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पंकज त्रिपाठी बोले: निजी अनुभव किरदार में डालिए, वह ज्यादा सच्चा और ईमानदार लगेगा; सिखाई अभिनय की बारीकियां

Mon, 30 Jun 2025 10:13 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 30 Jun 2025 10:13 PM IST
सार

Actor Pankaj Tripathi: लखनऊ पहुंचे अभिनेता पंकज त्रिपाठी और मुकेश तिवारी ने बच्चों को एक्टिंग की छोटी-छोटी बारिकियां सिखाईं। उन्होंने सिनेमा और थिएटर के बीच के अंतर को भी बताया। 

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Pankaj Tripathi said: Put your personal experience in the character, it will look more true and honest; taught
बच्चों से बात करते पंकज त्रिपाठी व अन्य। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भारतेंदु नाट्य अकादमी का ब्लैक बॉक्स सोमवार की शाम यहां रंगमंच के गुर सीख रहे छात्र-छात्राओं के चेहरों की चमक से दमक रहा था। उनके चेहरे पर खुशी और उल्लास के भाव थे क्योंकि उनके सामने मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी और मुकेश तिवारी थे। इस मास्टर क्लास में रंगमंच के विद्यार्थियों ने न सिर्फ अभिनय की बारीकियां सीखीं, अपनी जिज्ञासा को भी शांत किया। यहां चल रही कार्यशाला में अभिनय सीख रहे बच्चों के सामने जाते ही कुछ देर के लिए तो पंकज त्रिपाठी खुद भी बच्चे बन गए और उनके साथ खूब मस्ती की।

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सबसे पहले दोनों अभिनेताओं ने उन बच्चों से मुलाकात की जो इन दिनों यहां चल रही कार्यशाला में वाल्टर पीटर से अभिनय के गुर सीख रहे हैं। बच्चों ने जो अब तक सीखा उसकी एक झलक पेश की तो पंकज त्रिपाठी भी बच्चों के अंदाज में ही संवाद बोलने लगे। यह देख बच्चे और भी खुश हो गए। इसके बाद वे बीएनए के छात्र-छात्राओं और रंगमंडल के कलाकारों से मिले। यहां बने ब्लैक बॉक्स में एक तरफ विद्यार्थी थे तो दूसरी तरफ पंकज त्रिपाठी और मुकेश तिवारी। एक छात्र के सवाल के जवाब में मुकेश तिवारी ने कहा कि थियेटर में प्रयोग का भरपूर मौका मिलता है, जबकि सिनेमा में ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि थियेटर में जितना रियाज करोगे, आगे की मंजिल उतनी ही आसान हो जाएगी।
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एक छात्र ने सवाल किया कि हम जब किसी नाटक की तैयारी करते हैं तो पहले से उस नाटक का किरदार निभा चुके कलाकारों की छाप भी हम पर पड़ती है, इससे कैसे मुक्ति मिले। इस पर पंकज त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी किरदार में अपनी जिंदगी के अनुभवों को शामिल करोगे तो वे ज्यादा सच्चे लगेंगे। उन्होंने बताया कि मैं एक सीरीज कर रहा था क्रिमिनल जस्टिस तो प्रोड्यूसर मुझसे कहा कि यह विदेशी फिल्म से ली गई कहानी है, चाहो तो उसमें काम करने वाले एक्टर को देख लो। इस पर मैंने साफ मना कर दिया और अपने अंदाज में उस रोल को निभाया। उन्होंने कहा कि सीखने में कोई बुराई नहीं है लेकिन अभिनय में अपनी छाप डालनी जरूरी है। इस दौरान बीएनए के अध्यक्ष रति शंकर त्रिपाठी, निदेशक बिपिन कुमार, प्रशिक्षक डॉ. सुमित श्रीवास्तव, प्रिवेंद्र सिंह पिंकुल, संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर और केंद्रीय ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय कार्यालय के सचिव डॉ. देवेंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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हर अभिनेता का 10-12 साल बाद अपना तरीका हो जाता है
पंकज त्रिपाठी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि 10-12 साल काम करने के बाद हर अभिनेता का अपना अलग तरीका और अंदाज विकसित हो जाता है। शुरुआत में हमारे अवचेतन मन में कुछ पुरानी देखी-सुनी चीजें होती हैं। उनसे बाहर निकलकर ही अपनी अलग पहचान बन सकती है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बीएनए जैसी संस्थाएं थियेटर के लिए बहुत जरूरी हैं। यहां पर अभिनय की बारीकियों के साथ जिंदगी के कई सबक भी मिलते हैं।

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