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Lockdown: झांसी से पैदल लखनऊ पहुंचे और अब बहराइच जा रहे भूखे-प्यासे हालात के मारे लोग

Wed, 22 Apr 2020 03:14 PM IST
ishwar ashish आरिफ/अमर उजाला, लखनऊ
आरिफ/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 22 Apr 2020 03:14 PM IST
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people coming from jhansi to lucknow during lockdown
लॉकडाउन के दौरान वापस बहराइच की तरफ लौटे लड़के। - फोटो : amar ujala

कोरोना से बचाव के लिए देशभर में किए गए लॉकडाउन के बीच लखनऊ को ऐसे दृश्य देखने पड़ रहे हैं जो इस शहर ने कभी नहीं देखे। बेबसी और लाचारी के बीच लॉकडाउन में भूखे, बीमार और हालात के मारे लोग बिना यातायात के साधन के पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर एक से दूसरे स्थान पर जा रहे हैं। 

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मंगलवार दोपहर चिलचिलाती धूप में शहीदपथ पर पैदल जा रहे दो युवकों पर अमर उजाला टीम की निगाह पड़ी तो उनसे पूछताछ की। सुर्ख लाल आंखें, थके हुए कदम, पसीने से लथपथ झोला पीठ पर लादे युवक बोला, ‘बाबूजी, झांसी से आ रहे हैं, कुछ खाना और पीने का पानी हो तो दो’।
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पानी पीकर युवक अभय बोला, पिछले पांच दिन से लगातार चल रहे हैं, अभी बहराइच तक जाना है। सड़क पर साधन हैं नहीं, अगर कोई मिला भी तो हमारे पास उसे देने के पैसे नही हैं, लिहाजा पैदल ही जा रहे।

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रास्ते मे कहीं मदद तो कहीं मिली झिड़की

बातचीत में अभय बताता है कि मजदूरी करने एक महीने पहले ही साथी रामदयाल के साथ झांसी गया था। अभी काम मिला भी नही था कि लॉकडाउन हो गया। शुरुआत में लगा की हालात संभल जाएंगे तभी जब लोग भाग रहे थे, हम रुक गए। अब न तो पैसे बचे न खाने का साधन तो अपने गांव की ओर पैदल ही निकल पड़े।
 
अभय बताता है कि कई जगह कुछ दयालु लोगों ने खाना पानी दे दिया। एक ट्रक वाले ने भी मुफ्त में कई किलोमीटर का सफर भी करवाया।

झांसी से कई किलोमीटर आगे (जगह का नाम पता नही) एक कार वाली आंटी ने पानी की एक बोतल दी। सफर के दौरान अब नल से पानी भर कर रख लेते हैं। रामदयाल बताता है कि जो भी समान था लॉकडाउन के बाद से धीरे धीरे सब खत्म हो गया। कई जगह पर पुलिस ने भी खाने पीने का सामान उपलब्ध करवाया। 
हालात ठीक होंगे तब भी नही छोड़ेंगे गांव:
अभय कहता है कि शहर की चकाचौंध अब जिंदगीभर डराएगी। जब करोना का डर खत्म हो जाएगा तब भी गांव नहीं छोड़ेंगे। दो की जगह एक टाइम का खाना भी गांव में मिला तो भी सुकून से जी लेंगे।

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