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ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में सात माह में सिर्फ दो प्रसव
Tue, 09 Jul 2019 01:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jul 2019 01:48 AM IST
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जहां एक ओर सरकार संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए अस्पतालों में सभी संभव सुविधाएं मुहैया कराने में जुटी है तो वहीं दूसरी ओर डॉक्टर-स्टॉफ व संसाधन होने के बावजूद गर्भवतियों को अन्य अस्पतालों में प्रसव के लिए रेफर किया जा रहा है। यही हाल है ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय का जहां ढाई साल पहले जच्चा-बच्चा केंद्र बना लेकिन साल में दो या तीन ही प्रसव कराए जाते हैं। पिछले सात माह में यहां केवल दो ही प्रसव कराए गए। अब इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को नोटिस जारी किया है और प्रसव की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं।
आरोप है कि ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में आने वाली गर्भवतियों को महिला डॉक्टर हालत गंभीर बताकर दूसरे बड़े अस्पताल रेफर कर देती हैं। स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में प्रसव के मामले में यह सबसे फिसड्डी हॉस्पिटल रहा। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने अस्पताल को नोटिस जारी कर प्रसव की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
17 बेड के साथ लेबर रूम, ओटी व वार्ड की सुविधा
ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में जच्चा-बच्चा केंद्र करीब ढाई साल पहले बनाया गया था। इसमें 17 बेड हैं। लेबर रूम, ओटी व वॉर्ड बनाया गया था। पांच महिला डॉक्टरों की तैनाती की गई। सिजेरियन के लिए बेहोशी के डॉक्टर तैनात हुए थे। दो साल बीतने के बाद भी यहां पर हर साल दो-चार प्रसव ही कराए जाते हैं। अस्पताल से प्रसव की मासिक रिपोर्ट शून्य जाने पर स्वास्थ्य विभाग के अफ सर हैरान हैं। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने नोटिस जारी कर संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
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पांच महिला रोग विशेषज्ञ तैनात
जच्चा-बच्चा केंद्र संचालन के लिए यहां पर पांच महिला रोग विशेषज्ञ तैनात है। इसमें गायत्री कन्नौजियां, नेहा चौधरी, हिमांशी कटियार, रेनू सान्याल, डॉ. चारू बाला है। इसमें डॉ. चारू पीजी करने के लिए गई है। बाकी चार महिला रोग विशेषज्ञ अब भी तैनात है। सिजेरियन ऑपरेशन के लिए दो बेहोशी के डॉक्टर भी तैनात है।
हर साल दो या चार प्रसव की रिपोर्ट
ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय बीते दो साल से प्रसव केंद्र चल रहा है। बावजूद इसके यहां पर हर साल दो या तीन प्रसव कराए जाने की रिपोर्ट शासन को जा रही है। अफसर भी प्रसव अधिक से अधिक कराए जाने पर जोर दे रहे हैं। बावजूद इसके अफसर कोई सुध नहीं ले रहे हैं।
दूसरे अस्पताल चली जाती हैं गर्भवतियां
अस्पताल में इस साल दो प्रसव कराए गए हैं। इनकी तादाद बढ़ाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। गर्भवतियां यहां प्रसव कराने की बजाए दूसरे बड़े अस्पताल चली जाती हैं।
डॉ. आनंद बोध, सीएमएस- ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय
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आरोप है कि ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में आने वाली गर्भवतियों को महिला डॉक्टर हालत गंभीर बताकर दूसरे बड़े अस्पताल रेफर कर देती हैं। स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में प्रसव के मामले में यह सबसे फिसड्डी हॉस्पिटल रहा। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने अस्पताल को नोटिस जारी कर प्रसव की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
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17 बेड के साथ लेबर रूम, ओटी व वार्ड की सुविधा
ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में जच्चा-बच्चा केंद्र करीब ढाई साल पहले बनाया गया था। इसमें 17 बेड हैं। लेबर रूम, ओटी व वॉर्ड बनाया गया था। पांच महिला डॉक्टरों की तैनाती की गई। सिजेरियन के लिए बेहोशी के डॉक्टर तैनात हुए थे। दो साल बीतने के बाद भी यहां पर हर साल दो-चार प्रसव ही कराए जाते हैं। अस्पताल से प्रसव की मासिक रिपोर्ट शून्य जाने पर स्वास्थ्य विभाग के अफ सर हैरान हैं। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने नोटिस जारी कर संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
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पांच महिला रोग विशेषज्ञ तैनात
जच्चा-बच्चा केंद्र संचालन के लिए यहां पर पांच महिला रोग विशेषज्ञ तैनात है। इसमें गायत्री कन्नौजियां, नेहा चौधरी, हिमांशी कटियार, रेनू सान्याल, डॉ. चारू बाला है। इसमें डॉ. चारू पीजी करने के लिए गई है। बाकी चार महिला रोग विशेषज्ञ अब भी तैनात है। सिजेरियन ऑपरेशन के लिए दो बेहोशी के डॉक्टर भी तैनात है।
हर साल दो या चार प्रसव की रिपोर्ट
ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय बीते दो साल से प्रसव केंद्र चल रहा है। बावजूद इसके यहां पर हर साल दो या तीन प्रसव कराए जाने की रिपोर्ट शासन को जा रही है। अफसर भी प्रसव अधिक से अधिक कराए जाने पर जोर दे रहे हैं। बावजूद इसके अफसर कोई सुध नहीं ले रहे हैं।
दूसरे अस्पताल चली जाती हैं गर्भवतियां
अस्पताल में इस साल दो प्रसव कराए गए हैं। इनकी तादाद बढ़ाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। गर्भवतियां यहां प्रसव कराने की बजाए दूसरे बड़े अस्पताल चली जाती हैं।
डॉ. आनंद बोध, सीएमएस- ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय