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Lucknow News: केजीएमयू में शुरू हुआ घुटने का आंशिक प्रत्यारोपण
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कॉन्क्लेव का शुभारंभ करतीं कुलपति।
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में अब घुटने का आंशिक प्रत्यारोपण भी शुरू हो गया है। यह सर्जरी युवाओं के लिए ज्यादा उपयोगी है। इससे उनका पूरा घुटना प्रत्यारोपित नहीं करना पड़ता है। सिर्फ वही हिस्सा बदला जाता है, जिसमें समस्या होती है। केजीएमयू के प्रो. शैलेंद्र सिंह ने साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में शनिवार से शुरू हुई ऑर्थोपेडिक सोसाइटी और केजीएमयू की ओर से आयोजित ऑर्थोप्लास्टी कॉन्क्लेव के पहले दिन यह जानकारी दी।
प्रो. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि विभिन्न कारणों से युवाओं के घुटने भी कमजोर हो जाते हैं। आंशिक घुटना प्रत्यारोपण होने पर उन्हें लंबे समय तक फायदा होता है। आमतौर पर प्रत्यारोपण 25 साल तक सही रहता है। आंशिक प्रत्यारोपण होने पर 25 साल बाद वे दोबारा प्रत्यारोपण करा सकते हैं। पूरा प्रत्यारोपण होने पर दोबारा प्रत्यारोपण कराना मुश्किल होता है। आंशिक प्रत्यारोपण के इसके अलावा भी कई फायदे हैं। इनमें अस्पताल में कम समय तक रहना, जल्दी ठीक होना, कम दर्द और घुटने की प्राकृतिक गति बनी रहती है।
केजीएमयू में हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि हड्डी की देखभाल के लिए डॉक्टर के साथ ही लोगों को भी सजग रहने की जरूरत है। इंडियन ऑर्थोस्कोपी इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राकेश राजपूत और इंडियन सोसाइटी ऑफ नी सर्जरी, ऑर्थोस्कोपी और ऑर्थोप्लास्टी के अध्यक्ष प्रो. ललित मैनी के साथ ही देश भर के विशेषज्ञ इसमें शामिल हुए।
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प्रो. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि विभिन्न कारणों से युवाओं के घुटने भी कमजोर हो जाते हैं। आंशिक घुटना प्रत्यारोपण होने पर उन्हें लंबे समय तक फायदा होता है। आमतौर पर प्रत्यारोपण 25 साल तक सही रहता है। आंशिक प्रत्यारोपण होने पर 25 साल बाद वे दोबारा प्रत्यारोपण करा सकते हैं। पूरा प्रत्यारोपण होने पर दोबारा प्रत्यारोपण कराना मुश्किल होता है। आंशिक प्रत्यारोपण के इसके अलावा भी कई फायदे हैं। इनमें अस्पताल में कम समय तक रहना, जल्दी ठीक होना, कम दर्द और घुटने की प्राकृतिक गति बनी रहती है।
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केजीएमयू में हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि हड्डी की देखभाल के लिए डॉक्टर के साथ ही लोगों को भी सजग रहने की जरूरत है। इंडियन ऑर्थोस्कोपी इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राकेश राजपूत और इंडियन सोसाइटी ऑफ नी सर्जरी, ऑर्थोस्कोपी और ऑर्थोप्लास्टी के अध्यक्ष प्रो. ललित मैनी के साथ ही देश भर के विशेषज्ञ इसमें शामिल हुए।
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