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आयुष्मान कार्ड के इंतजार में टल रहा ऑपरेशन, तमाम प्रयासों के बाद भी नहीं मिल पा रहा लाभ
Sun, 22 Sep 2019 12:41 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: Amulya Rastogi
Updated Sun, 22 Sep 2019 12:41 AM IST
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ayushman yojna
- फोटो : amar ujala
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स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि शिविर लगातार शहरी एवं ग्रामीण इलाके में लोगों को आयुष्मान कार्ड मुहैया कराया जा रहा है, लेकिन हकीकत एकदम अलग है। पड़ताल में यह बात सामने आई है कि आयुष्मान कार्ड के लिए लोग परेशान हैं। जिनके नाम सूची में हैं, उन्हें भी कार्ड नहीं मिल पा रहा है।
राजधानी के शहरी एवं ग्रामीण इलाके में आयुष्मान योजना में चयनित 279930 परिवार चयनित हैं। विभाग का दावा है कि 108609 को गोल्डेन कार्ड जारी कर दिया गया है। अन्य को कार्ड देने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर शिविर लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं कामन सर्विस सेंटर को भी कार्ड बनाने का जिम्मा दिया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार तय की गई सूची में जिन लाभार्थियों का नाम है, वे कामन सर्विस सेंटर पर पहुंच कर अपना कार्ड बनवा सकते हैं।
इसके लिए उन्हें 30 रुपये का भुगतान करना होगा, लेकिन स्थिति एकदम अलग है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वालों का आरोप है कि उन्हें माकूल जवाब नहीं दिया जा रहा है। उनका नाम सूची में है या नहीं, यह भी नहीं बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री जन अरोग्य योजना के तहत चयनित 4108 परिवारों को भी कार्ड के लिए चक्कर काटना पड रहा है।
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राजधानी के शहरी एवं ग्रामीण इलाके में आयुष्मान योजना में चयनित 279930 परिवार चयनित हैं। विभाग का दावा है कि 108609 को गोल्डेन कार्ड जारी कर दिया गया है। अन्य को कार्ड देने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर शिविर लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं कामन सर्विस सेंटर को भी कार्ड बनाने का जिम्मा दिया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार तय की गई सूची में जिन लाभार्थियों का नाम है, वे कामन सर्विस सेंटर पर पहुंच कर अपना कार्ड बनवा सकते हैं।
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इसके लिए उन्हें 30 रुपये का भुगतान करना होगा, लेकिन स्थिति एकदम अलग है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वालों का आरोप है कि उन्हें माकूल जवाब नहीं दिया जा रहा है। उनका नाम सूची में है या नहीं, यह भी नहीं बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री जन अरोग्य योजना के तहत चयनित 4108 परिवारों को भी कार्ड के लिए चक्कर काटना पड रहा है।
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केस 1 : कार्ड नहीं मिलने से रुका हार्ट का इलाज
तेज किशन खेड़ा निवासी रामजानकी का नाम आयुष्मान की लिस्ट में है। कई कार्ड के लिए काफी दिन तक चक्कर काटती रही। पिछले माह उसे आशा सहयोगी ने दूसरे का कार्ड दे दिया। जब वह घर गई और बेटे को दिखाया तो पता चला कि कार्ड दूसरे का है।
उसे हार्ट संबंधी दिक्त है। डाक्टर ने स्टेंट डालने की सलाह दी है। लेकिन अभी तक उसे कार्ड ही नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में वह प्रतिदिन सुबह सीएचसी पहुंच जाती है और शाम तक अपनी बारी का इंतजार करती है। कुछ ऐसी ही दिक्कत लेकर दूसरे भी तमाम ग्रामीण सीएचसी पहुंच रहे हैं।
केस 2 : टल रहा है घुटने का इलाज
राजधानी के कश्मीरी गेट निवासी राम प्रकाश वर्मा का नाम सूची में है। लेकिन उन्हें अभी तक कार्ड नहीं मिल पाया है। वह आशा और एएनएम के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें यह कह कर लौटा दिया जाता है कि नंबर आएगा तो बुलाया जाएगा। राम प्रकाश को अपने घटने का इलाज कराना है। रुपये नहीं होने की वजह से वह ऑपरेशन नहीं करा पा रहे हैं। उनका कहना है कि केजीएमयू गए। सूची दिखाई तो कार्ड लेकर आने के लिए कहा गया है।
उसे हार्ट संबंधी दिक्त है। डाक्टर ने स्टेंट डालने की सलाह दी है। लेकिन अभी तक उसे कार्ड ही नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में वह प्रतिदिन सुबह सीएचसी पहुंच जाती है और शाम तक अपनी बारी का इंतजार करती है। कुछ ऐसी ही दिक्कत लेकर दूसरे भी तमाम ग्रामीण सीएचसी पहुंच रहे हैं।
केस 2 : टल रहा है घुटने का इलाज
राजधानी के कश्मीरी गेट निवासी राम प्रकाश वर्मा का नाम सूची में है। लेकिन उन्हें अभी तक कार्ड नहीं मिल पाया है। वह आशा और एएनएम के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें यह कह कर लौटा दिया जाता है कि नंबर आएगा तो बुलाया जाएगा। राम प्रकाश को अपने घटने का इलाज कराना है। रुपये नहीं होने की वजह से वह ऑपरेशन नहीं करा पा रहे हैं। उनका कहना है कि केजीएमयू गए। सूची दिखाई तो कार्ड लेकर आने के लिए कहा गया है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जहां दिक्कतें हैं दिखवाई जा रही है। यदि किसी को गलत कार्ड मिला है अथवा कि सी तरह की त्रुटि है तो सीएचसी प्रभारी से मिल कर समस्या का समाधान कराएं। मुख्यालय से भी इसकी निगरानी की जा रही है।
- डा. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ, लखनऊ।
कितनी सुधरी सेहत
केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन अरोग्य योजना का संचालन किया जा रहा है। इसकेतहत चयनित परिवार के सदस्यों का पांच लाख रुपये तक का इलाज किया जाता है। सरकारी अस्पतालों के साथ ही योजना में चयनित अस्पताल में भी कार्ड धारक परिवार के सदस्य इलाज करा सकते हैं।
- डा. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ, लखनऊ।
कितनी सुधरी सेहत
केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन अरोग्य योजना का संचालन किया जा रहा है। इसकेतहत चयनित परिवार के सदस्यों का पांच लाख रुपये तक का इलाज किया जाता है। सरकारी अस्पतालों के साथ ही योजना में चयनित अस्पताल में भी कार्ड धारक परिवार के सदस्य इलाज करा सकते हैं।
पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की शुरुआत एक अप्रैल 2018 किया है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों (बीपीएल) को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है। लेकिन अभी तक इस योजना को धरातल पर नहीं उतारा जा सका है। लाभार्थियों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इसी लिए अमर उजाला ने नए अभियान की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाना और उनसे निराकरण की दिशा में काम करना है, जिससे लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। यदि आपकी कोई प्रतिक्रिया हो अथवा सुझाव हो तो निम्न नंबरों पर संपर्क करें।
व्हाट्सअप नंबर- 8859108092
इसी लिए अमर उजाला ने नए अभियान की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाना और उनसे निराकरण की दिशा में काम करना है, जिससे लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। यदि आपकी कोई प्रतिक्रिया हो अथवा सुझाव हो तो निम्न नंबरों पर संपर्क करें।
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