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नौकरों के ‘गोलमाल’ में मिली खोई बेटी
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sun, 20 Oct 2013 12:07 PM IST
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अकादमी में ‘गोलमाल’ नाटक का मंचन किया गया।
निर्देशन मोहम्मद हफीज व लेखन सतीश डे का रहा। नाटक की कहानी इस संदेश को देती है कि मालिक अगर नौकरों को समय पर तनख्वाह नहीं देगा तो गोलमाल होना तय है।
कुम्भ में खोई बेटी की तलाश में सेठ ब्रदी प्रसाद अपने नौकरों बालम व प्रीतम को तनख्वाह नहीं देता। मजबूरन उसकी गैर हाजिरी में वे घर को किराए पर उठा देते हैं।
सेठ लौटता है और भेद खुल जाता है, लेकिन इस उठापटक में खोई बेटी मिल जाती है। सुनील दीक्षित, तुषार बाजपेई, राहुल मिश्र, कीर्तिका टण्डन ने अभिनय किया।
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निर्देशन मोहम्मद हफीज व लेखन सतीश डे का रहा। नाटक की कहानी इस संदेश को देती है कि मालिक अगर नौकरों को समय पर तनख्वाह नहीं देगा तो गोलमाल होना तय है।
कुम्भ में खोई बेटी की तलाश में सेठ ब्रदी प्रसाद अपने नौकरों बालम व प्रीतम को तनख्वाह नहीं देता। मजबूरन उसकी गैर हाजिरी में वे घर को किराए पर उठा देते हैं।
सेठ लौटता है और भेद खुल जाता है, लेकिन इस उठापटक में खोई बेटी मिल जाती है। सुनील दीक्षित, तुषार बाजपेई, राहुल मिश्र, कीर्तिका टण्डन ने अभिनय किया।
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