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सामान्य दवाओं से करेंगे हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल

Sun, 05 Jan 2014 09:13 AM IST
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 05 Jan 2014 09:13 AM IST
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parameter of hypertension changed

उच्च रक्तचाप के मरीजों को अब शुरुआत से ही बीटा ब्लॉकर ग्रुप की दवाएं नहीं दी जाएंगी। पहले रक्तचाप को सामान्य दवाओं से नियंत्रित किया जाएगा।

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यदि इससे काम नहीं बना तो दवाओं का कॉम्बिेनशन दिया जाएगा। इससे भी फायदा नहीं हुआ तो मरीज को दवाओं की खुराक बढ़ाई जाएगी। बावजूद रक्तचाप नियंत्रण में नहीं आया तो बीटा ब्लॉकर दवाएं दी जाएंगी।
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यह जानकारी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऋषि सेठी और डॉ. शरद चंद्र ने एक स्थानीय होटल में दी।
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वो उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के प्रबंधन के लिए जारी नए दिशा निर्देशों को फिजीशियन व कार्डियोलॉजिस्ट तक पहुंचाने के लिए शनिवार को आयोजित सतत् चिकित्सा कार्यक्रम (सीएमई) की प्री प्रेस कान्फ्रेंस में मौजूद थे।

डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि अभी तक उच्च रक्तचाप के मरीजों में 120/80 पैरामीटर को रखने का प्रयास किया जाता था।

बीमारियों की गाइड लाइन तय करने वाली समिति जेएनसी-8 ने बीते 10 साल में इलाज के लिए आए मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद इस उच्च रक्तचाप के पैरामीटर को 140/90 कर दिया है।


साथ ही ये भी सिफारिश की गई है कि पैरामीटर को बढ़ा देने का अर्थ ये नहीं है कि 120/80 वाले मरीजों की दवाएं बंद कर दी जाएं।

मानकों में बदलाव इसलिए किए गए हैं कि इलाज के लिए ऐसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाए जो बीमारी पर नियंत्रण तो करेें ही, उनका दुष्प्रभाव भी कम हो।

डॉ. सेठी ने बताया कि जेएनसी-8 ने बीटा ब्लॉकर को साइड इफेक्ट के चलते ही फर्स्ट लाइन ड्रग के रूप में इस्तेमाल को रोकने की सलाह दी है।

ये दवाएं सिर्फ उन्हीं परस्थिति में दी जाएंगी जब हाइपरटेंशन के साथ ही हार्ट अटैक और एंजाइना की शिकायत हो। उन्होंने बताया कि यदि उच्च रक्चाप के साथ-साथ मरीज मधुमेह और किडनी का रोगी भी है तो भी 140/90 रक्चाप उसके लिए नुकसानदेय नहीं है।

केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शरद चंद्र ने बताया कि 60 साल पार के मरीजों के जेएनसी-8 ने उच्च रक्तचाप के पैरामीटर में भी बदलाव किए हैं।

ऐसे वृद्ध मरीजों में रक्चाप 150/90 पैरामीटर तय किया गया है। साथ ही ये भी सिफारिश की गई है कि ऐसे मरीजों को दवाओं की अधिक डोज देने से मना किया गया।

जिससे उन्हें ‘हाइपोटेंशन’ (रक्चाप अचानक कम होना) की दिक्कत न हो। इससे वृद्ध मरीज अचानक चक्कर आने से गिर सकता है और उसे गंभीर चोटें भी आ सकती हैं।

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