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खुद को सुरक्षित न समझें युवा! कोरोना ले रहा हर उम्र के लोगों की जान
Sat, 18 Jul 2020 10:41 AM IST
ishwar ashish
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 18 Jul 2020 10:41 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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कोरोना से होने वाली मौत में अब 50 साल से कम उम्र वालों की तादाद भी बढ़ने लगी है। वायरस हर मिथक को तोड़ते हुए कम उम्र वालों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। केजीएमयू में हुई मौत के आंकड़े यही इशारा कर रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालात में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।
राजधानी सहित पूरे प्रदेश में अब तक कोरोना से करीब 1048 लोगों की मौत हो चुकी है। विभिन्न रिपोर्टों में अभी तक कहा जा रहा था कि कोरोना 60 साल से अधिक उम्र वाले और कैंसर, किडनी, लिवर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन सहित अन्य हाई रिस्क श्रेणी के लोगों के लिए ही जानलेवा है।
लेकिन तीन दिन पहले राजधानी के डफरिन अस्पताल के 45 वर्षीय चिकित्सक डॉ. अजीजुद्दीन की मौत ने सोचने पर विवश कर दिया है। केजीएमयू में कोरोना पीड़ित मरीजों की पिछले दो माह में हुई मौतों के आंकड़े भी यही बता रहे हैं कि वायरस से 50 साल से कम उम्र के लोगों की भी मौत हो रही है।
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जो लोग हाई रिस्क श्रेणी में नहीं हैं, उनके भी लंग को वायरस अपनी चपेट में ले रहा है। केजीएमयू में जून में 17 लोगों की मौत हुई। इसमें 50 साल से कम उम्र वाले 5 लोग शामिल हैं। इसी तरह जुलाई में अब तक 18 लोगों की मौत हुई है। इसमें 50 साल से कम उम्र वाले 7 लोग हैं। एसजीपीजीआई व लोहिया संस्थान में भी यही स्थिति है।
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राजधानी सहित पूरे प्रदेश में अब तक कोरोना से करीब 1048 लोगों की मौत हो चुकी है। विभिन्न रिपोर्टों में अभी तक कहा जा रहा था कि कोरोना 60 साल से अधिक उम्र वाले और कैंसर, किडनी, लिवर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन सहित अन्य हाई रिस्क श्रेणी के लोगों के लिए ही जानलेवा है।
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लेकिन तीन दिन पहले राजधानी के डफरिन अस्पताल के 45 वर्षीय चिकित्सक डॉ. अजीजुद्दीन की मौत ने सोचने पर विवश कर दिया है। केजीएमयू में कोरोना पीड़ित मरीजों की पिछले दो माह में हुई मौतों के आंकड़े भी यही बता रहे हैं कि वायरस से 50 साल से कम उम्र के लोगों की भी मौत हो रही है।
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जो लोग हाई रिस्क श्रेणी में नहीं हैं, उनके भी लंग को वायरस अपनी चपेट में ले रहा है। केजीएमयू में जून में 17 लोगों की मौत हुई। इसमें 50 साल से कम उम्र वाले 5 लोग शामिल हैं। इसी तरह जुलाई में अब तक 18 लोगों की मौत हुई है। इसमें 50 साल से कम उम्र वाले 7 लोग हैं। एसजीपीजीआई व लोहिया संस्थान में भी यही स्थिति है।
लिवर व लंग फेल्योर से जा रही जान
केजीएमयू में भर्ती 50 साल से कम उम्र वाले कोरोना मरीजों में ज्यादातर की मौत लिवर व फेफड़े में गंभीर संक्रमण के चलते हुई। इसमें तीन जून को बलरामपुर जिले के 30 वर्षीय युवक की मल्टीपल आर्गन फेल्योर से, नौ जून को झांसी के 47 वर्षीय व्यक्ति की लिवर में संक्रमण से, एलडीए कॉलोनी के 45 वर्षीय व्यक्ति की 24 जून को फेफड़े में संक्रमण से मौत हुई। इसी तरह विजय खंड निवासी 45 वर्षीय व्यक्ति की 30 जून को व बीकेटी के 10 साल के बच्चे की चार जुलाई को, सीतापुर निवासी 47 वर्षीय व्यक्ति की पांच जुलाई को फेफड़े में संक्रमण से मौत हुई।
सर्वाधिक मौत वाले टॉप फाइव जिले
कानपुर 102
आगरा 96
मेरठ 93
गाजियाबाद 63
(स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़े)
सर्वाधिक मौत वाले टॉप फाइव जिले
कानपुर 102
आगरा 96
मेरठ 93
गाजियाबाद 63
(स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़े)
मरीजों की संख्या बढ़ी, पर मृत्यु दर स्थिर
कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन मृत्युदर स्थिर है। यह जरूर है कि जरूर है कि अब 50 साल से कम उम्र वाले भी जान गंवा रहे हैं। मरने वालों का औसत देखा जाए तो यह मई में 0.44 फीसदी, 1 से 30 जून तक 1.7 फीसदी तो पांच जुलाई को 1.6 फीसदी, 12 जुलाई को 1.27 फीसदी और 16 जुलाई को 1.3 फीसदी रहा। सीएमओ नरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि इसके बावजूद सभी को रहने की जरूरत है।
हर उम्र के लोग बरतें सावधानी
कोरोना हर उम्र के लोगों को चपेट में ले रहा है। कम उम्र वाले कई मरीजों में पहले से कोई बीमारी नहीं थी, लेकिन कई में इसमें एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम से फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। तमाम प्रयास के बाद की रिकवरी नहीं हुई। इसलिए हर उम्र के व्यक्ति को सावधान रहना होगा। - डॉ. सुधीर सिंह, मीडिया प्रभारी केजीएमयू।
लो रिस्क वालों की मृत्यु दर सामान्य
50 साल से कम उम्र वालों की मौत हमें सचेत रहने का संदेश देती है। केजीएमयू, एसजीपीजीआई और लोहिया संस्थान में गंभीर मरीज रेफर होकर आते हैं। इसमें कुछ को बचा पाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि अभी प्रदेश में लो रिस्क वालों की मृत्यु दर सामान्य है। - डॉ. विक्रम सिंह, स्टेट नोडल प्रभारी, कोरोना
उमस में ज्यादा रिएक्ट करता है वायरस
वायरस का यह नेचर होता है कि उमस के दौरान वह ज्यादा रिएक्ट करता है। अनुमान है कि यह वायरस मैन मेड है। इस वजह से भी प्रकृति के बदलाव का इस पर कोई खास असर नहीं दिख रहा। ऐसे में सावधानी बेहद जरूरी है। 50 साल से कम उम्र वालों की मौत के लिए कई चीजें जिम्मेदार हैं। यह जरूरी नहीं है कि 50 साल से कम उम्र वाले हर व्यक्ति की इम्युनिटी एक समान हो। इम्यूनिटी कमजोर होगी तो वायरस का असर ज्यादा होगा। - डॉ. टी एन ढोल, पूर्व विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी, एसजीपीजीआई।
हर उम्र के लोग बरतें सावधानी
कोरोना हर उम्र के लोगों को चपेट में ले रहा है। कम उम्र वाले कई मरीजों में पहले से कोई बीमारी नहीं थी, लेकिन कई में इसमें एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम से फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। तमाम प्रयास के बाद की रिकवरी नहीं हुई। इसलिए हर उम्र के व्यक्ति को सावधान रहना होगा। - डॉ. सुधीर सिंह, मीडिया प्रभारी केजीएमयू।
लो रिस्क वालों की मृत्यु दर सामान्य
50 साल से कम उम्र वालों की मौत हमें सचेत रहने का संदेश देती है। केजीएमयू, एसजीपीजीआई और लोहिया संस्थान में गंभीर मरीज रेफर होकर आते हैं। इसमें कुछ को बचा पाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि अभी प्रदेश में लो रिस्क वालों की मृत्यु दर सामान्य है। - डॉ. विक्रम सिंह, स्टेट नोडल प्रभारी, कोरोना
उमस में ज्यादा रिएक्ट करता है वायरस
वायरस का यह नेचर होता है कि उमस के दौरान वह ज्यादा रिएक्ट करता है। अनुमान है कि यह वायरस मैन मेड है। इस वजह से भी प्रकृति के बदलाव का इस पर कोई खास असर नहीं दिख रहा। ऐसे में सावधानी बेहद जरूरी है। 50 साल से कम उम्र वालों की मौत के लिए कई चीजें जिम्मेदार हैं। यह जरूरी नहीं है कि 50 साल से कम उम्र वाले हर व्यक्ति की इम्युनिटी एक समान हो। इम्यूनिटी कमजोर होगी तो वायरस का असर ज्यादा होगा। - डॉ. टी एन ढोल, पूर्व विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी, एसजीपीजीआई।