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अखिलेश सरकार को करारा झटका
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 13 Jan 2014 10:40 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस के सिपाहियों, मुख्य आरक्षियों और उपनिरीक्षकों को दिए जाने वाले ‘आउट ऑफ टर्न’ प्रमोशन को अवैध करार दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि दो दिसंबर 2008 में कांस्टेबल और हेडकांस्टेबल सेवा नियमावली और सब-इंस्पेक्टर तथा इंस्पेक्टर सेवा नियमावली के प्रभाव में आ जाने के बाद ‘आउट ऑफ टर्न’ प्रमोशन के संबंध में तीन फरवरी 1994 का शासनादेश शून्य हो गया है।
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कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह तथा डीजीपी को निर्देश दिया कि दो दिसंबर 2008 के बाद दी गई आउट ऑफ टर्न प्रोन्नतियों को वापस लिया जाए।
सिपाही प्रेम कुमार उपाध्याय और सब इंस्पेक्टर केके मिश्रा की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा कि यह स्थापित विधि है कि प्रशासनिक आदेश वैधानिक नियमावली से ऊपर नहीं हो सकते हैं।
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वर्ष 1994 का शासनादेश तब तक प्रभावी था जब तक कि पुलिसकर्मियों की नियुक्ति और प्रोन्नति के संबंध में कोई नियमावली नहीं बनी थी।
याची ने ‘आउट ऑफ टर्न’ प्रमोशन की संस्तुति मिलने के बावजूद प्रोन्नत न किए जाने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 2008 सेवा नियमावली में ऐसी कोई बात नहीं है, जिसके आधार पर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया।
हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तयार करते हुए सूबे के डीजीपी और प्रमुख सचिव को आदेश दिया है कि वे छह महीने के भीतर बताएं कि सरकार ने कितने अवैध प्रमोशन किए।
गौरतलब है कि पिछले करीब छह महीने में कई दफा हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के फैसलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
चाहे वो टीईटी का मामला हो या फिर आतंकियों से केस वापसी का मामला, हाईकोर्ट ने अखिलेश सरकार को बार-बार चुनौती दी है।
ऐसे में पहले ही तमाम दुश्वारियां झेल रही यूपी सरकार के लिए यह फैसला एक बड़ी मुसीबत के रूप में सामने आया है।