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सतही तौर पर निपटाई जा रही 'जन-सुनवाई' पोर्टल की शिकायतें, सख्त कार्रवाई के निर्देश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 20 May 2018 12:12 PM IST
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जन सुनवाई पोर्टल
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‘जन-सुनवाई’ पोर्टल पर शिकायतों के सतही निस्तारण ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। आकलन में सामने आया है कि शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता 80 प्रतिशत तक खराब है। मुख्य सचिव राजीव कुमार ने शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निपटारे के लिए अफसरों को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्य सचिव ने पिछले दिनों कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा की थी। इसमें पता चला कि समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस)-‘जनसुनवाई’ के अंतर्गत निस्तारित शिकायतों में गुणवत्ता का स्तर 80 प्रतिशत खराब है।
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सांसदों और विधायकों के पत्रों पर भी समुचित कार्रवाई नहीं हो रही। मुख्य सचिव ने इसे गंभीरता से लेते हुए जनसुनवाई पोर्टल की शिकायतों को ठीक से निस्तारित न करने वाले अफसरों के खिलाफ ‘डंडा’ चलाने का फरमान सुनाया है।
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मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे विभाग के कुछ कर्मठ अधिकारियों व कर्मचारियों को चिह्नित करें। प्रत्येक दिन 15 से 20 मिनट फीडबैक के लिए तय करें।
‘जन-सुनवाई’ के मामलों में की गई कार्यवाही की उनसे पड़ताल कराएं। उनसे प्राप्त फीडबैक के आधार पर उत्तरदायी अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को दंडित किया जाए। अधिकारियों से कहा गया है कि वे जन-सुनवाई से जुड़े मामलों को खुद देखें और शिकायतकर्ता से भी बात कर जानें कि वह जांच या कार्यवाही से संतुष्ट क्यों नहीं है?
माननीयों के पत्रों की कंप्यूटराइज्ड डायरी, हर महीने बैठक
मुख्य सचिव ने जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर सुनवाई न होने पर अलग से निर्देश दिए हैं। सांसदों और विधायकों के पत्रों की कंप्यूटराइज्ड डायरी बनेगी। इसके बाद उन्हें अंतरिम उत्तर भेजा जाएगा। फिर विभागों से समन्वय कर पूर्ण उत्तर भेजा जाएगा। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे सभी सांसदों और विधायकों के साथ हर महीने बैठक करें जिसमें समस्त योजनाओं के बारे में अवगत कराएं।