फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   pcv vaccination decrease the rate of pneumonia

पीसीवी टीकाकरण के बाद कम हुआ निमोनिया का असर

Wed, 13 Nov 2019 01:39 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2019 01:39 AM IST
विज्ञापन
pcv vaccination decrease the rate of pneumonia
पीसीवी टीकाकरण के बाद राजधानी में 5.8 फीसदी कम हुआ निमोनिया का असर
विज्ञापन

लखनऊ सहित 12 जिलों में चल रहा निशुल्क निमोनिया टीकाकरण
सभी सीएचसी एवं जिला अस्पतालों में है टीकाकरण की व्यवस्था
मस्तिष्क ज्वर और खून में होने वाले संक्रमण से भी मिलती है निजात
निशुल्क न्यूमोकाकल कांजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) टीकाकरण शुरू होने से निमोनिया का असर करीब पांच फीसदी कम हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह नि:शुल्क पीसीवी टीकाकरण राजधानी लखनऊ सहित 12 जिलों में चल रहा है। यह टीका सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, बाल महिला चिकित्सालय, जिला चिकित्सालय में लगवाया जा सकता है। छह हफ्ते, 10 हफ्ते और 14 हफ्ते की उम्र के बच्चे को यह टीका लगाया जाता है। इस वैक्सीन से निमोनिया के साथ ही मस्तिष्क ज्वर और खून में होने वाले संक्रमण से भी मुक्ति मिलती है।
पहले चरण में छह जिलों बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर, सीतापुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती के बाद वर्ष 2018 में इसे लखनऊ, हरदोई, बाराबंकी, फैजाबाद, गोंडा और बस्ती में भी शुरू कर दिया गया। इसका काफी हद तक असर भी दिखा है। लखनऊ की स्थिति देखें तो यहां वर्ष 2017-18 में 44852 बच्चों का जन्म हुआ, जिनमें करीब छह हजार (13.37 फीसदी) बच्चे निमोनिया से ग्रसित हुए। वर्ष 2018 में टीकाकरण शुरू हुआ। 2018-19 में 39176 बच्चों का जन्म हुआ, जिसमें निमोनिया की चपेट में आने वालों की संख्या 3249 है। यह जन्मदर का करीब 8.29 फीसदी है। इस तरह देखा जाए तो टीकाकरण के बाद राजधानी में निमोनिया के केस में करीब 5.8 फीसदी कमी आई है। यूनीसेफ के डॉ. प्रफुल्ल भारद्वाज बताते हैं कि निमोनिया की चपेट में आने वाले कुल बच्चों में करीब 30 फीसदी की मौत हो जाती है। इन्हें बचाना बड़ी चुनौती है।
विज्ञापन

टीकाकरण अभियान शुरू हुए अभी सालभर ही हुआ है। इसका असर एक साल बाद दिखता है। वर्ष 2019-20 में करीब 20 से 25 फीसदी की गिरावट दिखने का अनुमान है।
- डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ लखनऊ
बड़ों के धूम्रपान से होता है बच्चों को निमोनिया
धूम्रपान, स्मॉग आदि की वजह से भी नवजात बच्चों में निमोनिया का खतरा रहता है। जिस घर में नवजात हों, वहां धूम्रपान नहीं करना चाहिए। पिछले सप्ताह स्मॉग छाए रहने की वजह से निमोनिया के मरीजों की संख्या करीब 30 फीसदी बढ़ गई थी। ओपीडी में प्रतिदिन 50 से 60 बच्चे आ रहे हैं, जो निमोनिया से ग्रसित हैं। निमोनिया की वजह से फेफड़ों में सूजन आ जाती है और कई बार पानी भी भर जाता है। बच्चों को बुखार, सर्दी-जुकाम होने पर तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए, ताकि इंफेक्शन को बढ़ने से रोका जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

- डॉ. केके यादव, बाल रोग विशेषज्ञ, लोहिया संस्थान
बच्चा एक मिनट में 40 से ज्यादा बार सांस ले तो डॉक्टर को दिखाएं
यदि एक माह से एक साल तक के नवजात की सांसें एक मिनट में 50 से ज्यादा बार चल रही हैं तो सचेत हो जाएं। इसी तरह एक से 5 साल के बीच के बच्चे की सांसें हर मिनट में 40 से ज्यादा बार हों तो तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इसकेअलावा बच्चा दूध पीना छोड़ दे, अंगुली व होठ नीला दिखे या अचानक सुस्त हो जाए तो भी चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। उल्टी-दस्त होने, पेट फूलने और सांसें तेज चलने या तलवा व हथेली के पीला पड़ने की स्थिति भी निमोनिया का संकेत है। सप्ताहभर तक सर्दी-जुकाम बना रहे, खांसी आने के साथ ही सीने में दर्द, बुखार और सांस लेने में दिक्कत हो तो भी तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
-डॉ. संजीव वर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ, केजीएमयू
बड़ों में भी निमोनिया के लक्षण
यदिकई दिनों तक बुखार आ रहा हो और पसीने के साथ कंपकंपी हो। सीने में दर्द, खांसी आए और उसके साथ गाढ़ा पीला, भूरा या खून के अंश वाला बलगम आ रहा हो, सीने की पसलियों में फोड़े जैसा टपकने वाला दर्द होना भी निमोनिया केलक्षण हैं।

बच्चों में निमोनिया के लक्षण
बच्चे का बार-बार खांसना, फेफड़े में सूजन, सांस लेने में दिक्कत महसूस हो।
तेज-तेज और कम गहरी सांसें खींचना। हंसली (कॉलर बोन) से ऊपर पसलियों के बीच की त्वचा का बार-बार अंदर धंसना।
सांस लेते वक्त गले से सीटी जैसी आवाज आना।
बच्चे केहाथों और अंगुली के नाखून का रंग नीला पड़ना।
ऐसे करें बचाव
व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान दें।
खांसते हुए अपने मुंह और नाक को ढक लें।
कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए अपने और अपने बच्चों के हाथ बार- बार धोते रहें।
घर में कामवाली या बच्चे की देखभाल के लिए नौकरानी रखे हैं तो सुनिश्चित करें कि वह भी स्वच्छता का पूरा ध्यान रखती हो।
धुआं रहित वातावरण हो। घर में धूम्रपान न करें। इससे निमोनिया के साथ ही अस्थमा और कान के संक्रमण का भी खतरा रहता है।
शिशु को पहले छह महीनों तक स्तनपान जरूरी है। इससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित टीके लगवाएं।
खांसते समय मुंह पर नैपकिन रखें। अगर किसी को खांसी है तो उससे थोड़ा दूर रहें।
अगर बच्चे को खांसी है तो पूरी तरह ठीक होने तक स्कूल न भेजें ताकि दूसरे बच्चों को इन्फेक्शन न हो।
खांसी अगर एक हफ्ते से ज्यादा समय से आ रही है तो चिकित्सक को दिखाएं।
बदलते हुए मौसम में खुद का ध्यान रखें। बहुत ठंडी चीजें न खाएं।
क्या है निमोनिया
निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें फेफड़ों में इंफेक्शन हो जाता है। फेफड़ों में सूजन आ जाती है और कई बार पानी भी भर जाता है। यह बुखार या जुकाम होने के बाद होता है। पांच साल से छोटे बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में इसका खतरा अधिक होता है। निमोनिया ज्यादातर बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के हमले से होता है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफड़ों पर चोट लगने के अलावा खसरा और चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों के बाद भी इसकी आशंका बढ़ जाती है। प्रदूषण की वजह से भी निमोनिया के मामले बढ़ रहे हैं। टीबी, एचआईवी पॉजिटिव, एड्स, अस्थमा, डायबीटीज, कैंसर और दिल के मरीजों को निमोनिया होने की आशंका ज्यादा होती है। अगर निमोनिया के दौरान सेप्टिमीनिया यानी सेप्टिक हो जाए तो मरीज की जान जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed