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Lucknow News: मानसिक विकार से जूझ रहा हर सात में से एक किशोर
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लखनऊ विवि में हुआ कार्यक्रम।
लखनऊ। सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहना, दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करना और नकारात्मक खबरों को लगातार देखते रहना मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि युवा अपनी मानसिक सेहत को लेकर सजग रहें और तनाव से निपटने के लिए सकारात्मक उपाय अपनाएं। लखनऊ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में शनिवार को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने ये बातें कहीं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष और हैप्पी थिंकिंग लैब की निदेशक प्रो. अर्चना शुक्ला ने बताया कि दुनियाभर में 10 से 19 वर्ष की आयु के हर सात में से एक किशोर किसी मानसिक विकार से प्रभावित है। इस आयु वर्ग में मानसिक विकार वैश्विक बीमारी के कुल बोझ का 15 प्रतिशत हैं। वहीं, 15 से 29 वर्ष के युवाओं में आत्महत्या मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि इन आंकड़ों के पीछे युवाओं के संघर्ष और अनुभवों को समझना भी जरूरी है।
डिजिटल दुनिया के दबाव से बचना जरूरी
''लिव्ड एक्सपीरियंसेज हर्ड : रियल वॉइसेज, रियल चेंज'' विषय पर आयोजित चर्चा में दूरदर्शन उत्तर प्रदेश के प्रोग्राम हेड आत्मप्रकाश मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलू हैं, लेकिन इसका अत्यधिक इस्तेमाल हमारी सोच और धारणाओं को प्रभावित कर सकता है। पूर्व आईजी राजीव मल्होत्रा ने मानसिक सजगता पर जोर देते हुए कहा कि दूसरों के अनुभवों को बिना पूर्वाग्रह समझना चाहिए। साथ ही नकारात्मक खबरों को लगातार स्क्रॉल करने की आदत से बचना चाहिए।
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मानसिक स्वास्थ्य के अधिकारों को जानें
चर्चा में राज्य सरकार की अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता ईशा मित्तल ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और अधिकारों की जानकारी दी। कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति जागरूकता भी जरूरी है। सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् डॉ. शची सिंह ने रोजमर्रा के तनाव से निपटने के लिए मानसिक दृढ़ता विकसित करने पर जोर दिया। मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. अर्चना शुक्ला ने कहा कि समग्र विकास के लिए आत्मचिंतन और अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी जरूरी है। कार्यक्रम का समन्वय एवं संचालन मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मेघा सिंह ने किया। छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों से संवाद किया।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष और हैप्पी थिंकिंग लैब की निदेशक प्रो. अर्चना शुक्ला ने बताया कि दुनियाभर में 10 से 19 वर्ष की आयु के हर सात में से एक किशोर किसी मानसिक विकार से प्रभावित है। इस आयु वर्ग में मानसिक विकार वैश्विक बीमारी के कुल बोझ का 15 प्रतिशत हैं। वहीं, 15 से 29 वर्ष के युवाओं में आत्महत्या मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि इन आंकड़ों के पीछे युवाओं के संघर्ष और अनुभवों को समझना भी जरूरी है।
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डिजिटल दुनिया के दबाव से बचना जरूरी
''लिव्ड एक्सपीरियंसेज हर्ड : रियल वॉइसेज, रियल चेंज'' विषय पर आयोजित चर्चा में दूरदर्शन उत्तर प्रदेश के प्रोग्राम हेड आत्मप्रकाश मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलू हैं, लेकिन इसका अत्यधिक इस्तेमाल हमारी सोच और धारणाओं को प्रभावित कर सकता है। पूर्व आईजी राजीव मल्होत्रा ने मानसिक सजगता पर जोर देते हुए कहा कि दूसरों के अनुभवों को बिना पूर्वाग्रह समझना चाहिए। साथ ही नकारात्मक खबरों को लगातार स्क्रॉल करने की आदत से बचना चाहिए।
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मानसिक स्वास्थ्य के अधिकारों को जानें
चर्चा में राज्य सरकार की अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता ईशा मित्तल ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और अधिकारों की जानकारी दी। कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति जागरूकता भी जरूरी है। सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् डॉ. शची सिंह ने रोजमर्रा के तनाव से निपटने के लिए मानसिक दृढ़ता विकसित करने पर जोर दिया। मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. अर्चना शुक्ला ने कहा कि समग्र विकास के लिए आत्मचिंतन और अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी जरूरी है। कार्यक्रम का समन्वय एवं संचालन मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मेघा सिंह ने किया। छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों से संवाद किया।