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इलाज के नाम पर मिला दर्द, केजीएमयू में डायलिसिस के बाद मरीज हो गई एचआईवी पॉजिटिव
Mon, 05 Aug 2019 04:57 PM IST
ishwar ashish
चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 05 Aug 2019 04:57 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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केजीएमयू में डायलिसिस के बाद 70 साल की महिला मरीज के एचआईवी पॉजिटिव होने का मामला सामने आया है। महिला की आठ जुलाई को डायलिसिस से पहले की गई जांच में उसे एचआईवी का कोई संक्रमण नहीं पाया गया था।
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वहीं, 17 जुलाई को हुई जांच में उसे एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। सूत्रों की मानें तो यहां एक डायलाइजर से 12 से 15 बार मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। जबकि अधिकतम पांच बार ही की जानी चाहिए। स्पेशल डायलाइजर से भी अधिकतम 10 बार ही डायलिसिस की जा सकती है।
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इतना ही नहीं, एक बार डायलिसिस होने के बाद उसे विसंक्रमित करके रखना होता है। जिस डायलाइजर पर एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की डायलिसिस होती है उसे अलग ही रखा जाता है। यहां कुल 17 मशीनें हैं। इनमें से तीन मशीनें गंभीर बीमारियों के संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए हैं। चार मशीनें बंद पड़ी हैं।
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लापरवाही पहले भी हुई
फेंकने पड़े थे 13 डायलाइजर, तीन दिन बंद रही थी यूनिट
केजीएमयू में जुलाई 2018 में जिस मशीन पर संक्रमण रहित मरीजों की डायलिसिस होती थी, उसपर संक्रमित मरीज की डायलिसिस कर दी गई थी। संयोग से एक कर्मचारी ने संबंधित मरीज को पहचान लिया था। इसके बाद 13 डायलाइजर फेंकने पड़े थे और तीन दिन तक यूनिट बंद करनी पड़ी थी। इस मामले में कंपनी के एक संविदा कर्मचारी को हटा दिया गया था।
बलरामपुर में हेपेटाइटिस ‘बी’ की चपेट में आए थे मरीज
बलरामपुर अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर चल रही डायलिसिस यूनिट में पिछले साल 30 से अधिक मरीज हेपेटाइटिस बी संक्रमित हो गए थे। डायलिसिस कराने से पहले वे हेपेटाइटिस से ग्रसित नहीं थे।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
एचआईवी निगेटिव मरीज का कुछ दिन बाद पॉजिटिव होना गंभीर बात है। मामले की जांच कराई जाएगी। हालांकि पॉजिटिव होने के पीछे कई कारण होते हैं। खून चढ़वाने, सुई लगवाते वक्त लापरवाही आदि भी इसकी वजह हो सकती है। जो महिला पॉजिटिव पाई गई है, उनके बारे में जानकारी की जा रही है। डायलाइजर के रखरखाव और विसंक्रमित करने के तरीके की भी जांच कराई जाएगी। - प्रो. एसएन शंखवार, प्रभारी डायलिसिस यूनिट
केजीएमयू में जुलाई 2018 में जिस मशीन पर संक्रमण रहित मरीजों की डायलिसिस होती थी, उसपर संक्रमित मरीज की डायलिसिस कर दी गई थी। संयोग से एक कर्मचारी ने संबंधित मरीज को पहचान लिया था। इसके बाद 13 डायलाइजर फेंकने पड़े थे और तीन दिन तक यूनिट बंद करनी पड़ी थी। इस मामले में कंपनी के एक संविदा कर्मचारी को हटा दिया गया था।
बलरामपुर में हेपेटाइटिस ‘बी’ की चपेट में आए थे मरीज
बलरामपुर अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर चल रही डायलिसिस यूनिट में पिछले साल 30 से अधिक मरीज हेपेटाइटिस बी संक्रमित हो गए थे। डायलिसिस कराने से पहले वे हेपेटाइटिस से ग्रसित नहीं थे।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
एचआईवी निगेटिव मरीज का कुछ दिन बाद पॉजिटिव होना गंभीर बात है। मामले की जांच कराई जाएगी। हालांकि पॉजिटिव होने के पीछे कई कारण होते हैं। खून चढ़वाने, सुई लगवाते वक्त लापरवाही आदि भी इसकी वजह हो सकती है। जो महिला पॉजिटिव पाई गई है, उनके बारे में जानकारी की जा रही है। डायलाइजर के रखरखाव और विसंक्रमित करने के तरीके की भी जांच कराई जाएगी। - प्रो. एसएन शंखवार, प्रभारी डायलिसिस यूनिट