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चिड़ियाघर, न बाबा न
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 20 Jun 2014 10:54 AM IST
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जीव-जंतु विभाग वाले अपने मंत्रीजी पिछले दिनों निरीक्षण के बहाने चिड़ियाघर की सैर करने पहुंच गए।
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डॉ. साहब ने मुखिया के शेर देखे। उसके बाद दफ्तर में दरबार जमाया और कामकाज का जायजा लिया। खबरनवीसों के सवालों के जवाब भी दिए।
सब कुछ ठीक-ठाक था कि न जाने डॉ. साहब को क्या सूझी- बोले चलो रेल की सवारी कर ली जाए। लाव-लश्कर लेकर स्टेशन तक पहुंचे ही थे कि जनता ने घेर लिया।
सवालों और शिकायतों की बौछार लग गई। अचानक बदले नजारे से मंत्री और उनके इर्द-गिर्द चल रहे अफसरों के पसीने छूटने लगे।
उलाहनों का दौर खत्म हुआ तो मंत्रीजी अधिकारियों को नसीहत देते हुए लौट गए कि जरा मीडिया को समझा लेना।
अधिकारियों ने कोशिश भी की लेकिन अगले दिन अखबारों में जो कुछ छपा उसके बाद मंत्रीजी ने चिड़ियाघर की तरफ रुख करने से तौबा कर ली। पता नहीं कब पब्लिक घेरकर फजीहत कर दे।