पीएम मोदी के पायलट प्रोजेक्ट को अफसरशाही ने लगा दिया पलीता
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेथेनॉल उत्पादन से जुड़े यूपी के जिस प्रोजेक्ट की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, प्रदेश की अफसरशाही ने उसे पलीता लगा दिया। एक साल से भी अधिक समय बीत गया, प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तावित मेथेनॉल कुक स्टोव वितरण योजना लागू नहीं हो सकी।
दरअसल, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत ने 21 नवंबर 2017 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने प्रदेश में नगरीय कूड़ा व कृषि अपशिष्टों से बायो मेथेनॉल उत्पादन व उज्ज्वला योजना से वंचित परिवारों में बायो मेथेनॉल कुक स्टोव वितरण की योजना का प्रस्तुतीकरण दिया था।
मुख्यमंत्री की सहमति के बाद आयोग ने अपनी मेथेनॉल टास्क फोर्स व प्रदेश सरकार के अफसरों से कई दौर की चर्चा के बाद मेथेनॉल उत्पादन से जुड़े कार्यों का एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया। 27 सितंबर 2018 को 26.50 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की डीपीआर प्रदेश सरकार को भेज दी गई।
नीति आयोग के अफसरों को उम्मीद थी कि राज्य सरकार इसके लिए बजट की व्यवस्था तत्काल ही कर देगी। कोई विशेष अड़चन हुई तो दूसरे अनुपूरक बजट में राशि मिल जाएगी। मगर, दूसरे अनुपूरक में भी बजट प्रावधान न होने से यह योजना खटाई में पड़ने की संभावना पैदा हो गई है।
मुख्यमंत्री से वित्तीय स्वीकृति दिलाने का किया आग्रह
नीति आयोग के एक अधिकारी ने ‘अमर उजाला’ को फोन पर बताया कि यह पायलट प्रोजेक्ट राज्य के वित्त विभाग में उलझा हुआ है। आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत ने 24 दिसंबर को मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा है। इसमें प्रोजेक्ट के प्रस्ताव से क्रियान्वयन के लिए अब तक की गई कार्यवाही की जानकारी दी गई है। यह भी बताया गया है कि प्रदेश सरकार के इस संबंध में किए जा रहे प्रयासों को प्रधानमंत्री ने खुलकर सराहा है। मोदी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लखनऊ में कृषि कुंभ मेले के उद्घाटन मौकेपर किसानों को ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ बताने व प्रदेश सरकार के ‘कूड़ा से कंचन’ बनाने के प्रयास की सराहना का खास तौर से उल्लेख किया है। सारस्वत ने मुख्यमंत्री से पायलट प्रोजेक्ट केलिए 26.50 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दिलाने के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित करने का आग्रह किया है।
वाराणसी, गोरखपुर सहित पांच जिलों में बंटने हैं मेथेनॉल कुक स्टोव
योजना के तहत वाराणसी, गोरखपुर, गाजीपुर, बलिया और देवरिया जिले के 20 हजार परिवारों में मेथेनॉल कुक स्टोव वितरित किए जाने हैं। इसके अलावा मेथेनॉल आधारित इंजन निर्माण सहित कृषि अपशिष्टों से मेथेनॉल उत्पादन से जुड़ी नवीनतम सस्ती तकनीक उपलब्ध कराने के लिए आईआईटी बीएचयू से हाथ मिलाने की बात शमिल है।
आकस्मिकता निधि से बन सकती है बात
वित्त वर्ष 2018-19 के दूसरे अनुपूरक बजट में भी इसकेलिए पैसे की व्यवस्था न होने से लोकसभा चुनाव से पहले इस योजना का लागू हो पाना टेढ़ी खीर माना जा रह है। हालांकि सरकार चाहे तो राज्य आकस्मिकता निधि से बजट की व्यवस्था कर योजना शुरू कर सकती है।