डोडो, सैंटा और बादशाह फाइनल में
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी की सड़कों आवारा कुत्तों में से एक ‘डोडो’ को कार ने टक्कर मार दी थी। उसे लगभग बेहोशी की हालत में
शेखर पांडेय ने चिकित्सक को दिखाया।
उसके बचने की संभावना कम थी, लेकिन शेखर ने उसका पूरा ध्यान रखा और प्राण रक्षा की। शेखर ने ही उसे ‘डोडो’ नाम दिया। शेखर की तरह ही अंकिता सैनी और अभिषेक चतुर्वेदी ने भी ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।
इन तीनों के श्वानों को पीपल फॉर इथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल ने ‘क्यूट इंडियन डॉग अलाइव’ कॉन्टेस्ट के फाइनलिस्ट्स में चुना है।
पेटा के सचिन बांगड़ा ने बताया कि तीनों ही ने अपनी अपनी कहानियों के साथ अपने श्वान की तस्वीरें भेजी थी, जिन्हें प्रतियोगिता में आई सैकड़ों तस्वीरों में से चुना गया है।
ये सभी श्वान भारतीय प्रजातियों के हैं। दूसरी ओर अपने श्वान सैंटा क्लॉज के फाइनल में पहुंचने पर खुश अंकिता सैनी ने बताया कि उन्होंने इसे 2013 में क्रिसमस के दिन बचाया था।
वे सुबह की सैर पर थीं, तब उन्होंने उसे 1 महीने का पाया था। वह अपनी मां से बिछड़ चुका था और दूसरे आवारा श्वानों द्वारा उसे मार दिए जाने का खतरा भी था।
जब उसकी मां को वे नहीं तलाश पाईं तो अपने साथ घर ले आईं और पाल लिया। दूसरी ओर अभिषेक पांडेय ने बताया कि उन्होंने अपने श्वान ‘बादशाह’ को अपने कॉलेज से बचाया था।
उनके कॉलेज के कुछ कर्मचारी हाथों में लोहे की रॉड लिए उसे मार देना चाहते थे। इन सभी विजेताओं पर पेटा इंडिया की ही बेनजीर सुरैया ने कहा कि जिस तरह की मानवता लखनऊ के इन युवाओं ने दिखाई है। वे बेहद कम देखने को मिलती है। वे सभी अपने आप में विजेता हैं।