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एक आंख से नहीं देख पाएगा लक्ष्य, KGMU ने छीनी 7 लोगों की आंखें
ब्यूरो/अमर उजला, लखनऊ
Updated Sat, 13 Aug 2016 10:48 AM IST
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माता-पिता के साथ लक्ष्य
- फोटो : amar ujala
केजीएमयू में डॉक्टरों की लापरवाही ने छह साल के मासूम समेत सात मरीजों की आंखों की रोशनी छीन ली। सभी मरीजों का ऑपरेशन यहां के नेत्र विभाग में हुआ था। मामला खुलने के बाद डॉक्टर इस पर पर्दा डालने में जुट गए हैं।
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ऑपरेशन के बाद डॉक्टर पहले तो यह कहकर मरीजों को दिलासा देते रहे कि जैसे हड्डी टूटने के बाद जुड़ने में वक्त लगता है, वैसे रोशनी आने में भी समय लगता है। मगर, सात दिन बाद जब उनकी आंख से मवाद आने लगा तो अपनी गर्दन बचाने के लिए मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया।
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मरीजों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही और ओटी में संक्रमण के चलते उनके आंख की रोशनी गई जबकि डॉक्टरों का दावा है कि ओटी में संक्रमण नहीं था। मरीजों के ऑपरेशन बीते सप्ताह बुधवार से शुक्रवार के बीच किए गए।
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ऑपरेशन के बाद बस्ती की शकुंतला (60),राजमोहिनी (68) हरदोई, रीता (42) अंबेडकरनगर, गोंडा के रामसरन (50) समेत दो अन्य मरीजों की आंखों की रोशनी खराब हो गई है। नेत्र रोग विभाग के डॉक्टरों ने लापरवाही छुपाने के लिए एक हफ्ते तक इलाज किया। इसके बाद भी रोशनी नहीं आई तो चार मरीजों को चलता कर दिया जबकि तीन का अब भी भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
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एक आंख से कभी नहीं देख सकेगा मासूम
केजीएमयू मरीज
- फोटो : amar ujala
सुल्तानपुर, मालीपुर अखंडपुर के दिलीप कुमार सिंह के इकलौते बेटे लक्ष्य (6) की दूर की नजर कमजोर थी। केजीएमयू के डॉक्टरों ने बताया कि उसकी बायीं आंख के लेंस पर झिल्ली जम गई है। इसे हटाने के लिए ऑपरेशन करना पड़ेगा।
12 हजार रुपये खर्च के बाद दो अगस्त को ऑपरेशन हो गया। बुधवार को पट्टी खुली तो लक्ष्य ने बताया कि उसे कुछ दिख नहीं रहा है। डॉक्टरों ने कहा, पांच से छह दिन में रोशनी आ जाएगी।
नौ अगस्त को आंख से मवाद आने लगा तो परिवारीजन उसे गोमतीनगर के निजी अस्पताल ले गए। इलाज में 36 हजार रुपये खर्च होने के बाद डॉक्टरों ने कहा अब लक्ष्य बांयी आंख से कभी नहीं देख सकेगा।
12 हजार रुपये खर्च के बाद दो अगस्त को ऑपरेशन हो गया। बुधवार को पट्टी खुली तो लक्ष्य ने बताया कि उसे कुछ दिख नहीं रहा है। डॉक्टरों ने कहा, पांच से छह दिन में रोशनी आ जाएगी।
नौ अगस्त को आंख से मवाद आने लगा तो परिवारीजन उसे गोमतीनगर के निजी अस्पताल ले गए। इलाज में 36 हजार रुपये खर्च होने के बाद डॉक्टरों ने कहा अब लक्ष्य बांयी आंख से कभी नहीं देख सकेगा।