केजीएमयूः ऑनलाइन सिस्टम से बेहाल हुए मरीज
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केजीएमयू में हाल में शुरू हुआ सेंट्रलाइज पेशेंट मैनेजमेंट सिस्टम (सीपीएमएस) अधिकारियों के लिए सिरदर्द बन गया है। मरीजों की भीड़ से बदहाल व्यवस्था के कारण मंगलवार को भी ओपीडी में अफरा-तफरी रही।
पंजीकरण कार्ड और पर्चा बनवाने में लगने वाले 3 से 7 मिनट के चक्कर में काउंटरों पर ओपीडी का समय खत्म होने के बावजूद भीड़ रही। पंजीकरण का समय भी अधिकारियों ने बढ़ाया लेकिन इससे भी कोई खास सहूलियत नहीं मिली।
मैनुअल से ऑनलाइन सिस्टम पर जाने की केजीएमयू की कवायद ने मरीजों के लिए दिक्कतें बढ़ा दी हैं। न्यू ओपीडी में मंगलवार को भी पंजीकरण काउंटर पर मरीज और उनके परिवारीजन मशक्कत करते रहे।
पंजीकरण के लिए एक-एक मरीज को दो से ढाई घंटे तक कतार में खड़ा रहना पड़ा। इसके चलते काउंटर पर दोपहर दो बजे तक भी भीड़ लगी रही। वहीं अधिक पर्चे न बनने के कारण विभागों में डॉक्टरों के कमरे खाली पड़े रहे।
केजीएमयू में 14 पंजीकरण काउंटर सामान्य के लिए, एक वरिष्ठ नागरिक, एक विकलांग और दो स्टाफ के लिए होने के बावजूद पर्चा बनवाने के लिए लोग भटक रहे थे।
फुल प्रूफ नहीं है सिस्टम
केजीएमयू प्रशासन ने सीपीएमएस से पंजीकरण तो शुरू कर दिया लेकिन सिस्टम को फुलप्रूफ बनाने में चूक गए। मरीजों को पंजीकरण के लिए नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर बताना हो रहा है लेकिन इसके लिए कोई फॉर्म की सुविधा नहीं थी।
मरीज को काउंटर पर मुंह से बोलकर पता बताना पड़ रहा था। इसके चलते समय अधिक बर्बाद हुआ। जबकि एसजीपीजीआई में ऑनलाइन पंजीकरण में मरीज या उसके तीमारदार को क्यू नंबर के साथ ही एक फॉर्म दिया जाता है जिसे उसे भरकर रजिस्ट्रेशन काउंटर पर देना होता है।
जब उसका क्यू नंबर आता है वो फॉर्म जमाकर अपना रजिस्ट्रेशन करा लेता है। इस प्रक्रिया में कर्मचारी को तीमारदार से ज्यादा पूछताछ भी नहीं करनी पड़ती। जबकि केजीएमयू में ऐसा नहीं है।
कई तीमारदारों ने अपना नाम-पता कागज पर लिखकर कर्मचारी को दिया तब उसका पंजीकरण हो पाया। यही नहीं पंजीकरण, लेमिनेशन और फिर एक रुपये का पर्चा बनाना भी दिक्कत बढ़ा रहा है।