{"_id":"421ba801f33587f96f5378a5a4412382","slug":"opened-a-front-against-the-amendments-to-the-land-acquisition-act-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के खिलाफ खोला मोर्चा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के खिलाफ खोला मोर्चा
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
Updated Sun, 10 Aug 2014 01:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अखिल
विज्ञापन
भारतीय किसान महासभा व भाकपा की ओर से प्रतिरोध दिवस का आयोजन किया गया।
भाकपा के हरियाणा राज्य प्रभारी प्रेम सिंह गहलावत के नेतृत्व में धरना
दिया।
प्रेम सिंह गहलावत ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण कानून में किए जा रहे संशोधन करके कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाले हैं। मोदी सरकार ने अच्छे दिन लाने का वादा किया था, लेकिन इन कदमों से किसानों की स्थिति ओर ज्यादा खराब होने की संभावना है।
केंद्र सरकार राज्य सरकार के मत्थे मढ़कर भूमि अधिग्रहण में संशोधन चाहती है। गहलावत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून से संशोधन से न केवल किसानों की अधिकारहीनता बढे़ेगी, बल्कि देश में खाद्य असुरक्षा में भी बढ़ोतरी होगी। पीपीपी के तहत मौजूदा भूमि अधिग्रहण कानून में अधिग्रहण के लिए कम से कम 70 फीसदी किसानों की सहमति होनी जरूरी है। उन्होंने बताया कि अधिगृहीत जमीन के संबंध में किसानों की लंबे समय से मांग रही है कि उन्हें मार्केट रेट का कम से कम छह गुना मिले, हालांकि पिछले कानून में चार गुना का ही प्रावधान था। इस अवसर पर ओमप्रकाश आर्य, राजेंद्र, कृष्णा सैनी, ईश्वर पाल, रामू उपलाना, सत्यावान, कर्मबीर, नात्थी कश्यप, सोम प्रकाश, रामकुमार, ललित सैनी, सतपाल, महावीर, रामकिशन, रमेश कश्यप, सुलतान सिंह मौजूद रहे।
प्रेम सिंह गहलावत ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण कानून में किए जा रहे संशोधन करके कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाले हैं। मोदी सरकार ने अच्छे दिन लाने का वादा किया था, लेकिन इन कदमों से किसानों की स्थिति ओर ज्यादा खराब होने की संभावना है।
केंद्र सरकार राज्य सरकार के मत्थे मढ़कर भूमि अधिग्रहण में संशोधन चाहती है। गहलावत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून से संशोधन से न केवल किसानों की अधिकारहीनता बढे़ेगी, बल्कि देश में खाद्य असुरक्षा में भी बढ़ोतरी होगी। पीपीपी के तहत मौजूदा भूमि अधिग्रहण कानून में अधिग्रहण के लिए कम से कम 70 फीसदी किसानों की सहमति होनी जरूरी है। उन्होंने बताया कि अधिगृहीत जमीन के संबंध में किसानों की लंबे समय से मांग रही है कि उन्हें मार्केट रेट का कम से कम छह गुना मिले, हालांकि पिछले कानून में चार गुना का ही प्रावधान था। इस अवसर पर ओमप्रकाश आर्य, राजेंद्र, कृष्णा सैनी, ईश्वर पाल, रामू उपलाना, सत्यावान, कर्मबीर, नात्थी कश्यप, सोम प्रकाश, रामकुमार, ललित सैनी, सतपाल, महावीर, रामकिशन, रमेश कश्यप, सुलतान सिंह मौजूद रहे।