नमो इफेक्ट, अब 'शिकस्त' की मार झेलेंगे दिग्गज!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नमो इफैक्ट की आंधी में धराशाई गैरभाजपाई दलों के दिग्गजों पर अब कार्रवाई की मार तय मानी जा रही है।
इस दिशा में सभी दलों के हाईकमान ने कदम भी उठाने शुरू कर दिए।
दिल्ली और लखनऊ के कडे़ तेवरों ने जिला और मंडल स्तर के ओहदेदारों को बेचैन कर दिया। उनके माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखाई देने लगी हैं।
एक तरफ जहां पार्टी अध्यक्ष किसी को बख्शने के मूड में नहीं हैं, वहीं नेताओं और पदाधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।
सपाइयों को सुनाई खरी-खोटी
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने सोमवार को सूबे के प्रत्याशियों, दर्जा प्राप्त मंत्रियों, जिलाध्यक्षों को लखनऊ तलब कर खरी खोटी सुनाई।
पराजय पर मंथन करने और आगे से जनाधार को हासिल करने के लिए हिम्मत के साथ जुटने को कहा। प्रत्याशियों ने भी अपनी पीड़ा रखी।
बताया कि पार्टी में कौन वफादार है और कौन नहीं। किसके कारण हार हुई। सपा मुखिया ने शिकायत करने वालों को भरोसा दिया कि इस पर गौर कर जल्द कदम उठाए जाएंगे।
माना जा रहा कि एक-दो दिन में कुछ पर गाज गिर सकती है।
सफाए से तिलमिलाईं बहन जी
बसपा मुखिया मायावती ने लोकसभा में सूबे से सूपड़ा साफ होने के बाद मंगलवार को सभी प्रत्याशियों और कोआर्डिनेटरों के साथ जिलाध्यक्षों को लखनऊ बुलाया है।
सफाए से तिलमिलाई बहनजी अपने ओहदेदारों की तीन दिन तक क्लास लेंगी यानि 20 से 22 तक वह अलग अलग स्तर के पदाधिकरियों की बैठक लेंगी।
बुलंदशहर से प्रत्याशी प्रदीप जाटव, जिलाध्यक्ष जयभगवान जाटव लखनऊ चले गए हैं। माना जा रहा है कि बहनजी संगठन को भंग करेगी।
कुछ ओहदेदारों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया जा सकता है। जिलाध्यक्ष जयभगवान जाटव का कहना है कि बहनजी का हर आदेश सिर माथे है।
रालोद में तय नहीं समीक्षा डेट
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित सिंह समेत सभी प्रत्याशी धराशाइ होने के बाद अभी तक समीक्षा की तिथि तय नहीं कर पाए। दरअसल, यहां रालोद ने पहले कांग्रेस से सही तालमेल नहीं बैठा।
फिर पूर्व मंत्री किरनपाल सिंह ने पार्टी छोड़ दी। चुनाव में भी पार्टी के लोग खींचतान में लगे रहे। अजित सिंह के सामने ही कार्यकर्ताओं ने खुद को वरीयता नहीं देने पर हंगामा किया था।
परिणाम आने से पहले ही यहां से नेतृत्व के पास एक-दूसरे की शिकायतों का लंबा चौड़ा चिट्ठा भेजा गया। अब इसी सप्ताह अजित सिंह सभी जिलों के पदाधिकारियों की बैठक कर बदलाव का कदम उठा सकते हैं।
वेस्ट यूपी प्रवक्ता सुनील रोहटा का कहना है कि जल्द समीक्षा होगी।
नहीं थी कांग्रेस की चुनौती
सुनील रोहटा के अनुसार कांग्रेस का प्रत्याशी तो मैदान में नहीं था, लेकिन गठबंधन के चलते रालोद प्रत्याशी के पक्ष में वह वोट नहीं डलवा सके। प्रांत से लेकर जिला पदाधिकारी तक फेल हो गए।
अब उनकी समीक्षा होगी। सोमवार को राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा के बाद 30 मई से पहले सूबे में जिला स्तर की समीक्षा होगी। जिसमें कई बड़े पदाधिकारियों का कद घटाया जा सकता है।
जोन कोआर्डिनेटर विधायक दिलनवाज खां का कहना है कि संगठन में अमूलचूल परिवर्तन के साथ पार्टी में नई जान फूंकना वक्त की जरूरत हो गई है।