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लखनऊ की इनसाइक्लोपीडिया दिवंगत डॉ. योगेश प्रवीण को पद्मश्री, उनके भाई ने ग्रहण किया सम्मान
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राष्ट्रपति भवन में सम्मान लेते डॉ. योगेश प्रवीण के भाई कामेश।
- फोटो : ??? ?????
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लखनऊ की इनसाइक्लोपीडिया दिवंगत डॉ. योगेश प्रवीण को राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में पद्मश्री से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उनके भाई कामेश श्रीवास्तव ने प्राप्त किया। सम्मान समारोह के दौरान भाई को याद कर उनकी आंखें नम हो गईं।
जानेमाने इतिहासकार लेखक पद्मश्री योगेश प्रवीण का 12 अप्रैल को निधन हो गया था। वह 82 वर्ष के थे। डॉ. योगेश प्रवीण को 2020 में पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत किया गया था।
लेकिन कोविड की वजह से समारोह आयोजित नहीं किया जा सका था। स्थितियां सामान्य होने पर अब सोमवार को दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जहां उनके भाई कामेश श्रीवास्तव ने पुरस्कार ग्रहण किया।
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योगेश प्रवीण तीन भाई बहनों में बड़े थे। उनसे छोटी बहन मंजू और कामेश हैं। कामेश श्रीवास्तव यूपी जल निगम से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। योगेश प्रवीण की ख्वाहिश थी कि गौस नगर स्थित उनके आवास पंचवटी को म्यूजियम बनाया जाए।
जल्द प्रकाशित होगी सव्यसाची
गुलाब ऐसे ही थोड़े गुलाल होता है, ये बात कांटों पे चलने के बाद समझ आती है...यह शेर पद्मश्री डॉ. योगेश प्रवीण ने अपनी आत्मकथा का सार बताते हुए सुनाया था। उन्होंने बताया था कि लॉकडाउन का दौर परीक्षा का था। मैंने लॉकडाउन में आत्मकथा सव्यसाची योगेश के सफर की प्रवीणता गद्य लिखी। उम्मीद जताई जा रही है कि उनकी आत्मकथा जल्द प्रकाशित होगी। इसमें कानपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई, बीमारी से संघर्ष, अध्यापन, लेखन वगैरह के अनछुए पहलू मिलेंगे।
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जानेमाने इतिहासकार लेखक पद्मश्री योगेश प्रवीण का 12 अप्रैल को निधन हो गया था। वह 82 वर्ष के थे। डॉ. योगेश प्रवीण को 2020 में पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत किया गया था।
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लेकिन कोविड की वजह से समारोह आयोजित नहीं किया जा सका था। स्थितियां सामान्य होने पर अब सोमवार को दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जहां उनके भाई कामेश श्रीवास्तव ने पुरस्कार ग्रहण किया।
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योगेश प्रवीण तीन भाई बहनों में बड़े थे। उनसे छोटी बहन मंजू और कामेश हैं। कामेश श्रीवास्तव यूपी जल निगम से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। योगेश प्रवीण की ख्वाहिश थी कि गौस नगर स्थित उनके आवास पंचवटी को म्यूजियम बनाया जाए।
जल्द प्रकाशित होगी सव्यसाची
गुलाब ऐसे ही थोड़े गुलाल होता है, ये बात कांटों पे चलने के बाद समझ आती है...यह शेर पद्मश्री डॉ. योगेश प्रवीण ने अपनी आत्मकथा का सार बताते हुए सुनाया था। उन्होंने बताया था कि लॉकडाउन का दौर परीक्षा का था। मैंने लॉकडाउन में आत्मकथा सव्यसाची योगेश के सफर की प्रवीणता गद्य लिखी। उम्मीद जताई जा रही है कि उनकी आत्मकथा जल्द प्रकाशित होगी। इसमें कानपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई, बीमारी से संघर्ष, अध्यापन, लेखन वगैरह के अनछुए पहलू मिलेंगे।