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KGMU: प्रशासन की गलती, भुगत रहे मरीज

Mon, 03 Feb 2014 10:54 AM IST
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 03 Feb 2014 10:54 AM IST
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patients suffering in kgmu

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिविर्सिटी (केजीएमयू) प्रशासन की गलती का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। गैस आपूर्ति के लिए डाले गए टेंडर में गलत कंपनी का चयन करने के कारण नाइट्रस गैस की किल्लत पैदा हो गई।

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ये कंपनी किसी अन्य कंपनी से सिलेंडर लेकर गैस की आपूर्ति कर रही थी। जैसे ही मुख्य कंपनी ने आपूर्ति रोकी केजीएमयू में गैस की दिक्कत शुरू हो गई।

अब केजीएमयू प्रशासन टेंडर में शामिल सभी कंपनियों से गैस लेकर संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है। केजीएमयू में रोजाना छोटे-बड़े व इमरजेंसी मिलाकर 125 से 160 ऑपरेशन होते हैं।
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इनमें से मात्र 10 फीसदी ऐसे होते हैं, जो कई घंटे तक चलते हैं और योजनाबद्ध होते हैं। इन्हीं में नाइट्रस गैस का इस्तेमाल किया जाता है।

बीते दिनों अचानक गैस की किल्लत होने से कैंसर, न्यूरो सर्जरी और दिल के ऑपरेशन टालने पड़ गए थे। इसके बाद ही नाइट्रस गैस की कमी से निपटने के लिए एनेस्थीसिया विभाग को दूसरे उपाय इस्तेमाल करने के लिए कहा गया था।
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इसी बीच ऑक्सीजन और नाइट्रस आपूर्ति करने वाली मुरारी गैस कंपनी के पेंच कसे गए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। बताया जा रहा है कि मुरारी गैस स्वयं नाइट्रस गैस का उत्पादन नहीं करती।

इसलिए उसने मुख्य कंपनी से गैस न मिलने तक किसी भी तरह की मदद से इन्कार कर दिया। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने बैठक कर गैस आपूर्ति के टेंडर में शामिल चारों कंपनियों को नाइट्रस गैस आपूर्ति करने के लिए कह दिया।


सूत्रों का कहना है कि नाइट्रस गैस का एक सिलेंडर लगभग 2700 रुपये का आता है। अब आपूर्ति करने वाली कंपनियां रेट बढ़ाने की साजिश भी कर रही हैं। इसलिए जानबूझकर गैस की किल्लत पैदा की जा रही है।

उधर, रविवार तक नाइट्रस गैस केजीएमयू प्रशासन को नहीं मिल पाई थी। इससे सोमवार को होने वाले बड़े ऑपरेशन भी टलने की नौबत आ गई है।

हालांकि, एनेस्थीसिया विभाग का कहना है कि मरीज की स्थिति देखकर दवाओं के जरिए भी बेहोशी देकर कुछ बड़े ऑपरेशन कराए जाएंगे।

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