शिक्षकों पर मेहरबान अखिलेश, पेंशन में देंगे राहत
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अखिलेश सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए हरसंभव कोशिशें कर रही है। अब सरकार ने शिक्षकों को पेंशन मसले पर राहत देने की बात की है।
बुधवार को विधानपरिषद के शून्यकाल में शिक्षक दल के नेता ओम प्रकाश शर्मा व शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने माध्यमिक विद्यालयों में 1 अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों की जीपीएफ कटौती न होने का मामला उठाया।
कहा कि इससे इन्हें पेंशन का संकट खड़ा हो गया है। नेता सदन ने कहा कि सदन का सत्रावसान होते ही वह इस बारे में बैठक बुलवाएंगे। साथ ही प्रयास करेंगे कि इनकी कटौती शुरू हो जाए।
कांग्रेस के नसीब पठान और दिनेश प्रताप सिंह ने बेसिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और मूलभूत सुविधाएं न होने का मामला उठाया। सभापति गणेश शंकर पांडेय ने शिक्षकों की कमी दूर करने और अन्य मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया।
हुआ सरकार के आदेश का उल्लंघन
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में प्रधानाचार्य के साक्षात्कार में गड़बड़ी के मामले में विधान परिषद में राज्य सरकार की किरकिरी के बाद माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली को खुद बचाव में उतरना पड़ा।
उन्होंने कहा कि सरकार के आदेश का पालन न करना गंभीर मामला है। इस मुद्दे पर दो-तीन दिन में ऐसी कार्रवाई की जाएगी कि आप लोगों को भी अच्छा लगेगा। पर उन्होंने यह नहीं बताया कि कार्रवाई किसके खिलाफ की जाएगी।
शिक्षक दल के नेता ओम प्रकाश शर्मा एक बार फिर बोर्ड को तत्काल भंग करते हुए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग को बहाल किए जाने की मांग की।
पारदर्शी रवैया अपनाएगी सरकार
गौरतलब है कि विधान परिषद में मंगलवार को भी इसी मुद्दे को उठाया गया था। जिसका नेता सदन अहमद हसन कोई ठोस जवाब नही दे सके थे जिसके बाद उन्हें पूरी तैयारी के साथ सदन में आने को कहा गया था।
शिक्षक दल ने बुधवार को फिर यह मामला उठाया तो नेता सदन अहमद हसन ने कहा कि सरकार कुछ भी नहीं छिपाएगी। कार्यवाहक अध्यक्ष की जो कार्यशैली है वह अनुचित है। सचिव और उप सचिव के सामने पत्रावली न जाना गंभीर मामला है।
इसके पहले ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि उनकी जानकारी में आया है कि कार्यवाहक अध्यक्ष बैठकों का संचालन कर रहे हैं।
उनका कहना है कि वे स्वतंत्र हैं और उनके ऊपर कोई कानून लागू नहीं होता है। यह भी जानकारी में आया है कि शासन के बुलावे पर वह नहीं आए। इसलिए बोर्ड को तत्काल भंग कर दिया जाना चाहिए।
किसान मित्रों की नियुक्ति पर सरकार गंभीर
भाजपा के हृदय नारायण दीक्षित, डॉ. यज्ञदत्त शर्मा, डॉ. महेन्द्र कुमार सिंह, केदारनाथ सिंह एवं विनोद पांडेय ने किसान मित्रों की पुन: नियुक्ति का मामला उठाया।
नेता सदन अहमद हसन ने आश्वासन दिया कि सरकार इनकी पुन: नियुक्ति पर गंभीरता से विचार कर रही है।