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Lucknow News: सिर्फ डेढ़ फीसदी महिलाएं कर रहीं रक्तदान
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लखनऊ। तमाम जागरूकता और स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रमों के बावजूद अभी भी महिलाएं खून की कमी की समस्या से छुटकारा नहीं पा सकी हैं। यही वजह है कि केजीएमयू के ब्लड बैंक में हुए कुल रक्तदान में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ डेढ़ फीसदी ही है। केजीएमयू ने लाल रक्त कोशिकाओं के खिलाफ मौजूद एंटीबॉडी के अध्ययन के दौरान यह आंकड़ा जारी किया है।
केजीएमयू का ब्लड बैंक प्रदेश का सबसे बड़ा ब्लड बैंक है। यहां हर साल 70 हजार से ज्यादा यूनिट रक्त दिया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो साल में यहां कुल 1,52,564 रक्तदाताओं ने रक्त दान किया। इनमें से महिलाओं की भागीदारी 2318 यानी सिर्फ 1.5 फीसदी ही रही। जबकि पुरुष रक्त दानदाता 1,50,246 यानी 98.5 फीसदी रहे।
11 पुरुष और 16 महिलाओं में मिली एंटीबॉडी
इस अध्ययन के दौरान देखा गया कि रक्तदान करने वालों में 11 पुरुष और 16 महिलाओं में लाल रक्त कोशिकाओं के लिए एंटीबॉडी मिली। ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. तूलिका चंद्रा ने बताया कि डायरेक्ट एंटीग्लोबुलियन टेस्ट में इसका पता चलता है। हर केंद्र पर यह सुविधा मौजूद नहीं है। एंटीबॉडी मौजूद होने पर रक्त लेने वाले व्यक्ति को रीएक्शन हो सकता है। इसलिए खून की जांच बेहद जरूरी है। इस अध्ययन में डॉ. ज्योति भारती, डॉ. अर्चना सोलंकी, डॉ. आशुतोष सिंह, डॉ. मलिका अग्रवाल, डॉ. तूलिका चंद्रा शामिल रहीं।
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सबसे ज्यादा रक्तदाता बी-पॉजीटिव ब्लड ग्रुप वाले
दो साल के दौरान सबसे ज्यादा 35.07 फीसदी रक्तदाता बी-पॉजीटिव ब्लड ग्रुप के रहे। दूसरे नंबर पर 28.28 फीसदी ओ-पॉजीटिव, तीसरे पर 23.34 फीसदी ए-पॉजीटिव ब्लड ग्रुप के रहे। इनके अलावा 9.57 फीसदी एबी पॉजीटिव, 1.73 फीसदी बी निगेटिव, 1.37 ओ निगेटिव, 1.17 ए-निगेटिव और 0.01 फीसदी रक्तदाता ऐसे ब्लड ग्रुप के थे, जिसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
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केजीएमयू का ब्लड बैंक प्रदेश का सबसे बड़ा ब्लड बैंक है। यहां हर साल 70 हजार से ज्यादा यूनिट रक्त दिया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो साल में यहां कुल 1,52,564 रक्तदाताओं ने रक्त दान किया। इनमें से महिलाओं की भागीदारी 2318 यानी सिर्फ 1.5 फीसदी ही रही। जबकि पुरुष रक्त दानदाता 1,50,246 यानी 98.5 फीसदी रहे।
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11 पुरुष और 16 महिलाओं में मिली एंटीबॉडी
इस अध्ययन के दौरान देखा गया कि रक्तदान करने वालों में 11 पुरुष और 16 महिलाओं में लाल रक्त कोशिकाओं के लिए एंटीबॉडी मिली। ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. तूलिका चंद्रा ने बताया कि डायरेक्ट एंटीग्लोबुलियन टेस्ट में इसका पता चलता है। हर केंद्र पर यह सुविधा मौजूद नहीं है। एंटीबॉडी मौजूद होने पर रक्त लेने वाले व्यक्ति को रीएक्शन हो सकता है। इसलिए खून की जांच बेहद जरूरी है। इस अध्ययन में डॉ. ज्योति भारती, डॉ. अर्चना सोलंकी, डॉ. आशुतोष सिंह, डॉ. मलिका अग्रवाल, डॉ. तूलिका चंद्रा शामिल रहीं।
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सबसे ज्यादा रक्तदाता बी-पॉजीटिव ब्लड ग्रुप वाले
दो साल के दौरान सबसे ज्यादा 35.07 फीसदी रक्तदाता बी-पॉजीटिव ब्लड ग्रुप के रहे। दूसरे नंबर पर 28.28 फीसदी ओ-पॉजीटिव, तीसरे पर 23.34 फीसदी ए-पॉजीटिव ब्लड ग्रुप के रहे। इनके अलावा 9.57 फीसदी एबी पॉजीटिव, 1.73 फीसदी बी निगेटिव, 1.37 ओ निगेटिव, 1.17 ए-निगेटिव और 0.01 फीसदी रक्तदाता ऐसे ब्लड ग्रुप के थे, जिसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी।