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Lucknow News: महिलाओं की सहेली बना पिंक बूथ, सुना रहीं दुख-दर्द
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लखनऊ। पुलिस थानों के चक्कर से हर कोई बचने की कोशिश करता है। बात महिलाओं की हो तो उनके लिए किसी से अपनी परेशानी बता पाना और मुश्किल हो जाता है, खासकर किसी पुरुष के सामने। इस समस्या को देखते हुए शहर में कई जगह पिंक बूथ बनाए गए हैं। इसका जिम्मा महिला पुलिसकर्मी ही संभाल रही हैं, जो अब युवतियों से लेकर प्रौढ़ उम्र की महिलाओं की सहेली जैसी बन चुकी हैं। महिलाएं इन्हें बिना झिझक अपना दुख-दर्द सुना रही हैं।
हालांकि, यहां प्रेम प्रसंग से जुड़े मामले अधिक आ रहे हैं। कई महिलाएं अपने रिश्तों से जुड़े विवाद और समस्याएं भी साझा कर रही हैं, लेकिन वह लिखित शिकायत दर्ज कराने से परहेज कर रही हैं। 1090 स्थित पिंक बूथ की महिला अधिकारी ने बताया कि युवतियों को बदनामी का डर रहता है। इसलिए वह अपने मामलों को गोपनीय रखना चाहती हैं। हम इसमें उनकी पूरी मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि बूथ पर हर सप्ताह 10 से 15 प्रकरण प्रेम प्रसंग से जुड़े ही आ रहे हैं।
गोपनीयता के साथ समाधान चुनौतीपूर्ण
डालीबाग स्थित पिंक बूथ की महिला पुलिसकर्मी के अनुसार, प्रेम-प्रसंग से जुड़े मामलों में गोपनीयता बनाना और सही समाधान देना चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि, पिंक बूथ की टीम समझदारी से इन मामलों को हल करने की कोशिश करती है। महिलाओं में आत्मविश्वास भी पैदा कर रहे हैं, जिससे वह नि:संकोच अपनी बात कह सकें।
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महिला सशक्तीकरण की ओर कदम
हजरतगंज पिंक बूथ की महिला पुलिसकर्मी कविता और पूजा ने बताया कि पिंक बूथ महिलाओं को उनकी भावनाओं और समस्याओं को साझा करने का सुरक्षित माहौल दे रहा है। प्रेम प्रसंग से जुड़े मामलों में महिलाओं का आगे आना दर्शाता है कि वे अपने अधिकारों को लेकर अधिक जागरूक हो रही हैं।
महिलाएं खुलकर रखें अपनी बात
डीसीपी क्राइम कमलेश कुमार दीक्षित ने कहा कि अक्सर महिलाओं को थाने जाने में झिझक होती है। इसीलिए सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत पिंक बूथ की स्थापना की गई है। महिलाएं पिंक बूथ जाकर नि:संकोच अपनी बात रखें। उनकी गोपनीयताबरकरार रखते हुए समाधान उपलब्ध कराया जाता है। इतना ही नहीं पिंक स्कूटी भी प्रदान ही गई है, जिससे महिला पुलिसकर्मी पीड़िता के घर जाकर मदद कर सकें। हमारी कोशिश है कि महिलाएं समाज में भयमुक्त जीवन जी सकें।
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हालांकि, यहां प्रेम प्रसंग से जुड़े मामले अधिक आ रहे हैं। कई महिलाएं अपने रिश्तों से जुड़े विवाद और समस्याएं भी साझा कर रही हैं, लेकिन वह लिखित शिकायत दर्ज कराने से परहेज कर रही हैं। 1090 स्थित पिंक बूथ की महिला अधिकारी ने बताया कि युवतियों को बदनामी का डर रहता है। इसलिए वह अपने मामलों को गोपनीय रखना चाहती हैं। हम इसमें उनकी पूरी मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि बूथ पर हर सप्ताह 10 से 15 प्रकरण प्रेम प्रसंग से जुड़े ही आ रहे हैं।
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गोपनीयता के साथ समाधान चुनौतीपूर्ण
डालीबाग स्थित पिंक बूथ की महिला पुलिसकर्मी के अनुसार, प्रेम-प्रसंग से जुड़े मामलों में गोपनीयता बनाना और सही समाधान देना चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि, पिंक बूथ की टीम समझदारी से इन मामलों को हल करने की कोशिश करती है। महिलाओं में आत्मविश्वास भी पैदा कर रहे हैं, जिससे वह नि:संकोच अपनी बात कह सकें।
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महिला सशक्तीकरण की ओर कदम
हजरतगंज पिंक बूथ की महिला पुलिसकर्मी कविता और पूजा ने बताया कि पिंक बूथ महिलाओं को उनकी भावनाओं और समस्याओं को साझा करने का सुरक्षित माहौल दे रहा है। प्रेम प्रसंग से जुड़े मामलों में महिलाओं का आगे आना दर्शाता है कि वे अपने अधिकारों को लेकर अधिक जागरूक हो रही हैं।
महिलाएं खुलकर रखें अपनी बात
डीसीपी क्राइम कमलेश कुमार दीक्षित ने कहा कि अक्सर महिलाओं को थाने जाने में झिझक होती है। इसीलिए सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत पिंक बूथ की स्थापना की गई है। महिलाएं पिंक बूथ जाकर नि:संकोच अपनी बात रखें। उनकी गोपनीयताबरकरार रखते हुए समाधान उपलब्ध कराया जाता है। इतना ही नहीं पिंक स्कूटी भी प्रदान ही गई है, जिससे महिला पुलिसकर्मी पीड़िता के घर जाकर मदद कर सकें। हमारी कोशिश है कि महिलाएं समाज में भयमुक्त जीवन जी सकें।