{"_id":"5d42999e8ebc3e6ce97eb075","slug":"outsider-in-court-record-room-is-threat-to-security-says-high-court","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड रूम में बाहरी लोगों का प्रवेश सुरक्षा के लिए खतरा, अपनाया सख्त रुख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड रूम में बाहरी लोगों का प्रवेश सुरक्षा के लिए खतरा, अपनाया सख्त रुख
Thu, 01 Aug 2019 01:19 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Thu, 01 Aug 2019 01:19 PM IST
विज्ञापन
Lucknow High Court
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा के एक मामले की फाइल हाईकोर्ट के रिकॉर्ड रूम से गायब कर छिपा दिए जाने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के आदेश पर हुई जांच में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा फाइल छिपाए जाने के तथ्य सामने आने के बाद अदालत ने इसे सुरक्षा के लिए खतरा बताया। साथ ही लखनऊ के एसपी नॉर्थ को फाइल छिपाने के मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।
न्यायमूर्ति अजय लांबा व न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने यह आदेश नितिन कुमार की सुरक्षा प्रदान किए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों पर दिए। अदालत ने कहा कि यह सामने आ रहा है कि कोर्ट के रिकॉर्ड रूम व विभिन्न सेक्शन में बाहरी लोग लगातार आ-जा रहे हैं। यह गंभीर मामला है। संवेदनशील स्थानों पर ऐसे लोगों की मौजूदगी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। अवांछित लोग रिकॉर्ड नष्ट करने के लिए आग भी लगा सकते हैं।
नितिन कुमार की याचिका पर रिट कोर्ट ने याची के पक्ष में 13 जनवरी 2011 को निर्देश जारी किए थे। इसके बाद मामले की सुनवाई आठ साल बाद 24 मई 2019 और 18 जुलाई 2019 को नियत हुई, लेकिन 18 जुलाई को मामले की पत्रावली कोर्ट को प्रेषित नहीं की गई। इस पर कोर्ट ने डिप्टी रजिस्ट्रार आरके मौर्य समेत तीन अन्य अधिकारियों को तलब कर पूछताछ की।
विज्ञापन
विज्ञापन
न्यायमूर्ति अजय लांबा व न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने यह आदेश नितिन कुमार की सुरक्षा प्रदान किए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों पर दिए। अदालत ने कहा कि यह सामने आ रहा है कि कोर्ट के रिकॉर्ड रूम व विभिन्न सेक्शन में बाहरी लोग लगातार आ-जा रहे हैं। यह गंभीर मामला है। संवेदनशील स्थानों पर ऐसे लोगों की मौजूदगी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। अवांछित लोग रिकॉर्ड नष्ट करने के लिए आग भी लगा सकते हैं।
विज्ञापन
नितिन कुमार की याचिका पर रिट कोर्ट ने याची के पक्ष में 13 जनवरी 2011 को निर्देश जारी किए थे। इसके बाद मामले की सुनवाई आठ साल बाद 24 मई 2019 और 18 जुलाई 2019 को नियत हुई, लेकिन 18 जुलाई को मामले की पत्रावली कोर्ट को प्रेषित नहीं की गई। इस पर कोर्ट ने डिप्टी रजिस्ट्रार आरके मौर्य समेत तीन अन्य अधिकारियों को तलब कर पूछताछ की।
विज्ञापन
डिप्टी रजिस्ट्रार ने कोर्ट को बताया कि दो दिन पहले तक फाइल अपने स्थान पर मौजूद थी, पर सुनवाई की तिथि को वहां से गायब पाई गई। कोर्ट ने पाया कि फाइल गायब होने का सीधा लाभ याची को मिल रहा है। इस पर कोर्ट ने हाईकोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार को फाइल की नामौजूदगी के मामले में जांच के आदेश दिए। कोर्ट ने उनसे यह भी कहा कि अगर फाइल के गायब होने में कोई आपराधिक मंशा पाई जाती है तो एफआईआर दर्ज कराने में संकोच न किया जाए। इसकेसाथ ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई 31 जुलाई को नियत की थी।
बुधवार को जांच अधिकारी डॉ. दीपक स्वरूप सक्सेना ने कोर्ट को बताया कि तफ्तीश के दौरान मनोज कुमार नाम के एक बाहरी व्यक्ति को दोषी पाया गया जिसने अपना अपराध स्वीकार किया है। उसके बारे में सीसीटीवी फुटेज से जानकारी हासिल हुई। इसके साथ ही डिप्टी रजिस्ट्रार आरके मौर्य, सहायक रजिस्ट्रार राम सेवक व छोटे लाल, समीक्षा अधिकारी केदारनाथ गुप्त व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महेंद्र कुमार और शेर अली के बयान दर्ज किए गए।
जांच में रिकॉर्ड रूम के दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर इन सभी की लापरवाही सामने आई। ये सभी बाहरी व्यक्ति मनोज कुमार उर्फ कमांडर को रिकॉर्ड रूम में मनमाने तरीके से प्रवेश करने देने के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं। मनोज ने अपने कुबूलनामे में कहा कि उसने संबंधित फाइल अधिवक्ता ओपी श्रीवास्तव के कहने पर उसके मूल स्थान से हटाकर दूसरी जगह छिपा दी थी।
अदालत ने कहा कि याची के वकील सुयश गुप्ता भी कोर्ट की कार्यवाही को बाधित करने की कोशिश के सिलसिले में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अदालत का मानना है कि पूर्व में दिए गए सुरक्षा संबंधी आदेश का लाभ हासिल करते रहने के लिए याची ने आपराधिक कृत्य करते हुए न्यायिक प्रक्रिया व अदालती कार्यवाही में बाधा पहुंचाई।
बुधवार को जांच अधिकारी डॉ. दीपक स्वरूप सक्सेना ने कोर्ट को बताया कि तफ्तीश के दौरान मनोज कुमार नाम के एक बाहरी व्यक्ति को दोषी पाया गया जिसने अपना अपराध स्वीकार किया है। उसके बारे में सीसीटीवी फुटेज से जानकारी हासिल हुई। इसके साथ ही डिप्टी रजिस्ट्रार आरके मौर्य, सहायक रजिस्ट्रार राम सेवक व छोटे लाल, समीक्षा अधिकारी केदारनाथ गुप्त व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महेंद्र कुमार और शेर अली के बयान दर्ज किए गए।
जांच में रिकॉर्ड रूम के दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर इन सभी की लापरवाही सामने आई। ये सभी बाहरी व्यक्ति मनोज कुमार उर्फ कमांडर को रिकॉर्ड रूम में मनमाने तरीके से प्रवेश करने देने के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं। मनोज ने अपने कुबूलनामे में कहा कि उसने संबंधित फाइल अधिवक्ता ओपी श्रीवास्तव के कहने पर उसके मूल स्थान से हटाकर दूसरी जगह छिपा दी थी।
अदालत ने कहा कि याची के वकील सुयश गुप्ता भी कोर्ट की कार्यवाही को बाधित करने की कोशिश के सिलसिले में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अदालत का मानना है कि पूर्व में दिए गए सुरक्षा संबंधी आदेश का लाभ हासिल करते रहने के लिए याची ने आपराधिक कृत्य करते हुए न्यायिक प्रक्रिया व अदालती कार्यवाही में बाधा पहुंचाई।
सीनियर रजिस्ट्रार व डीजीपी सुनिश्चित करें कार्रवाई
रिकॉर्ड रूम से फाइल गायब होने की एफआईआर 19 जुलाई को विभूतिखंड थाने में दर्ज कराई गई थी। हाईकोर्ट ने लखनऊ के एसपी नॉर्थ को आदेश दिए हैं कि वे मामले की खुद जांच करें और दोषी पाए जाने पर कोर्ट की रजिस्ट्री के किसी अधिकारी या अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई करने से पीछे न हटें।
अदालत ने हाईकोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार व डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले में कार्रवाई सुनिश्चित कराएं। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि मुख्य आरोपी मनोज कुमार के कुबूलनामे के बाद भी उन लोगों की गिरफ्तारी नहीं की जा सकी है जिनके इशारे पर उसने यह अपराध किया। अदालत समझ रही है कि फाइल के न मिलने का सीधा लाभ याची को मिल रहा है लेकिन उसे अभी तक न आरोपी बनाया गया है न कोई पूछताछ की गई।
सीसीटीवी कैमरों की एक महीने की फुटेज की जांच के आदेश
अदालत ने कहा कि एसपी नॉर्थ हाईकोर्ट सुरक्षा व कमांडेंट सीआरपीएफ हाईकोर्ट के रिकॉर्ड रूम व विभिन्न सेक्शनों के सभी सीसीटीवी कैमरों की 18 जुलाई 2019 से एक माह पहले की फुटेज को सील कर दें। साथ ही सीनियर रजिस्ट्रार को आदेश दिए कि वे एक वरिष्ठ अधिकारी को इन फुटेज की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपें।
अदालत ने हाईकोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार व डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले में कार्रवाई सुनिश्चित कराएं। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि मुख्य आरोपी मनोज कुमार के कुबूलनामे के बाद भी उन लोगों की गिरफ्तारी नहीं की जा सकी है जिनके इशारे पर उसने यह अपराध किया। अदालत समझ रही है कि फाइल के न मिलने का सीधा लाभ याची को मिल रहा है लेकिन उसे अभी तक न आरोपी बनाया गया है न कोई पूछताछ की गई।
सीसीटीवी कैमरों की एक महीने की फुटेज की जांच के आदेश
अदालत ने कहा कि एसपी नॉर्थ हाईकोर्ट सुरक्षा व कमांडेंट सीआरपीएफ हाईकोर्ट के रिकॉर्ड रूम व विभिन्न सेक्शनों के सभी सीसीटीवी कैमरों की 18 जुलाई 2019 से एक माह पहले की फुटेज को सील कर दें। साथ ही सीनियर रजिस्ट्रार को आदेश दिए कि वे एक वरिष्ठ अधिकारी को इन फुटेज की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपें।