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लखनऊ समेत कई शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद मुख्य सचिव आलोक रंजन ने शुक्रवार को निर्देश दिए हैं कि एक साल पुराना कोई भी वाहन प्रदूषण की एनओसी के बिना नहीं चलना चाहिए।
उन्होंने गृह, आवास और परिवहन विभाग के प्रमुख सचिवों के साथ ही मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर प्रदूषण नियंत्रण के उपाय करने को कहा है।
उन्होंने कहा है कि सभी जिलों में परिवहन, पुलिस और पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र प्राप्त किए बिना वाहनों के संचालन के विरुद्ध सघन अभियान चलाया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा है कि वाहनों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि होने, औद्योगिकीकरण एवं निर्माण के कारण प्रदेश के विभिन्न शहरों एवं नगरों के पर्यावरण में पार्टीकुलेट मैटर-10 के स्तर में वृद्धि हुई है।
वाहनों पर होगी ये कार्रवाई
इसका दुष्प्रभाव नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ विधिक कार्यवाही करने के साथ ही उनका रजिस्ट्रेशन निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
प्रत्येक जिले में निजी क्षेत्र में स्थापित प्रदूषण जांच केंद्रों की गुणवत्ता की भी जांच विभाग द्वारा गठित समिति से कराई जाए। जांच में इन प्रदूषण केंद्रों में अनियमितता पाई जाए तो उनके लाइसेंस भी निरस्त कर दिए जाएं।
उन्होंने कहा है कि जिन जिलों में ईपीसीए के निर्देशों के अधीन सार्वजनिक परिवहन में सीएनजी से चलने वाले वाहन चल रहे हैं तो वहां आसपास के जनपदों में डीजल चलित वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए।