पीसीएस-जे में चमके लखनऊ के सितारें, देखें तस्वीरें
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राजधानी के होनहारों ने एक बार फिर से अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। इस बार शहर के सितारे पीसीएस-जे के इम्तिहान में चमके हैं। आशीष पांडेय, सुमित कुमार, अंबरीष त्रिपाठी, प्रीति भूषण, छवि दीक्षित, सचिन मौर्य और मानस समेत कई होनहारों ने पीसीएस जे की परीक्षा पास करने में सफलता हासिल की। परीक्षा पास करने के बाद मेधावियों ने लोगों को जल्द न्याय दिलाने के लिए प्रयास करने की बात कही।
सफलता के लिए स्पिरिट और डेडिकेशन जरूरी
लाइफ में कुछ हासिल करने के लिए स्पिरिट और डेडिकेशन जरूरी है। बिना इसके सफलता नहीं मिल सकती। दूसरा जिन चीजों की वजह से आपका ध्यान लक्ष्य से हटे, उन्हें खुद से दूर कर देना चाहिए।
यह कहना है मात्र 23 साल की उम्र में प्रथम प्रयास में प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षाओं में शामिल पीसीएस-जे में टॉप करने वाली राजधानी की अंशु शुक्ला का।
इस तरह हासिल किया मकाम
इंदिरा नगर के सेक्टर-सी की निवासी अंशू ने 2009 में राजधानी के स्प्रिंग डेल कॉलेज से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद वह बीए एलएलबी की पढ़ाई करने दिल्ली की इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी चली गईं।
2014 में अपना कोर्स पूरा करने के बाद से ही उन्होंने पीसीएस-जे केलिए तैयारी शुरू कर दी। अंशु पिता अतुलकांत शुक्ला लंबे समय तक प्रयाग प्रभाग के वन अधिकारी रहे और वर्तमान में कानपुर में क्षेत्रीय वन अधिकारी हैं। जबकि मां रश्मि शुक्ला गृहिणी हैं।
बचपन से ही उनका जज बनने का लक्ष्य था। अंशु ने बताया कि उन्होंने केवल इसी लिए न्यायिक क्षेत्र को चुना है जिससे लोगों को न्याय दिला सकूं। किसी को न्याय दिलाने में जो संतुष्टि है वह कहीं और नहीं। अंशु का छोटा भाई अरुज भी इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से बीएएलएलबी तीसरे वर्ष का छात्र है। वह भी अपनी दीदी की तरह न्यायिक सेवा में आना चाहता है।
प्रेरणा: पिता ने हमेशा से इस क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्हीं की वजह से यह मुकाम हासिल हुआ।
टिप्स: अगर एक बार कुछ सोच लिया तो उसे पूरा किए बिना रुकें नहीं। कई बार दिक्कतें आएंगी, निराशा होगी लेकिन भगवान और खुद पर भरोसा रखें। बड़ी सफलता धैर्य से ही मिलती है। तैयारी केसमय अधिकतर अभ्यर्थी केवल लॉ के सब्जेक्ट्स पर ही फोकस करते हैं जबकि जीके और इंग्लिश पर कम ध्यान रहता है। ऐसा न करें। सभी सब्जेक्ट्स केबराबर अंक हैं इसलिए किसी को कम महत्वपूर्ण न समझें। फेसबुक, व्हाट्सएप सहित जिन चीजों से भी डिस्ट्रैक्शन हो उसे कुछ समय केलिए छोड़ दें।
कड़ी मेहनत से हासिल होगी सफलता
सफलता के लिए कड़ी मेहनत बहुत जरूरी है। तैयारी शुरू करने से पहले इसको अपना सूत्र वाक्य बनाया था। इसी का नतीजा है कि परीक्षा में सफलता हासिल हुई है। यह कहना है पीसीएस-जे में सफलता हासिल करने वाले आशीष पांडेय का। आशीष को परीक्षा में 12वीं रैंक हासिल हुई है। आशीष के पिता जयशंकर पांडेय डाक विभाग में एजेंट हैं, जबकि मांग गीता पांडेय गृहिणी हैं।
प्रेरणा- आशीष पांडेय अपनी प्रेरणा दूर के एक रिश्तेदार को मानते हैं। वे भी जज थे।
टिप्स- तैयारी जारी रखें और असफलता से परेशान न हों। कड़ी मेहनत बर्बाद नहीं जाती है।
कोचिंग जरूरी है पर मेहनत जरूरी
सफलता के लिए कड़ी मेहनत चाहिए होती है, लेकिन मेहनत किस दिशा में करनी है ये जानना भी जरूरी है। दिशा-निर्देशन का काम कोचिंग अच्छी तरह से करती हैं। इसलिए मुझे लगता है कि अगर कोचिंग न हो तो किसी अनुभवी व्यक्ति से दिशा-निर्देशन जरूर लेना चाहिए। यह कहना है पीसीएस-जे में सफलता हासिल करने वाली राजधानी की प्रीति भूषण का। प्रीति अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता कुंवर इंद्र भूषण और मां लक्ष्मी को देती हैं।
प्रेरणा- प्रीति के अनुसार परिवार में कई लोग इस क्षेत्र में हैं, इसलिए उसे इस दिशा में काम करने की प्रेरणा मिली।
टिप्स- स्ट्रेटजी बनाकर पढ़ाई करें। डेडिकेशन के साथ तैयारी करें।
छाया एलयू का रिसर्च स्कॉलर
यह बात सही है कि कोचिंग से दिशा-निर्देशन मिल जाता है, पर सफलता सेल्फ स्टडी बहुत जरूरी है। यह कहना है सुमित कुमार का। अपने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल करने वाले सुमित इस समय लखनऊ विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। उनके पिता फतेहपुर में किसान हैं, जबकि मां प्रेमा देवी गृहिणी हैं।
प्रेरणा- सुमित के अनुसार बचपन से ही घर पर देखता आ रहा है कि न्याय व्यवस्था बहुत जटिल है। मुकदमों में लंबा समय लगता है। इसलिए उसने बचपन से ही तय कर लिया था इसी फील्ड में जाना है। इसके लिए लगातार तैयारी कर रहा था।
टिप्स- कड़ी मेहनत करें और धैर्य बनाए रखें। कोचिंग से गाइडलाइन ले सकते हैं, पर सफलता अपनी मेहनत के दम पर हासिल होगी।
पापा का सपना था जज बनूं
पीसीएस-जे में सफलता हासिल करने वाली छवि दीक्षित ने अपने पापा का सपना पूरा कर दिया है। छवि के अनुसार पापा चाहते थे कि लॉ फील्ड में कुछ करूं। इसके लिए लॉ में गोल्ड मेडल हासिल करके एसबीआई में लॉ ऑफिसर पद पर जॉइन किया। पर, दिल में कुछ और भी करने का सपना था इसलिए पीसीएसजे की तैयारी की।
प्रेरणा- पीसीएसजे के लिए छवि अपने पिता को ही प्रेरणा का स्रोत मानती हैं। उनके अनुसार उनकी वजह से ही उसे यह मुकाम हासिल हुआ है।
टिप्स- लगातार कड़ी मेहनत करते रहें। इस दौरान असफलता मिले तो भी बिना निराश हुए मेहनत जारी रखें।
हमेशा से लॉ फील्ड में ही था आना
मुझे हमेशा से लॉ फील्ड में ही आना था। इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रहा था। इसलिए सफलता पाकर अच्छा लगा। ये शब्द हैं सचिन मौर्य के। सचिन अपनी सफलता का श्रेय अपने घर वालों खासकर अपने पिता एसडी मौर्य को देना चाहते हैं। उनके अनुसार सेल्फ स्टडी से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।
प्रेरणा- सचिन के अनुसार शुरुआत से ही इस क्षेत्र में आने की तमन्ना थी। इसलिए दूसरे क्षेत्र के बारे में सोचा ही नहीं।
टिप्स- नोट्स बनाएं और कड़ी मेहनत करें। अंतिम समय में उनका अभ्यास करते रहें।
पुराने साल के पेपर सॉल्व कर पाई सफलता
पीसीएस-जे में सफलता हासिल करने वाले मानस वत्स अपनी सफलता का श्रेय अपने पूरे परिवार को देते हैं। उनके अनुसार पुराने साल के पेपर सॉल्व करने का उन्हें सबसे ज्यादा फायदा हुआ। मानस सफलता हासिल करने के लिए कोचिंग को जरूरी नहीं मानते। उनके अनुसार समाज में कोचिंग का ट्रेंड बनता जा रहा है, जबकि इसके बगैर भी सफलता हासिल की जा सकती है।
प्रेरणा- मानस के अनुसार पूरे परिवार से इस फील्ड में आने की प्रेरणा मिली। सबने पूरा सहयोग दिया है। शायद इसी वजह से सफलता मिली।
टिप्स- पुराने साल के नोट्स तैयार करके उनका अभ्यास करें। नियमित रूप से पढ़ाई करें। रेग्युलर स्टडी से सबसे ज्यादा फायदा होता है।
पति की प्रेरणा से मिली सफलता
एलएलबी और एलएलएम के बाद पीसीएस में अपना झंडा बुलंद करने वाली उरूज फातिमा अपनी सफलता का सबसे ज्यादा श्रेय अपने पति सलीम जफर को देती हैं। उरूज के अनुसार एक साथ बहुत ज्यादा पढ़ने से कहीं जरूरी है कि लगातार मेहनत की जाए। उरुज के पिता मो. अताउल्लाह सरकारी वकील हैं जबकि मां सबीहा परवीन सरकारी टीचर हैं।
प्रेरणा- उरूज के अनुसार पूरे परिवार ने इस सफलता में योगदान दिया है। उन्हीं की प्रेरणा से यह मुकाम हासिल हुआ है।
टिप्स- अपना लक्ष्य पहले निर्धारित कर लें। एक लक्ष्य पर लगातार मेहनत करेंगे तो सफलता न मिले ऐसा नहीं हो सकता।
प्रैक्टिस के साथ हासिल की सफलता
पीसीएसजे में सफलता के परचम लहराने वाले अंबरीश त्रिपाठी वकालत करते-करते इस मुकाम पर पहुंचे हैं। इस समय वे सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं। लखनऊ में ला-मार्टीनियर कॉलेज से इंटर और लखनऊ विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई करने वाले अंबरीश मूलत: बलिया के रहने वाले हैं। अंबरीश के पिता डॉ. एके त्रिपाठी और मां डॉ. सुषमा त्रिपाठी दोनों लेक्चरर हैं। अपनी सफलता का श्रेय वे इन्हीं दोनों को देते हैं।
प्रेरणा- अंबरीश के अनुसार परिवार में पढ़ने पढ़ाने का माहौल था पर वो कुछ अलग करना चाहते थे। इसलिए लॉ फील्ड चुनी।
टिप्स- लक्ष्य पर फोकस रखें और लगातार तैयारी करते रहें।