पीएफ घोटाले में सिर्फ शुरूआती निवेश की जांच
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यूपीपीसीएल में हुए पीएफ घोटाले में अभी केवल डीएचएफएल में किए गए शुरुआती निवेश की जांच की जा रही है। 24 मार्च से पहले डीएचएफएल में कुल 18 करोड़ के निवेश की बात सामने आई है, जिसमें एपी मिश्रा को भी आरोपी बनाया गया है। बाकी पैसों का निवेश उसके बाद किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि गलत तरीके से निवेश की नींव उसी दौरान पड़ी, इस लिए उक्त अधिकारियों का दोष अधिक है। क्या इसके बाद के निवेश के दौरान जिन अधिकारियों की भूमिका रही है, उसकी भी जांच होगी? इसपर ईओडब्ल्यू के अधिकारियों का कहना है जांच के दौरान जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी उनकी जांच की जाएगी।
दस्तावेजों की छानबीन में जुटे जांच अधिकारी
ईओडब्ल्यू के जांच के अधिकारियों ने बरामद किए गए दस्तावेजों की छानबीन की। इस दौरान ब्रोकर फर्मों के अतिरिक्त भी कुछ बैंक खातों के बारे में जानकारी मिली है। इन बैंक खातों की डिटेल संबंधित बैकों से मांगी गई है।
रैली की तैयारी में जुटे बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न किया तो हड़ताल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की कि कर्मचारियों के भविष्य निधि के भुगतान की जिम्मेदारी लेकर अधिसूचना जारी करे, जिससे कर्मचारी तनावमुक्त होकर अपना कार्य निष्ठा से कर सकें। समिति ने अल्टीमेटम दिया कि 14 नवंबर की रैली की तैयारी में जुटे आंदोलनकारियों का उत्पीड़न करने पर अभियंता एवं कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे।
शक्ति भवन के समक्ष सोमवार को आयोजित सभा में समिति पदाधिकारियों ने कहा कि पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन को बर्खास्त कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। दागी कंपनी डीएचएफएल के खिलाफ अब तक एफआईआर न करने पर हैरानी जताते हुए सवाल किया गया कि कंपनी से प्रशासन की क्या सहानुभूति है? 84 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज में डूबी कंपनी डीएचएफएल किस बूते कर्मचारियों के भुगतान की गारंटी ले रही है।
गौरतलब है कि डीएचएफएल से भुगतान पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले ही रोक लगा रखी है। सभा को शैलेंद्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पांडेय, सुहैल आबिद, विपिन प्रकाश वर्मा, शशिकांत श्रीवास्तव, डीके मिश्रा, महेंद्र राय, कुलेंद्र सिंह, परशुराम, मोहम्मद इलियास, करतार प्रसाद, पीएन राय, भगवान मिश्र, पूसेलाल और आरएस वर्मा ने संबोधित किया।