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फर्जी पते से पासपोर्ट बनवाकर भारत में रह रही थी पाकिस्तानी महिला, खुफिया एजेंसियों के कान खड़े
Thu, 21 Feb 2019 03:13 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 21 Feb 2019 03:13 PM IST
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लखनऊ के नाका थाना में पाकिस्तानी महिला के फर्जी पते से पासपोर्ट बनवाकर भारत में रहने का मामला सामने आया है। प्रभारी निरीक्षक विश्वजीत सिंह का कहना है कि काशफा औसाफ नाम की महिला के खिलाफ न्यू गणेशगंज स्थित मंसूर मंजिल निवासी उसके जेठ गुलाम जिलानी ने प्राथमिकी दर्ज कराई है।
फर्जी पते से पासपोर्ट बनाने के मामले की जानकारी मिलते ही खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि मामला संपत्ति विवाद से जुड़ा है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां जांच कर रही हैं। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि काशफा अपनी बेटी व दामाद के साथ गोमतीनगर विस्तार स्थित ग्रीनवुड अपार्टमेंट में रहती हैं।
उनका जेठ गुलाम जिलानी से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। गुलाम जिलानी का आरोप है कि काशफा मूलत: पाकिस्तानी हैं। उनका जन्म वर्ष 1693 में पाकिस्तान में हुआ था। 12 दिसंबर 1982 में गुलाम जिलानी का निकाह हुआ। निकाह में शामिल होने के लिए काशफा पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत आईं और कुछ दिन बाद लौट गईं।
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वर्ष 1986 में वह फिर पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत आईं और मंसूर मंजिल स्थित गुलाम वारिस खां की संपत्ति पर कब्जा करने की नियत से उनसे निकाह कर लिया। फिलहाल गुलाम वारिस खां का इंतकाल हो चुका है। गुलाम जिलानी का आरोप है कि उन्होंने अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज नष्ट कर दिए।
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फर्जी पते से पासपोर्ट बनाने के मामले की जानकारी मिलते ही खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि मामला संपत्ति विवाद से जुड़ा है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां जांच कर रही हैं। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि काशफा अपनी बेटी व दामाद के साथ गोमतीनगर विस्तार स्थित ग्रीनवुड अपार्टमेंट में रहती हैं।
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उनका जेठ गुलाम जिलानी से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। गुलाम जिलानी का आरोप है कि काशफा मूलत: पाकिस्तानी हैं। उनका जन्म वर्ष 1693 में पाकिस्तान में हुआ था। 12 दिसंबर 1982 में गुलाम जिलानी का निकाह हुआ। निकाह में शामिल होने के लिए काशफा पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत आईं और कुछ दिन बाद लौट गईं।
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वर्ष 1986 में वह फिर पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत आईं और मंसूर मंजिल स्थित गुलाम वारिस खां की संपत्ति पर कब्जा करने की नियत से उनसे निकाह कर लिया। फिलहाल गुलाम वारिस खां का इंतकाल हो चुका है। गुलाम जिलानी का आरोप है कि उन्होंने अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज नष्ट कर दिए।
मुकदमा दर्ज कर की जा रही है जांच
डेमो
23 दिसंबर 1987 को काशफा ने फर्जी कागजातों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया। उन्होंने पासपोर्ट के आवेदन पत्र में अपना जन्मस्थान प्रतापगढ़ व स्थायी पता चारबाग में अली बाबा मस्जिद खम्मन पीर दर्शाया है जो फर्जी है।
उपरोक्त पते पर वह कभी रही ही नहीं। उन्होंने चार बार पासपोर्ट का नवीनीकरण कराया, जिसमें से अंतिम पासपोर्ट सात मई 2018 का है। उक्त पासपोर्ट पर उन्होंने अपने स्वर्गीय पति गुलाम वारिस खां के निवास स्थान मंसूर मंजिल न्यू गणेशगंज का पता लिखवाया है।
गुलाम जिलानी का कहना है कि काशफा औसाफ ने सदर तहसील के राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से उनके छोटे भाई गुलाम वारिस खां की संपत्ति को अपने नाम दर्ज करा लिया है। उन्होंने काशफा औसाफ के पासपोर्ट की जांच कराने और उनके खिलाफ भारतीय नागरिकता अधिनियम वर्ष 1955 के उल्लंघन के तहत कार्रवाई करने और संपत्ति से उनका नाम खारिज करने की मांग की है। प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।
उपरोक्त पते पर वह कभी रही ही नहीं। उन्होंने चार बार पासपोर्ट का नवीनीकरण कराया, जिसमें से अंतिम पासपोर्ट सात मई 2018 का है। उक्त पासपोर्ट पर उन्होंने अपने स्वर्गीय पति गुलाम वारिस खां के निवास स्थान मंसूर मंजिल न्यू गणेशगंज का पता लिखवाया है।
गुलाम जिलानी का कहना है कि काशफा औसाफ ने सदर तहसील के राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से उनके छोटे भाई गुलाम वारिस खां की संपत्ति को अपने नाम दर्ज करा लिया है। उन्होंने काशफा औसाफ के पासपोर्ट की जांच कराने और उनके खिलाफ भारतीय नागरिकता अधिनियम वर्ष 1955 के उल्लंघन के तहत कार्रवाई करने और संपत्ति से उनका नाम खारिज करने की मांग की है। प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।