Parasuicidal Behaviour: खुद को चोट पहुंचा रहा है बच्चा तो हो जाएं सावधान, पैरासुसाइडल बिहैवियर है बेहद खतरनाक
13 से 17 साल की उम्र के छात्र-छात्राओं में पैरासुसाइडल बिहैवियर बढ़ रहा है। इसे लेकर विशेषज्ञों ने अभिभावकों को आगाह किया है। ऐसे बच्चों को अकेले छोड़ने से बचना चाहिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आपका बच्चा 13 से 17 साल की उम्र का है...। स्कूल से आने के बाद अकेले रहना पसंद करता है...। भीषण गर्मी में भी पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने की जिद करता है...। उसकी पसंद बदलने लगी है…। या फिर खाना खाने में रुचि नहीं लेता...। यदि ये सब बदलाव बच्चे में दिख रहे हैं तो सतर्क हो जाएं। इस तरह के लक्षण पैरासुसाइडल बिहैवियर यानी खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश का संकेत हो सकते हैं। मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि ये समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन दिग्भ्रमित करने वाली सूचनाएं बच्चों में व्यवहार संबंधी इस दिक्कत को बढ़ा रही है।
पहले शरीर पर कट मारता, इमारत से कूदने की धमकी देने लगा
केजीएमयू के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आदर्श त्रिपाठी बताते हैं कि सरकारी सेवा में कार्यरत एक दंपती की पोस्टिंग दूर और अलग-अलग इलाकों में होने के कारण उन्होंने अपने इकलौते बेटे को देश के जाने-माने बोर्डिंग स्कूल में डाला। यह बच्चा अपने शरीर पर कट मारकर खुद को चोटिल करने लगा। कुछ समय पहले तो वह इमारत की सबसे ऊंची मंजिल पर जाकर कूदने की धमकी देने लगा। उसे स्कूल से निकाल दिया गया। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है।
ये भी पढ़ें - रूस को भायी यूपी के आम की मिठास: मास्को में 6 से 9 जुलाई तक हुआ महोत्सव का आयोजन, लोगों ने लाइन लगाकर लिया
ये भी पढ़ें - मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी, शाम तक होगी भारी बरसात, वज्रपात के आसार
पैरासुसाइडल बिहैवियर के पीछे घुटन बड़ी वजह
जानी मानी मनोवैज्ञानिक नेहा आनंद बताती हैं कि जनवरी से लेकर मई तक 70 बच्चों के लगभग 700 सेशन लिए गए। इन सभी की उम्र 13 से 17 साल के बीच रही। बच्चों पर सुंदर डील-डौल, पढ़ाई में बेहतर होने और लाइमलाइट में बने रहने का भी दबाव रहता है। तनाव का वेंटिलेशन होते रहना जरूरी है। पर, छोटे होते परिवारों में ऐसा होना संभव नहीं हो पा रहा है। वे अपनी बात किसी से कह नहीं पाते, इसलिए घुटते रहते हैं। यही सब पैरासुसाइडल बिहैवियर की वजह बनती है। बच्चे अपनी खीझ और गुस्से को खुद को चोट पहुंचाकर निकालने लगते हैं।
इस पर भी गौर करें: इंटरनेट पर दिग्भ्रमित करने वाली सूचनाएं भी बढ़ा रहीं समस्या
डॉ. आदर्श त्रिपाठी बताते हैं कि मानसिक समस्याएं तो बढ़ ही रही हैं, वहीं इंटरनेट पर दिग्भ्रमित करने वाली सूचनाएं इसको और बढ़ा रही है। ये सूचनाएं इस तरह से पेश की जाती हैं कि बच्चे उसे ही सच मान लेते हैं और खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी हरकतें करने लगते हैं। हां, ये अच्छी बात है कि उनका मकसद आत्महत्या करना नहीं, बल्कि खुद को चोटिल करना होता है। इससे मिला दर्द एक नशे की तरह काम करता है और लोग कुछ देर के लिए राहत महसूस करते हैं।
बच्चों को अकेला छोड़ने से बचें
डॉ. नेहा आनंद बताती हैं कि पैरासुसाइडल बिहैवियर के मामलों में ज्यादातर बच्चे हाथ और जांघ पर कट मारते हैं। ऐसा बच्चा कर रहा है तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को कुछ समय जरूर दें। उन्हें ज्यादा से ज्यादा रचनात्मक कामों में व्यस्त करें। बच्चों को सुनना बहुत जरूरी है।