जानें, 142 टिकट पाने वाले प्रत्याशियों के लिए क्या है सपा की रणनीति
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मिशन 2017 की कामयाबी के लिए सपा ने कमजोर सीटों पर खास तौर से ध्यान देने की रणनीति बनाई है। सपा ने हारी हुई 142 विधानसभा सीटों पर एक तिहाई टिकट पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों या उनके नजदीकी रिश्तेदारों को दिए हैं। कई पुराने दिग्गजों को भी चुनावी जंग में उतारा है।
सपा ने 2012 में हारी हुई 170 सीटों पर सात माह पहले प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया शुरू की थी। इनमें 142 सीटों के प्रत्याशियों की घोषणा शुक्रवार को हो गई। 170 सीटों को सपा नेताओं ने तीन श्रेणियों में बांटा है।
70 विधानसभा क्षेत्रों को ‘ए’, 52 को ‘बी’ और 48 को ‘सी’ श्रेणी में रखा गया है। ‘ए’ श्रेणी में वे सीटें हैं जहां पिछले चुनाव में सपा प्रत्याशी कम अंतर से हारे थे और जिन पर जीत की संभावना ज्यादा है।
‘बी’ श्रेणी की 52 सीटों को कड़ी मेहनत और बेहतर रणनीति बनाकर जीता जा सकता है। यूं कहें कि इन सीटों पर सपा कड़ी टक्कर दे सकती है। ‘सी’ श्रेणी की 48 सीटें सपा के लिए अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती हैं। इन सीटों पर सपा का प्रदर्शन कभी भी बहुत अच्छा नहीं रहा। इनमें आधी से ज्यादा सीट वेस्ट यूपी की हैं। यहां मुख्य मुकाबले में आने की रणनीति बनाई जा रही है।
ए श्रेणी की सीटों पर उतारे माननीय
सपा ने बेहतर प्रदर्शन वाली ‘ए’ श्रेणी की सीटों में 40 पर ऐसे नेताओं को उतारा है जो अच्छी तरह चुनाव लड़ सकें। उन पर दूसरे दलों से आए मौजूदा विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद या पूर्व मंत्री चुनाव लड़ेंगे।
पूर्व मंत्री दीपक कुमार की पत्नी मनीषा दीपक उन्नाव से लड़ेंगी तो चंदौली के पूर्व सांसद रामकिशुन के भाई बाबूलाल यादव मुगलसराय से किस्मत आजमाएंगे।
पूर्व सांसद भालचन्द्र यादव के बेटे सुबोध यादव खलीलाबाद और पूर्व सांसद बालेश्वर यादव के पुत्र बिजेन्द्र पाल यादव पडरौना से प्रत्याशी बनाए गए हैं।
पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह के बेटे वीरेन्द्र सिंह सोलंकी कासगंज की अमापुर सीट और पूर्व मंत्री राजाराम पांडेय के बेटे संजय पांडे विश्वनाथगंज (प्रतापगढ़) से उम्मीदवार होंगे। पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री रेवती रमण सिंह के बेटे व बीज विकास निगम के अध्यक्ष उज्जवल रमण सिंह करछना से लड़ेंगे। 2012 में वह बसपा से हार गए थे।
25 पूर्व विधायक चलाएंगे साइकिल
विधानसभा में फिर से पहुंचने के लिए 25 पूर्व विधायक साइकिल चलाएंगे। 2002 में बसपा से मुजफ्फरनगर जिले की पुरकाजी सुरक्षित सीट से विधायक रह चुकीं उमा किरन को सपा ने फिर से टिकट दिया है। वह 2012 में सपा से ही चुनाव लड़ी थीं। पूर्व मंत्री और पिछला उपचुनाव हारने वाले संजय गर्ग सहारनपुर से सपा उम्मीदवार होंगे।
वह इसी सीट से पहले विधायक रहे हैं। बसपा के टिकट पर विधायक रह चुके शेख सुलेमान खां बढ़ापुर (बिजनौर) से उम्मीदवार होंगे। वह अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बागपत के पूर्व विधायक साहब सिंह को इसी जिले की बड़ौत सीट पर भेजा गया है। वह पशुधन विभाग के सलाहकार भी हैं।
सिंकदराराऊ (हाथरस) के पूर्व विधायक यशपाल चौहान अपनी पुरानी सीट से ही चुनावी जंग लड़ेंगे। आरए उस्मानी को मोहम्मदी (लखीमपुर) और अनिल कुमार वर्मा को लहरपुर (सीतापुर) से उतारा गया है। तिलोई (रायबरेली) से मयंकेश्वर सिंह, महाराजपुर (कानपुर देहात) से अरुणा तोमर, हमीरपुर की राठ सीट से अंबेश कुमारी और महोबा से पूर्व मंत्री सिद्धगोपाल साहू उम्मीदवार होंगे।
पुराने नेताओं, दूसरे दलों से आने वालों पर भी भरोसा
सपा ने बस्ती की कप्तानगंज सीट पर निर्दलीय विधायक रह चुके राना कृष्ण किंकर सिंह को टिकट दिया है। वह कांग्रेस से भी चुनाव लड़ चुके हैं। भाजपा से 2007 में विधायक रहे डॉ. राजेन्द्र सिंह फतेहाबाद से उम्मीदवार होंगे। वह 2012 का चुनाव भी सपा से लड़े थे। कटरा बाजार गोंडा में दो बार विधायक रहे बैजनाथ दुबे पर फिर से भरोसा जताया है।
गोरखपुर में सहजनवा से यशपाल रावत को उम्मीदवार बनाया गया है। उनकी मां प्रभा रावत भी विधायक रह चुकी हैं। मुंगरा बादशाहपुर (जौनपुर) से ज्वाला प्रसाद यादव पर भरोसा जताया है। वह 1989 से 2002 तक विधायक रहे।
फैजाबाद में रुदौली से पूर्व विधायक अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां को टिकट दिया है। पूर्व विधायक प्रभुनारायण यादव सकलडीहा (चंदौली) में किस्मत आजमाएंगे।
वाराणसी उत्तरी से पूर्व विधायक हाजी अब्दुल समद अंसारी, रसड़ा (बलिया) से सनातन पांडेय, फाजिलनगर व कुशीनगर से क्रमश: विश्वनाथ सिंह और पीके राय चुनाव लड़ेंगे। चिल्लूपार (गोरखपुर) से राजेन्द्र सिंह उर्फ पहलवान तथा बांसी (सिद्धार्थनगर) से लालजी यादव पर भरोसा जताया गया है।
यहां से दोनों समधी लड़ेंगे चुनाव
बरेली में पूर्व राज्यसभा सदस्य वीरपाल यादव को बिथरी चैनपुर और पूर्व विधायक महिपाल सिंह यादव को आंवला से प्रत्याशी बनाया गया है। सपा नेतृत्व ने दोनों समधियों पर विश्वास जताया है।
महिपाल आंवला सीट से पिछला चुनाव हार गए थे। वीरपाल और महिपाल ने जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुखीचुनाव में एकजुट होकर सपा का झंडा गाड़ने में मदद की।
तीन विधायक, दो एमएलसी बने उम्मीदवार
पूर्व मंत्री और एमएलसी अंबिका चौधरी को फेफना (बलिया) और एमएलसी उमर अली खां को बेहट (सहारनपुर) से प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा निर्दलीय विधायक विजय सिंह को फर्रुखाबाद और पीस पार्टी से विधायक अनीसुर्रहमान (कांठ) और कमाल यूसुफ (डुमरियागंज) को टिकट दिया गया है।