यादव के काले कारनामे में शामिल थे 519 करीबी!
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नोएडा अथॉरिटी के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह और उसकी पत्नी कुसुम लता के डायरेक्टर वाली कंपनियों की संपत्ति का मालिक अब आयकर विभाग है। अफसरों ने छापामारी एवं लॉकर से बरामद दस्तावेज के आधार पर यादव सिंह सिंडीकेट की संपत्तियों का विभाग से प्रोविजनल अटैचमेंट कर लिया है।
जब तक इन संपत्तियों पर इनकम टैक्स चोरी का निर्धारण और उसकी वसूली नहीं हो जाती, तब तक आयकर विभाग ही इन संपत्तियों का कानूनी मालिक रहेगा। इन संपत्तियों को न तो यादव सिंह बेच सकेगा और न कंपनियों के डायरेक्टर।
आयकर विभाग ने यादव सिंह के घर, पत्नी कुसुम लता, राजेंद्र मनोचा, नम्रता मनोचा, अनिल पेशावरी सहित अन्य लोगों के 20 ठिकानों पर दिल्ली, गाजियाबाद एवं नोएडा में हुई छापामारी एवं लॉकर को खंगालने पर बरामद संपत्तियों एवं निवेश से जुड़े दस्तावेज और हीरे के गहनों और कैश को दायरे में लेकर आयकर चोरी की जांच शुरू कर दी है।
इसकी जिम्मेदारी असेसमेंट सेल की टीम को दी गई है। इस टीम के अफसर यादव सिंह सिंडीकेट की रीयल एस्टेट में निवेश सहित संपत्तियों की कीमत और इनकम टैक्स चोरी का असेसमेंट करेंगे।
संपत्तियां बेचने पर लगाई पाबंदी
इसके लिए विभाग ने यादव सिंह की संपत्तियों को पहले ही अटैच कर लिया था, लेकिन मंगलवार को कुसुम लता के डायरेक्टर वाली कंपनियों में शामिल डायरेक्टरों की संपत्तियों का भी प्रोविजनल अटैचमेंट कर लिया है।
इसके बाद यादव सिंह सिंडीकेट के सभी लोगों को नोटिस जारी कर संपत्तियों के बेचने पर पाबंदी लगा दी है। इनकम टैक्स न चुकाया तो संपत्तियां हो सकती हैं नीलामआयकर के अफसरों के मुताबिक संपत्तियों का प्रोविजनल अटैचमेंट इसलिए किया जाता है कि टैक्स और पेनाल्टी नहीं चुकाए जाने पर आयकर विभाग उन संपत्तियों को नीलाम कर सकता है।
लिहाजा जब तक इनकम टैक्स चोरी का निर्धारण और उसकी पेनाल्टी सहित वसूली नहीं हो जाती, तब तक अटैच की गई संपत्तियां आयकर विभाग के कब्जे में रहती हैं। इस अवधि में आयकर विभाग ही कानूनी रूप से अटैच की गई संपत्तियों का मालिक माना जाता है।
यादव सिंह सिंडीकेट के 27 नवंबर को छापेमारी के दौरान सील किए गए 13 लॉकरों में से खोलने को बाकी रहे चार लॉकर को बुधवार को खोला गया। इन लॉकरों से भी कैश एवं गहने बरामद हुए हैं। अफसरों के मुताबिक अब यादव सिंह सिंडीकेट की संपत्ति, निवेश, गहने, नकदी का फाइल असेसमेंट होगा, जिससे इनकम टैक्स चोरी का पता चल सकेगा।
करीबी 519 लोगों के खिलाफ नोटिस तैयार
यादव सिंह के करीबी रहे 519 लोगों को प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग के अधिकारियों ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के मुताबिक, इनके नाम यादव सिंह के ठिकानों पर हुई छापेमारी में मिली डायरी से पता लगे हैं जबकि कुछ लोग छह माह से उनसे फोन पर संपर्क में थे।
इनमें नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के उच्च अधिकारी, कर्मचारी, एक पूर्व सीईओ, ठेकेदार से लेकर कई बड़े नेता और बाहरी लोग भी शामिल हैं। वहीं, आयकर विभाग ने नोएडा प्राधिकरण को पत्र लिखकर नोएडा में स्थित यादव सिंह की कंपनियों के बारे में पूरा विवरण मांगा है।
बुधवार को पत्र मिलने के बाद प्राधिकरण ने संबंधित विभागों की टीम लगा दी है। कर्मचारी देर शाम तक रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे। प्राधिकरण के एसीईओ पीके अग्रवाल ने आयकर की तरफ से पत्र आने और यादव सिंह से जुड़ी कंपनियों के बारे में जानकारी मांगे जाने की पुष्टि की है।
सूत्रों का कहना है कि छापे के दौरान आयकर विभाग को कुछ ऐसे दस्तावेज हाथे लगे हैं, जिससे यादव सिंह की भागीदारी का पता चलता है। प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच के लिए आयकर से इन कंपनियों के बारे में सटीक ब्योरा मांगा है।
ज्वैलरी बचाने के लिए 30 करोड़ का चैक
जिले के तीनों प्राधिकरणों के चीफ इंजीनियर यादव सिंह ने आयकर विभाग की छापेमारी में बरामद ज्वैलरी को व्हाइट मनी में दिखाने के लिए जांच अधिकारियों को 30 करोड़ रुपये का चेक दिया था।
सूत्रों के मुताबिक, 27 नवंबर को पड़े छापे में बरामद इस ज्वैलरी के बारे में हुई पूछताछ में यादव सिंह ने बताया था कि यह उनकी अघोषित संपत्ति है। उसे नियमित कराने के लिए उन्होंने अपनी घोषित संपत्ति में से 30 करोड़ रुपये तुरंत देने की बात कह दी थी।
सूत्रों के मुताबिक, 27 नवंबर को यादव सिंह के घर पड़े छापे में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया था, जिनका नोएडा-एनसीआर से कोई वास्ता नहीं था। पूरी तैयारी के साथ हुई कार्रवाई में जांच टीम में चेन्नई, देहरादून और बंगलूरू के चीफ इनकम टैक्स कमिश्नर के के अलावा नवनियुक्त 11 आईआरएस अधिकारी शामिल थे।
यादव सिंह पर पिछली बार मारे गए छापे की गलतियों से सबक लेते हुए ऐसा किया गया था। इस टीम की कार्रवाई में यादव सिंह के घर से जेवरों का भंडार मिला। आईटी की टीम ने इनके स्रोत के बारे में पूछताछ की तो इनकी कीमत 70 करोड़ रुपये के आसपास बताई गई।