ओमेक्स ने आवंटियों के नौ करोड़ डकारे, प्रदर्शन-हंगामा
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गोमतीनगर स्थित ओमेक्स हाईट्स अपार्टमेंट के आवंटियों ने शनिवार को रियल एस्टेट कंपनी ओमेक्स के दफ्तर में घुसकर जमकर हंगामा किया। आवंटियों ने आरोप लगाया कि उनका 9.10 करोड़ रुपये पिछले पांच साल से कंपनी दबाए बैठी है। लगातार मांग करने के बाद भी उन्हें टरकाया जा रहा है।
आए दिन की बहानेबाजी से जब आवंटियों का सब्र जवाब दे गया तो शनिवार को उन्होंने प्रदर्शन करते हुए विभूतिखंड के साइबर कॉम्प्लेक्स स्थित ओमेक्स के ऑफिस पर धावा बोल दिया। आक्रोशित आवंटी नारेबाजी करते हुए कार्यालय के अंदर घुस गए। कार्यालय के कर्मचारियों और गार्डों से उनकी झड़प भी हुई।
पुलिस ने पहुंचकर किसी तरह से मामला शांत कराया। आवंटियों की तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। वहीं इस मामले में ओमेक्स के कर्मचारी की ओर से भी आवंटियों के खिलाफ गाली गलौज, बलवा, तोड़फोड़ और मारपीट का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया गया।
गोमतीनगर के विभूति खंड स्थित ओमेक्स हाईट्स अपार्टमेंट रेजीडेंट एसोसिएशन के सचिव रवींद्र बिहारी श्रीवास्तव ने बताया कि आईएफएमएस मनी (इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी मनी) के तौर पर आवंटन केसमय कंपनी ने 50 हजार से लेकर 90 हजार रुपये तक प्रति आवंटी से जमा कराए थे। यह पैसा कंपनी को जुलाई 2011 में वापस करना था लेकिन अब तक वापस नहीं किया। पांच साल से कंपनी टालमटोल कर रही है।
दर्ज कराया गया पैसा वापस न देने का मुकदमा
एसोसिएशन के पूर्व सचिव डीसी दीक्षित ने बताया कि पैसा न मिलने से अपार्टमेंट के कई महत्वपूर्ण काम लटक जाते हैं। इसी को लेकर शनिवार को आवंटी कंपनी के कार्यालय पर बात करने गए थे। उन्होंने कहा कि जितना पैसा कंपनी दबाए है, उससे मिलने वाले ब्याज से ही अपार्टमेंट के बहुत से मेंटेनेंस के खर्च निकल आएंगे।
विभूति खंड थाना प्रभारी ने बताया कि आवंटियों की ओर से रवींद्र बिहारी श्रीवास्तव समेत 19 लोगों ने ओमेक्स के खिलाफ पैसा वापस न करने को लेकर विश्वासघात का मुकदमा दर्ज कराया है। वहीं ओमेक्स की ओर कर्मचारी शैलेंद्र मोहन तिवारी की ओर से आवंटियों के खिलाफ मारपीट, तोड़फोड़ और गाली-गलौज का केस दर्ज कराया गया है।
कंपनी के बाउंसरों ने आवंटियों से किया दुर्व्यहार
रेजीडेंट एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि जब आवंटी ओमेक्स के कार्यालय पर गए तो उस दौरान उनका कोई विवाद नहीं हुआ। कंपनी के अधिकारी राधे गोयल और अमित से उनकी बात हुई। उन लोगों ने दस दिन के अंदर मीटिंग कर पैसा वापसी की बात कही।
इसको लेकर लिखित आश्वासन दिया लेकिन जब वे लोग बाहर निकल रहे थे तो कंपनी के बाउंसर ने आवंटियों से दुर्व्यवहार किया। एक आवंटी अनुज उन्होंने गिराने का प्रयास किया। आवंटियों की संख्या अधिक होने के कारण बाउंसर कार्यालय के अंदर जाने से उन्हें रोक नहीं पाए थे। इसी वजह से उन्होंने बाद में बदतमीजी की।