पहली बार होगी यूपी पुलिस की ऑनलाइन परीक्षा
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यूपी पुलिस के इतिहास में पहली आन लाइन परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है यह प्रशिक्षण 22 मई से 27 जुलाई 2014 तक किया जाना है।
इसमें तकरीबन 12 हजार पुलिस कर्मी भाग लेंगे। यह परीक्षा पुलिस प्रशिक्षण विभाग के महा निदेशक एके जैन और आईजी आरके विश्वकर्मा के नेतृत्व में होगी।
विभाग के आईज़ी संदीप सालुंके व एसपी नेहा पांडे भी इसके पर्यवेक्षण से जुड़े हैं।
दिया गया था प्रशिक्षण, अब होगा इम्तिहान
अधिकारियों के मुताबिक सीसीटीएनएस योजना के तहत थानों में ऑन लाइन एफआईआर दर्ज करने व अन्य रजिस्टरों की इंट्रियों को ऑन लाइन करने के लिए जिन पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया था, उनकी परीक्षा हो रही है।
आईजी आरके विश्वकर्मा ने बताया कि इससे इन पुलिस कर्मियों का दुबारा प्रशिक्षण भी हो जाएगा और यह भी सामने आ जाएगा कि कौन कितना सीख सका। इसी वजह से इस परीक्षा के परिणाम तत्काल घोषित कर दिए जाएंगे।
पर, ये भर्ती प्रक्रिया कर दी निरस्त
एक तरफ यूपी में इतिहास बनने जा रहा है तो दूसरी ओर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने डार्क रूम सहायक (डीआरए) के पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दी है।
यह कार्रवाई भर्ती में धांधली व पैसा वसूली की शिकायत मिलने के बाद की गई है। चिकित्सा मंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और परीक्षा कराने वाली टीएसआर इंफ्राटेक कंपनी के खिलाफ स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने के भी निर्देश दे दिए हैं।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग ने डाक्र रूम असिस्टेंट के 355 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। भर्ती प्रक्रिया संपन्न कराने की जिम्मेदारी लखनऊ की एक इंफ्राटेक कंपनी को दी गई थी।
मंत्री ने बताया, हो रही थी वसूली
चिकित्सा मंत्री अहमद हसन ने बताया कि उन्हें शिकायत मिल रही थीं कि डार्क रूम सहायकों की भर्ती में कंपनी और स्वास्थ्य भवन के अधिकारियों ने जमकर वसूली की है।
अभ्यर्थियों से 8 से 10 लाख रुपये वसूले गए। यही नहीं उन्हीं अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, जिन्होंने पैसे दिए थे।
पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राम आसरे विश्वकर्मा ने भी इस मामले की शिकायत की थी। प्रथम दृष्टया जांच में भर्ती प्रक्रिया में धांधली व पैसे वसूली के आरोप सही पाए गए।
इसके बाद बुधवार को चिकित्सा मंत्री ने प्रमुख सचिव को पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने के निर्देश जारी कर दिए।
कई बड़े अधिकारी भी शामिल
चिकित्सा मंत्री अहमद हसन ने बताया कि इस गड़बड़ी में अपर निदेशक और निदेशक स्तर के कई अधिकारियों के शामिल होने की सूचना मिली है।
बताया जा रहा है कि परीक्षा के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेश चंद्रा, उनके सहायक डॉ. अनिल कुमार सिंह, निदेशक पैरामेडिकल डॉ. बीएस श्रीवास्तव व विभागीय सहायकों और टीएसआर इंफ्राटेक कंपनी भी भर्ती प्रक्रिया में धांधली की जांच के दायरे में आएंगे।
देर रात इन अधिकारियों के तबादले किए जाने की सूचना है। जबकि महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. अमर सिंह राठौर का कहना है कि उन्हें तबादले का आदेश नहीं मिला है।
डॉ. अनिल कुमार सिंह रिटायर हो चुके हैं। जबकि डॉ. बीएस श्रीवास्तव अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं।