय शर्मा के नाम से बना ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किया। वरिष्ठ उपनिरीक्षक रणजीत सिंह, उपनिरीक्षक चंद्रमोहन सिंह व वैभव कुमार, आरक्षी रामकृष्ण कुशवाहा, हरिशंकर यादव व अजीजुल हसन की टीम ने पूछताछ कर उच्चाधिकारियों को सूचना दी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिस व खुफिया तंत्र की टीमों की पूछताछ में रामबाबू ने कुबूला कि इलाहाबाद के सुलेम सराय निवासी गामा नामक दोस्त से वह जाली नोटों की खेप लेकर निकला था। उसके कब्जे से बरामद जाली नोटों में एक ही नंबर के कई नोट थे। 

दोस्त की मदद से शुरू किया था धंधा

police arrested fake notemaker in lucknow
पुलिस के हत्थे चढ़ा जालसाज - फोटो : amar ujala
वरिष्ठ उपनिरीक्षक रणजीत सिंह ने बताया कि मैनपुरी के करहल थाने के गांव पैरार शाहपुर के मूल निवासी रामबाबू ने 1974 में इलाहाबाद के मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई किया। इसके बाद 1993 तक नैनी में भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन में प्रोडक्शन मैनेजर की नौकरी की।

इसके बाद 1995 में गाजियाबाद के मॉडल टाउन में तथागत स्माल इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड नामक चिटफंड कंपनी खोली। प्रबंध निदेशक बनकर वर्ष 2004 तक कंपनी चलाकर मोटा घोटाला किया। मध्यप्रदेश के राज्य अन्वेशण ब्यूरो ने वर्ष 2005 में भोपाल में उसके खिलाफ जालसाजी का अभियोग दर्ज कराया।

वर्ष 2010 में इलाहाबाद के शाहगंज थाने में फर्जी दस्तावेज बनाकर जालसाजी का अभियोग दर्ज हुआ। इस मामले में रामबाबू तीन साल से अधिक समय तक नैनी जेल में रहा। उसने कुबूला कि वहां कई अपराधियों से उसकी दोस्ती हुई। डेढ़ साल पहले जेल से छूटा।

बांदा जेल में बंद सुरेश रंजन श्रीवास्तव ने अपने परिचित को उसकी देखभाल व रहने के इंतजाम के लिए पत्र लिखा था। यह पत्र भी पुलिस के हाथ लगा है। जेल से छूटने के बाद रामबाबू ने दोस्त गामा की मदद से जाली नोटों का धंधा शुरू किया था।  
 

परिवार से नाता तोड़ा 

police arrested fake notemaker in lucknow
जालसाज - फोटो : amar ujala
रामबाबू शाक्य ने पुलिस को बताया कि उसके पिता कुंवरपाल सिंह शिक्षक थे। उनके स्थान पर भाई नौकरी कर रहा है। रामबाबू के परिवार में पत्नी व दो बेटियां थीं। एक दामाद प्रशासनिक सेवा और दूसरा इंजीनियर है। रामबाबू की जालसाजी का परिवारीजनों ने विरोध किया तो उसने परिवार से नाता तोड़ लिया।

जेल में अपराधियों से दोस्ती हुई और रिहा होने बाद वह अकेले रहकर जाली नोटों का काम करने लगा था। बताया कि गामा ने उसे जाली नोटों की खेप दी थी। उसे बाजार में खपाने के बाद जाली नोट खरीदकर चलाने का काम शुरू किया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed