{"_id":"59edbde74f1c1bc8678b72f0","slug":"pcs-officer-randheer-singh-terminated","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":" भ्रष्टाचार के आरोपी दो अफसरों पर गिरी गाज, एक बर्खास्त एक सस्पेंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भ्रष्टाचार के आरोपी दो अफसरों पर गिरी गाज, एक बर्खास्त एक सस्पेंड
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 23 Oct 2017 07:53 PM IST
विज्ञापन
demo image
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों के खिलाफ सोमवार को सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने अपर आयुक्त मेरठ रणधीर सिंह दुहण को बर्खास्त कर दिया है। वहीं गौतमबुद्धनगर के एडीएम (वित्त एवं राजस्व) घनश्याम सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करा दी है।
सूत्रों ने बताया कि मेरठ के अपर आयुक्त रणधीर सिंह दुहण ने 2012-13 में शामली में तैनाती के दौरान करीब 27 हेक्टेयर शत्रु संपत्ति की जमीन अवैधानिक तरीके से नीलाम कर दी। इसके लिए न तो वह अधिकृत थे और न ही इससे जुड़ा कानून उस समय प्रभावित था। शासन ने इसकी जांच सहारनपुर के तत्कालीन मंडलायुक्त तनवीर जफर अली से कराई जिसमें आरोप सही पाए गए। काफी समय से शासन स्तर पर यह कार्रवाई लंबित थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने यह मामला आया तो उन्होंने दुहण को बर्खास्त करने का फैसला किया। इसके बाद शासन ने राज्य लोक सेवा आयोग से सहमति लेकर 1991 बैच के पीसीएस अधिकारी दुहण को सोमवार को बर्खास्त कर दिया।
विज्ञापन
दूसरे पीसीएस अधिकारी घनश्याम सिंह गौतमबुद्धनगर में एडीएम वित्त एवं राजस्व हैं। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने मेरठ-गाजियाबाद एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहीत करने के समय वर्ष 2012 में अपने बेटे के नाम लोगों से जमीन खरीदी और जमीन अधिग्रहीत किए जाने पर एनएचएआई से मुआवजा ले लिया। इसके बाद कम मुआवजे का हवाला देते हुए मामला आर्बिटेशन कोर्ट (मुआवजे पर अपील से जुड़ी डीएम की अदालत) ले गए।
जहां से निर्धारित दर से करीब 10 गुना अधिक मुआवजा किया गया। इस तरह सिंह के बेटे को जो मुआवजा 617 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मिला था वह बढ़कर 6500 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गया। जिससे उसे एनएचएआई से 7.58 करोड़ का अनियमित लाभ हुआ। मेरठ के मंडलायुक्त प्रभात कुमार की जांच में सिंह प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माने गए।
जांच में यह भी सामने आया कि सिंह ने बेटे के नाम जमीन खरीदने से पहले शासन की अनुमति नहीं ली। जबकि सेवा नियमों के अनुसार ऐसा जरूरी था। मुआवजा दिलाने में भी उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। मेरठ के मंडलायुक्त की रिपोर्ट पर शासन ने 1997 बैच के पीसीएस अधिकारी घनश्याम सिंह को निलंबित कर विभागीय जांच बैठा दी है। नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ आलोक टंडन इसकी जांच करेंगे।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि मेरठ के अपर आयुक्त रणधीर सिंह दुहण ने 2012-13 में शामली में तैनाती के दौरान करीब 27 हेक्टेयर शत्रु संपत्ति की जमीन अवैधानिक तरीके से नीलाम कर दी। इसके लिए न तो वह अधिकृत थे और न ही इससे जुड़ा कानून उस समय प्रभावित था। शासन ने इसकी जांच सहारनपुर के तत्कालीन मंडलायुक्त तनवीर जफर अली से कराई जिसमें आरोप सही पाए गए। काफी समय से शासन स्तर पर यह कार्रवाई लंबित थी।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने यह मामला आया तो उन्होंने दुहण को बर्खास्त करने का फैसला किया। इसके बाद शासन ने राज्य लोक सेवा आयोग से सहमति लेकर 1991 बैच के पीसीएस अधिकारी दुहण को सोमवार को बर्खास्त कर दिया।
विज्ञापन
दूसरे पीसीएस अधिकारी घनश्याम सिंह गौतमबुद्धनगर में एडीएम वित्त एवं राजस्व हैं। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने मेरठ-गाजियाबाद एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहीत करने के समय वर्ष 2012 में अपने बेटे के नाम लोगों से जमीन खरीदी और जमीन अधिग्रहीत किए जाने पर एनएचएआई से मुआवजा ले लिया। इसके बाद कम मुआवजे का हवाला देते हुए मामला आर्बिटेशन कोर्ट (मुआवजे पर अपील से जुड़ी डीएम की अदालत) ले गए।
जहां से निर्धारित दर से करीब 10 गुना अधिक मुआवजा किया गया। इस तरह सिंह के बेटे को जो मुआवजा 617 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मिला था वह बढ़कर 6500 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गया। जिससे उसे एनएचएआई से 7.58 करोड़ का अनियमित लाभ हुआ। मेरठ के मंडलायुक्त प्रभात कुमार की जांच में सिंह प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माने गए।
जांच में यह भी सामने आया कि सिंह ने बेटे के नाम जमीन खरीदने से पहले शासन की अनुमति नहीं ली। जबकि सेवा नियमों के अनुसार ऐसा जरूरी था। मुआवजा दिलाने में भी उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। मेरठ के मंडलायुक्त की रिपोर्ट पर शासन ने 1997 बैच के पीसीएस अधिकारी घनश्याम सिंह को निलंबित कर विभागीय जांच बैठा दी है। नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ आलोक टंडन इसकी जांच करेंगे।