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Lucknow News: खुद को केजीएमयू का डॉक्टर बताकर एमजे अस्पताल में शिफ्ट कराता मरीज
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लखनऊ। केजीएमयू से खदरा स्थित एमजे हॉस्पिटल में शिफ्ट कराए गए मरीज आलम की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। संचालक का मोबाइल नंबर ट्रूकॉलर पर केजीएमयू डॉक्टर के नाम से दर्शाता है। ऐसे में ट्रूकॉलर का इस्तेमाल करने वाले आसानी से संचालक के झांसे में आ जाते। दो सदस्यीय कमेटी ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने एमजे अस्पताल के संचालक डॉ. जुनैद के नंबर पर कॉल किया तो ट्रूकॉलर पर केजीएमयू डॉक्टर और एमजे हॉस्पिटल लिखकर आने लगा। डॉ. जुनैद ने कॉल रिसीव नहीं की। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि गठित की गई दो सदस्यीय कमेटी ने जांच शुरू कर दी है।
जांच टीम ने इलाज की फाइल ली कब्जे में
शनिवार शाम करीब सात बजे डिप्टी सीएमओ डॉ. केडी मिश्रा टीम के साथ अस्पताल गए। टीम के पहुंचने पर वहां एमडी मेडिसिन डॉ. जफर मिले। टीम ने मरीज के इलाज की फाइल कब्जे में ले लिया है। अस्पताल से सीसीटीवी फुटेज मांगी गई है। डॉ. केडी मिश्रा ने बताया कि मरीज क्रॉनिक लिवर डिजीज से पीड़ित था। इलाज करने वाले डॉक्टराें को बयान दर्ज कराने के लिए सोमवार को सीएमओ ऑफिस में तलब किया गया है।
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ऐसे किया जाता है खेल
जानकारों के अनुसार ज्यादातर लोगों के मोबाइल फोन में कोई नंबर जिस नाम से सेव होता है, उस नंबर से कॉल आने पर ट्रूकॉलर पर वही नाम दिखता है। यानी जितना अधिक लोग किसी नाम से नंबर को सेव करेंगे, ट्रूकॉलर पर वही नाम प्रदर्शित होगा। जानकारों का कहना है कि एमजे अस्पताल के संचालक ने कई मोबाइल नंबरों पर अपना नंबर केजीएमयू डॉक्टर के नाम से सेव करा रखा होगा। इसी वजह से कॉल करने पर ट्रूकॉलर पर हर बार केजीएमयू डॉक्टर लिखकर आ रहा है।
यह है मामला
गोलागंज निवासी मुस्कान के मुताबिक, उन्होंने पति आलम को 14 नवंबर को केजीएमयू में भर्ती कराया था। उसी दिन खदरा पक्का पुल स्थित एमजे हॉस्पिटल से डॉ. जुनैद नाम के शख्स की उनके नंबर पर कॉल आई। कॉल करने वाले ने बेहतर इलाज का झांसा दिया। यही नहीं, एंबुलेंस भिजवाकर केजीएमयू से मरीज को एमजे अस्पताल में शिफ्ट करा लिया।
- मुस्कान का आरोप है कि अस्पताल के अप्रशिक्षित स्टाफ और डॉक्टरों ने गलत इंजेक्शन लगा दिया। इससे पति की हालत बिगड़ गई और वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर चले गए। गलत इलाज से 15 नवंबर को पति की मौत हो गई। आराेप है कि बेड चार्ज व दवाओं के नाम पर डेढ़ लाख रुपये वसूल लिए गए।
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स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने एमजे अस्पताल के संचालक डॉ. जुनैद के नंबर पर कॉल किया तो ट्रूकॉलर पर केजीएमयू डॉक्टर और एमजे हॉस्पिटल लिखकर आने लगा। डॉ. जुनैद ने कॉल रिसीव नहीं की। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि गठित की गई दो सदस्यीय कमेटी ने जांच शुरू कर दी है।
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जांच टीम ने इलाज की फाइल ली कब्जे में
शनिवार शाम करीब सात बजे डिप्टी सीएमओ डॉ. केडी मिश्रा टीम के साथ अस्पताल गए। टीम के पहुंचने पर वहां एमडी मेडिसिन डॉ. जफर मिले। टीम ने मरीज के इलाज की फाइल कब्जे में ले लिया है। अस्पताल से सीसीटीवी फुटेज मांगी गई है। डॉ. केडी मिश्रा ने बताया कि मरीज क्रॉनिक लिवर डिजीज से पीड़ित था। इलाज करने वाले डॉक्टराें को बयान दर्ज कराने के लिए सोमवार को सीएमओ ऑफिस में तलब किया गया है।
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ऐसे किया जाता है खेल
जानकारों के अनुसार ज्यादातर लोगों के मोबाइल फोन में कोई नंबर जिस नाम से सेव होता है, उस नंबर से कॉल आने पर ट्रूकॉलर पर वही नाम दिखता है। यानी जितना अधिक लोग किसी नाम से नंबर को सेव करेंगे, ट्रूकॉलर पर वही नाम प्रदर्शित होगा। जानकारों का कहना है कि एमजे अस्पताल के संचालक ने कई मोबाइल नंबरों पर अपना नंबर केजीएमयू डॉक्टर के नाम से सेव करा रखा होगा। इसी वजह से कॉल करने पर ट्रूकॉलर पर हर बार केजीएमयू डॉक्टर लिखकर आ रहा है।
यह है मामला
गोलागंज निवासी मुस्कान के मुताबिक, उन्होंने पति आलम को 14 नवंबर को केजीएमयू में भर्ती कराया था। उसी दिन खदरा पक्का पुल स्थित एमजे हॉस्पिटल से डॉ. जुनैद नाम के शख्स की उनके नंबर पर कॉल आई। कॉल करने वाले ने बेहतर इलाज का झांसा दिया। यही नहीं, एंबुलेंस भिजवाकर केजीएमयू से मरीज को एमजे अस्पताल में शिफ्ट करा लिया।
- मुस्कान का आरोप है कि अस्पताल के अप्रशिक्षित स्टाफ और डॉक्टरों ने गलत इंजेक्शन लगा दिया। इससे पति की हालत बिगड़ गई और वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर चले गए। गलत इलाज से 15 नवंबर को पति की मौत हो गई। आराेप है कि बेड चार्ज व दवाओं के नाम पर डेढ़ लाख रुपये वसूल लिए गए।