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लाइसेंस निरस्त होने के बाद चंपत हुआ ये बैंक, ग्राहकों के लाखों रुपये फंसे

Thu, 04 Aug 2016 01:18 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Thu, 04 Aug 2016 01:18 PM IST
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pioneer co-operative bank licence cancelled
प्रदर्शन करते लोग - फोटो : amar ujala

पायनियर को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस निरस्त होने के बाद से बैंक के अफसर चंपत हैं। अपना फंसा पैसा वापस पाने के लिए ग्राहक परेशान हैं। बुधवार को ग्राहकों का धैर्य जवाब दे गया।

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बैंक पर ताला मिला तो ग्राहक गोमतीनगर में आरबीआई कार्यालय पहुंच गए। पर यहां से उन्हें सहकारिता विभाग भेज दिया गया। करीब दो घंटे विभाग में धक्के खाने के बाद जब उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला तो उन्होंने विधानसभा मार्ग स्थित सहकारिता भवन पर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

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बैंक में कई ग्राहकों के 10-10 लाख रुपये फंसे हैं। वहीं ऐसे लोगों की संख्या काफी है जिनके 20 हजार से लेकर एक लाख रुपये फंसे हैं।

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बैंक का लाइसेंस निरस्त किए जाने की खबर ‘अमर उजाला’ ने मंगलवार को प्रकाशित की थी, जिसे पढ़कर बड़ी संख्या में ग्राहक बुधवार सुबह से ही ठाकुरगंज स्थित बैंक कार्यालय पहुंचने लगे थे।

धीरे-धीरे जब उनकी संख्या बढ़ी तो उनमें से कुछ ने बैंक के अफसरों को फोन लगाया। बैंक के मैनेजर अनूप द्विवेदी को उनके फोन नंबर 9369888400 पर कई दफा कॉल की गई, लेकिन वह स्विच ऑफ मिला। लैंड लाइन फोन नंबर 0522-3214126 भी बंद मिला।

बैंक के बाहर आरबीआई के नोटिस लगे हैं, जिनमें लाइसेंस निरस्त होने की सूचना दी गई है। परेशान ग्राहक गोमतीनगर स्थित आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे पर यहां उन्हें भीतर नहीं जाने दिया गया। कुछ देर बार एक अधिकारी से फोन पर बात करवाई गई। 

नहीं करवा पाई बेटी की शादी

pioneer co-operative bank licence cancelled
शिवदेवी - फोटो : amar ujala

पायनियर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक बंद होने के बाद बैंक कार्यालय के बाहर खड़े और सहकारिता विभाग से जूझ रहे कई ग्राहकों ने अपने पर आई इस विपदा को बताया। किसी की बेटी की शादी रुकी हुई थी, तो किसी के यहां बच्चों की पढ़ाई फंस गई है।

शिवदेवी बताती हैं कि उनकी बेटी का रिश्ता एक जगह हो गया था, लेकिन सवा साल से बैंक में उनकी एफडी रुकी हुई है, इसलिए वे उसकी शादी नहीं करवा पाईं। ऐसे ही दुखद कहानियां हर नागरिक की मिलीं।

विजय लक्ष्मी शुक्ला
जमा राशि : 10 लाख रुपये
22 मई 2004 को उन्हाेंने पायनियर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक में खाता खुलवाया था। जब से बैंक के बंद होने की बात उन्हें मालूम हुई है, वे समझ नहीं पा रहीं कि क्या करें। उनकी दो बेटियां हैं जिन्हें बी-एड करवाना है।

तुलसा देवी
जमा राशि 10.60 लाख रुपये
उन्हाेंने भी 26 दिसंबर 2003 को यहां खाता खुलवाया था। 90 साल की तुलसा देवी को तो पता भी नहीं है कि यह बैंक बंद हो चुका है, उनके बेटे राजेश कुमार सिंह परेशान होकर घूम रहे हैं कि किसी तरह इतना पता चल जाए कि बैंक वाले कहां चले गए।

श्रवण कुमार 
जमा राशि : 2.19 लाख रुपये 
श्रवण कुमार बताते हैं कि वे किसी स्थिति में बैंक वालों को नहीं छोड़ेंगे। उन्हाेंने बताया कि वे 13 साल से बैंक के ग्राहक रहे, यहां के मैनेजर अनूप द्विवेदी से बात भी होती थी। लेकिन अब वे अपना फोन तक बंद कर चुके हैं।

सुरैया बानो
जमा राशि : दो लाख रुपये
सुरैया बताती हैं उन्हाेंने दो लाख रुपये पायनियर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक में फिक्स डिपॉजिट करवाए थे। इसके लिए सवा नौ प्रतिशत ब्याज दर मिलनी थी। लेकिन अब यह पैसा उन्हें नहीं मिल रहा है।

शिव देवी
जमा राशि : 2 लाख रुपये
शिवदेवी ने बताया कि उनके पति ओमप्रकाश की मृत्यु दो वर्ष पहले हुई, उन्होंने मृत्यु से पहले दो लाख रुपये फिक्स डिपॉजिट इस बैंक में करवाए थे। ताकि बेटी की शादी में काम आ सकें। लेकिन अब उनका पैसा फंस गया है।

बुजुर्गो की फंसी है पेंशन

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प्रदर्शन करते लोग - फोटो : amar ujala

सतीश कुमार
जमा राशि : 50 हजार रुपये
सतीश ने लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ने के दौरान इस बैंक में 2007 में खाता खुलवाया था। 100 रुपये बैलेंस पर खाता खुला था। ट्यूशन से जो भी आय होती थी, उससे बचाकर यहां जमा करते थे। 50 हजार रुपये उन्होंने जमा कर लिए थे। लेकिन डेढ़ साल से उसमें से हजार रुपये भी उन्हें नहीं मिल सके हैं।

सरवन कुमार 
जमा राशि : तीन खातों और एफडी में : एक लाख रुपये
सरवन कुमार बताते हैं कि उन्हाेंने बैंक में 70 हजार रुपये की एफडी करवाई थी। पत्नी माधुरी का भी यहां खाता है, जिसमें 30 हजार रुपये हैं और खुद उनके खाते में करीब चार हजार रुपये हैं।

इनकी भी रकम फंसी
- फैजी के 28 हजार रुपये जमा हैं,
- मंजू सिंह के 24 हजार रुपये
- हसीब खान के 20 हजार रुपये
- अफसर हुसैन के 12 हजार रुपये जमा हैं,
- मुश्तान अली खान के छह हजार 

ठाकुरगंज स्थित पायनियर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक के बाहर कुछ बुजुर्ग बैठे नजर आए। बात करने पर पता चला कि वे बैंक के ग्राहक हैं और यहां उनकी वृद्धावस्था पेंशन जमा होती है। 

इनमें शामिल नगमा बेगम ओर जन्नतुलनिसा ने बताया कि उन्हाेंने हर तीन महीने में बैंक से 1800 रुपये मिलते थे। लेकिन पिछले साल मार्च से उन्हें कोई पैसा नहीं दिया गया है।

इसी तरह 70 साल की रामदुलारी, 65 साल की कुंदन दई, 75 साल के राम भोले भी बैंक के बाहर मायूस खड़े थे। उनके हाथों में पासबुक थी, जिन पर मार्च 2015 के बाद से कोई पैसा मिलने की एंट्री नहीं हुई है। 
 

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