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चार अस्पतालों की लगाई दौड़, नहीं मिला वेंटिलेटर, थम गईं सांसें
Fri, 12 Apr 2019 01:50 AM IST
manoj tiwari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: manoj tiwari
Updated Fri, 12 Apr 2019 01:50 AM IST
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ट्रॉमा सेंटर
- फोटो : amar ujala
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लखनऊ। राजधानी की ध्वस्त चिकित्सा व्यवस्था ने फिर एक युवक की जान ले ली। पिता का आरोप है कि वह गुहार लगाता रहा, मगर दो सरकारी अस्पतालों समेत केजीएमयू और पीजीआई के चक्कर लगाने के बाद भी उसके घायल बेटे को वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं मिला। बुधवार को पीजीआई ट्रॉमा सेंटर के बाहर उसने दम तोड़ दिया। पिता ने मामले की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री से करने की बात कही है।
बाराबंकी बड़ेल के रहने वाले रामविलास का बेटा मनोज (28) बीती 6 अप्रैल को सड़क हादसे में घायल हो गया था। तीमारदारों उसे लेकर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर आए। उसे न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती किया गया था, जहां दो दिन तक मरीज एंबुबैग के सहारे रहा। पिता रामविलास का आरोप है कि उसने डॉक्टर से वेंटिलेटर सपोर्ट की डिमांड की तो डॉक्टर ने खाली न होने की बात कहकर लोहिया अस्पताल भेज दिया। पिता रामविलास का कहना है कि लोहिया अस्पताल में वेंटिलेटर खाली होने के बाद भी नहीं मिला। वहीं लोहिया अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि उनके यहां मरीज को देखने के लिए कोई न्यूरो विशेषज्ञ नहीं है, इसलिए उसे बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया गया। बीती 9 अप्रैल की रात मरीज को बलरामपुर की इमरजेंसी में भर्ती किया गया। पिता का आरोप है कि उनके बेटे को वेंटिलेटर मुहैया नहीं हो सका। उनका कहना है कि इमरजेंसी में कोई भी डॉक्टर सुनवाई भी नहीं कर रहे थे। हालत बिगड़ती देख वे बेटे को बुधवार दोपहर डिस्चार्ज कराकर पीजीआई ट्रॉमा सेंटर ले गए। यहां काफी देर तक मरीज एंबुलेंस में बाहर पड़ा तड़पता रहा। आरोप है कि कई घंटे बाद भी डॉक्टर उसे भर्ती करने को राजी नहीं हुए। इस दौरान पीजीआई एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के बाहर ही उसकी मौत हो गई। नाराज तीमारदार स्वास्थ्य सेवाओं को कोसते हुए शव लेकर घर वापस लौट आए।
एपेक्स ट्रॉमा में नहीं लेते 24 घंटे से पुराने केस
पीजीआई एपेक्स ट्रॉमा सेंटर का नियम मरीजों पर भारी पड़ रहा है। ट्रॉमा से 24 घंटे पुरानी इंजरी न लेने की बात कहकर मरीजों को वापस कर दिया जाता है। वहीं ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो सर्जरी विभाग में वेंटिलेटर और बेड भी आसानी से नहीं मिल पाते हैं।
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मुझे मौत की जानकारी नहीं
ट्रॉमा में बुधवार को कोई वेंटिलेटर खाली नहीं था। हालांकि यहां आने वाले हर मरीज को प्राथमिकता से उपचार देकर संसाधन उपलब्ध न होने पर ही वापस किया जाता है। मुझे किसी मरीज की मौत के बारे में जानकारी नहीं है।
- डॉ. अमित अग्रवाल, एपेक्स ट्रॉमा प्रभारी
वेंटिलेटर पर रखे जा रहे मरीज
वेंटिलेटर पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अभी दो मरीज वेंटिलेटर पर भर्ती हैं। हालांकि अभी वेंटिलेटर के एक्सपर्ट विशेषज्ञ नहीं मिले हैं, जिसके प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. राजीव लोचन, निदेशक, बलरामपुर अस्पताल
हमारे यहां न्यूरो विशेषज्ञ नहीं
न्यूरो विशेषज्ञ न होने के कारण मरीज को भर्ती नहीं किया गया, क्योंकि उसका इलाज मुश्किल हो जाता। हमारे यहां जो भी विशेषज्ञ अस्पताल में हैं, उन बीमारियों के मरीजों को वेंटिलेटर पर लिया जाता है।
- डॉ. एमएल भार्गव, चिकित्सा अधीक्षक, लोहिया अस्पताल
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बाराबंकी बड़ेल के रहने वाले रामविलास का बेटा मनोज (28) बीती 6 अप्रैल को सड़क हादसे में घायल हो गया था। तीमारदारों उसे लेकर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर आए। उसे न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती किया गया था, जहां दो दिन तक मरीज एंबुबैग के सहारे रहा। पिता रामविलास का आरोप है कि उसने डॉक्टर से वेंटिलेटर सपोर्ट की डिमांड की तो डॉक्टर ने खाली न होने की बात कहकर लोहिया अस्पताल भेज दिया। पिता रामविलास का कहना है कि लोहिया अस्पताल में वेंटिलेटर खाली होने के बाद भी नहीं मिला। वहीं लोहिया अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि उनके यहां मरीज को देखने के लिए कोई न्यूरो विशेषज्ञ नहीं है, इसलिए उसे बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया गया। बीती 9 अप्रैल की रात मरीज को बलरामपुर की इमरजेंसी में भर्ती किया गया। पिता का आरोप है कि उनके बेटे को वेंटिलेटर मुहैया नहीं हो सका। उनका कहना है कि इमरजेंसी में कोई भी डॉक्टर सुनवाई भी नहीं कर रहे थे। हालत बिगड़ती देख वे बेटे को बुधवार दोपहर डिस्चार्ज कराकर पीजीआई ट्रॉमा सेंटर ले गए। यहां काफी देर तक मरीज एंबुलेंस में बाहर पड़ा तड़पता रहा। आरोप है कि कई घंटे बाद भी डॉक्टर उसे भर्ती करने को राजी नहीं हुए। इस दौरान पीजीआई एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के बाहर ही उसकी मौत हो गई। नाराज तीमारदार स्वास्थ्य सेवाओं को कोसते हुए शव लेकर घर वापस लौट आए।
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एपेक्स ट्रॉमा में नहीं लेते 24 घंटे से पुराने केस
पीजीआई एपेक्स ट्रॉमा सेंटर का नियम मरीजों पर भारी पड़ रहा है। ट्रॉमा से 24 घंटे पुरानी इंजरी न लेने की बात कहकर मरीजों को वापस कर दिया जाता है। वहीं ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो सर्जरी विभाग में वेंटिलेटर और बेड भी आसानी से नहीं मिल पाते हैं।
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मुझे मौत की जानकारी नहीं
ट्रॉमा में बुधवार को कोई वेंटिलेटर खाली नहीं था। हालांकि यहां आने वाले हर मरीज को प्राथमिकता से उपचार देकर संसाधन उपलब्ध न होने पर ही वापस किया जाता है। मुझे किसी मरीज की मौत के बारे में जानकारी नहीं है।
- डॉ. अमित अग्रवाल, एपेक्स ट्रॉमा प्रभारी
वेंटिलेटर पर रखे जा रहे मरीज
वेंटिलेटर पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अभी दो मरीज वेंटिलेटर पर भर्ती हैं। हालांकि अभी वेंटिलेटर के एक्सपर्ट विशेषज्ञ नहीं मिले हैं, जिसके प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. राजीव लोचन, निदेशक, बलरामपुर अस्पताल
हमारे यहां न्यूरो विशेषज्ञ नहीं
न्यूरो विशेषज्ञ न होने के कारण मरीज को भर्ती नहीं किया गया, क्योंकि उसका इलाज मुश्किल हो जाता। हमारे यहां जो भी विशेषज्ञ अस्पताल में हैं, उन बीमारियों के मरीजों को वेंटिलेटर पर लिया जाता है।
- डॉ. एमएल भार्गव, चिकित्सा अधीक्षक, लोहिया अस्पताल