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'साइकिल' सिंबल जब्त हुआ तो ये होगा अखिलेश-मुलायम का 'प्लान-बी'

Sun, 15 Jan 2017 01:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 15 Jan 2017 01:48 AM IST
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plan B of akhilesh yadav and mulayam singh yadav.
- फोटो : amar ujala

एक-दूसरे को असली-नकली साबित करने में जुटे समाजवादी पार्टी के दोनों खेमे चुनाव चिह्न ‘साइकिल’ का विकल्प तलाशने में जुट गए हैं। कारण, सिंबल जब्त हुआ तो उन्हें नए चुनाव चिह्न के लिए आवेदन करना होगा।

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चुनाव सिर पर है, ऐसे में नए चिह्न का आवंटन अखिलेश यादव और मुलायम सिंह, दोनों के लिए ही बड़ा अहम है। उनकी पूरी चुनावी रणनीति इसी को ध्यान में रखकर बन रही है।
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‘साइकिल’ चुनाव चिह्न का विवाद निर्वाचन आयोग में है। फाइनल सुनवाई के बाद आयोग ने अपना फैसला रिजर्व कर लिया है। दोनों ही खेमे आशंकित हैं कि विवाद के चलते सिंबल को फ्रीज किया जा सकता है। लिहाजा वे चुनाव चिह्न की वैकल्पिक व्यवस्था में जुटे हैं।
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दोनों ही खेमों ने इसकी रणनीति बना ली है। आयोग यदि सिंबल जब्त करेगा तो दोनों खेमों को राज्य स्तर पर अस्थायी तौर पर मान्यता प्राप्त दल की मान्यता देगा। उन्हें आयोग में पार्टी के नए नाम और चुनाव चिह्न के लिए आवेदन करना पड़ेगा।

17 जनवरी से पहले चरण में मतदान वाले जिलों में नामांकन शुरू हो रहे हैं। इसलिए दोनों खेमों के पास वक्त बिल्कुल नहीं है। उन्हें तुरंत ही नई पार्टी व चिह्न बताने होंगे। चुनाव चिह्न आवंटित करने के मामले में आयोग जल्द फैसला करेगा।

ये है मुलायम का प्लान-बी

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मुलायम ‌सिंह यादव - फोटो : amar ujala

लोकदल के सिंबल से चुनाव लड़ने का विकल्प:
मुलायम सिंह खेमे ने सिंबल जब्त होने पर प्लान-बी तैयार किया है। उनके खेमे के नेताओं ने लोकदल के अध्यक्ष सुनील सिंह से बात की है। सुनील उन्हें अध्यक्ष पद व पार्टी का सिंबल देने को तैयार हैं। लोकदल का सिंबल खेत जोतता किसान है।

1980 में जब चौधरी चरण सिंह ने लोकदल बनाया तो उनका यही सिंबल था। 1984 में उन्होंने दलित मजदूर किसान पार्टी बनाई तो भी उनके पास यही सिंबल था। चौधरी चरण सिंह के जमाने में मुलायम सिंह लोकदल के अध्यक्ष और नेता विरोधी दल रह चुके हैं। वे इस सिंबल से चुनाव लड़ चुके हैं।

सुनील के पिता राजेंद्र सिंह भी लोकदल के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। मुलायम व राजेंद्र सिंह को चौधरी चरण सिंह का नजदीकी माना जाता था। शनिवार को दिल्ली में अमर सिंह और शिवपाल यादव ने सुनील सिंह के साथ बैठक करके सिंबल के मुद्दे पर लंबी चर्चा की।

सुनील सिंह ने बिना शर्त पार्टी का सिंबल और अध्यक्ष पद देने की पेशकश की है। इस मामले में कुछ कानूनी अड़चनें हैं। कानूनी सलाह लेकर खेत जोतता किसान सिंबल लेने पर विचार किया जाएगा। फ्री सिंबल लेने का विकल्प भी खुला है।

ये है अखिलेश का प्लान-बी

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अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala

सपा (अ) और नए सिंबल से उतरेंगे चुनावी जंग में
अखिलेश यादव खेमा यह मानकर चल रहा है कि पार्टी में बहुमत के चलते सिंबल पर आयोग का फैसला उनके हक में आ सकता है। यदि सिंबल सीज हुआ तो भी अखिलेश खेमा तत्काल चुनाव मैदान में जाने के लिए तैयार है। वे अपने दल का नाम समाजवादी पार्टी (अखिलेश) रखेंगे। उनका सिंबल नया होगा।

बहरहाल सजपा के बरगद सिंबल की अटकलों को अखिलेश खेमे के नेता खारिज करते हैं। किस नए सिंबल पर अखिलेश खेमा दावा करेगा, इसका खुलासा तो अभी नहीं हुआ लेकिन मोटरसाइकिल भी एक विकल्प है।

हालांकि यह मान्यता प्राप्त दलों के लिए आरक्षित चुनाव चिह्नों की सूची में नहीं है। सपा नेताओं के मुताबिक आरक्षित चिह्नों के अलावा किसी और सिंबल पर क्लेम किया जा सकता है बशर्ते कि वह आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक हो।

बताते हैं कि आरक्षित निशानों के साथ ही अखिलेश खेमा दो-तीन चुनाव चिह्नों पर विचार कर रहा है। उनके स्केच बनाकर यह आकलन कराया जा रहा है कि उनमें से कौन का सिंबल ईवीएम पर ज्यादा स्पष्ट दिखाई देगा।

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