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फिर से वापस आ सकती है खोई हुई सुंदरता

Tue, 07 Apr 2015 04:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ Updated Tue, 07 Apr 2015 04:30 PM IST
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patient face can become beutiful after this surgery

कैंसर के मरीजों का चेहरा ऑपरेशन के बाद काफी खराब हो जाता है। इसमें चेहरे के आसपास के मांस या जबड़े को नुकसान पहुंचता है और काफी हिस्सा काम नहीं करता है। इसके चलते मरीज लिक्विड डाइट पर जीवन जीने को मजबूर होता है।

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ऐसे मरीजों की सुंदरता को वापस लाने और उनको सामान्य जीवन देने के लिए माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी का सहारा लिया जा रहा है। इसकी मदद से उन्हें नई जिंदगी दी जा सकती है। जिससे वह आसानी से समान्य जीवन जी सकता है।
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केजीएमयू के ओरल एंड मैक्सिलोफेसियल सर्जरी डिपार्टमेंट के सीपी गोविला हॉल में सोमवार को माइक्रो वैस्कुलर एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी पर आयोजित कार्यशाला में यह जानकारी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के माइक्रो वैस्कुलर रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन डॉ. राकेश कुमार केन ने दी।

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शरीर के इन अंगों को बनाया जा सकता है सुंदर

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उन्होंने बताया कि जिन मरीजों को मुंह, गले या जबड़े में कैंसर की शिकायत होती है उनका वह हिस्सा काटकर निकाल दिया जाता है। कई परिस्थितियों में चेहरे के आसपास की हड्डी को भी निकाल दिया जाता है जिससे चेहरा डरावना लगता है। इसके साथ ही मरीज का खाना-पीना भी बंद हो जाता है।

ऐसे मरीजों की खूबसूरती को वापस लाने और क्षतिग्रस्त हिस्से को फंक्शनल बनाने के लिए माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की मदद ली जाती है। इस सर्जरी की मदद से मरीज का नाक, होंठ, गाल और अन्य हिस्सों को बनाया जाता है। चेहरे के खाली हिस्से को भरने के लिए पेट, पीठ, जांघ से मांस लिया जाता है। सर्जरी के बाद मरीज सुंदर दिखने के साथ सामान्य जनजीवन जी सकता है और खाना-पीना खा सकता है।

बहुत क्रिटिकल है सर्जरी

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माइक्रो वैस्कुलर एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी बहुत क्रिटिकल है। डॉ. राकेश कुमार केन बताते हैं कि इस सर्जरी में आठ से दस घंटे लगते हैं और सर्जन के साथ हर विभाग के विशेषज्ञ की टीम सर्जरी के दौरान मौजूद रहती है। सर्जरी का सक्सेस रेट बहुत है और पेशेंट सर्जरी के दो महीने बाद बेहतर जीवन जी सकता है और भविष्य में कोई दिक्कत नहीं होती है।

डॉ. राकेश कुमार केन बताते हैं कि किसी बच्चे की कैंसर की शिकायत के बाद ऑपरेशन हुआ है और उसका चेहरा खराब हो गया है तो उसकी भी सर्जरी संभव है।

बच्चों के ऑपरेशन के बाद जब वो बड़ा होता है तो18 से 20 साल की उम्र के बीच उसका दोबारा ऑपरेशन कर उसके चेहरे को ठीक करना पड़ता है। क्योंकि काटकर लगाए गए हिस्से में ब्लड सप्लाई तो होती है लेकिन उसमें ग्रोथ नहीं होती।  डॉ. राकेश कुमार केन ने बताया कि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में 50 सर्जन डॉक्टरों की टीम है और हर महीने 300 से अधिक रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की जा रही हैं।

केजीएमयू के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल विभाग में जल्द ही माइक्रोवैस्कुलर एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की सुविधा मरीजों को मिलेगी। विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. हरिराम ने बताया कि मुंह के कैंसर से पीड़ित जिन भी मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है उनको रिकंस्ट्रक्ट्रिव सर्जरी के लिए कहीं दूर नहीं जाना पड़ेगा।

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